डॉक्टर ने चेताया: रोजाना की ये गलत आदतें बढ़ा सकती हैं सुनने की समस्या

डॉक्टर ने चेताया: रोजाना की ये गलत आदतें बढ़ा सकती हैं सुनने की समस्या

कान की सेहत के लिए रोजाना की आदतें अहम हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि कॉटन बड, माचिस की तीली या तेल का गलत इस्तेमाल, तेज आवाज़ और लंबे समय तक हेडफोन का उपयोग कान की क्षति और सुनने की कमी का कारण बन सकता है। अचानक सुनाई कम होना या चक्कर आने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

Ear Protection: एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि रोजाना की गलत आदतें जैसे कॉटन बड का गहरा इस्तेमाल, कान में तेल डालना और लंबे समय तक तेज आवाज़ में हेडफोन का प्रयोग कान की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। Dr. Suven Kalra, मैक्स हॉस्पिटल, ईएनटी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट, बताते हैं कि अचानक सुनाई कम होना या वर्टिगो जैसी समस्याओं को नजरअंदाज करना स्थायी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। सही देखभाल और समय पर विशेषज्ञ से जांच आवश्यक है।

कॉटन बड और विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल न करें

बहुत लोग नहाने या खुजली होने पर कान की सफाई के लिए कॉटन बड, माचिस की तीली या हेयरपिन का इस्तेमाल करते हैं। Dr. Suven Kalra, ईएनटी विशेषज्ञ, बताते हैं कि ये वस्तुएं कान के अंदर मैल को धकेल सकती हैं, जिससे ब्लॉकेज और इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। उनका कहना है कि कॉटन बड केवल कान के बाहरी हिस्से तक सीमित रखें और अगर मैल ज्यादा जमा हो तो विशेषज्ञ से सफाई कराएं।

तेल डालने की आदत भी हानिकारक हो सकती है। कान में तेल डालने से फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह कोई तरल कान में न डालें।

तेज आवाज़ और लंबे समय तक हेडफोन का इस्तेमाल न करें

शादी या पार्टी में डीजे की तेज आवाज़ या लंबे समय तक हेडफोन का इस्तेमाल कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि ईयरफोन/ईयरबड का उपयोग करते समय 60 मिनट के अंतराल पर ब्रेक लें और आवाज़ 60 डेसिबल से अधिक न रखें। लगातार तेज आवाज़ सुनने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

यदि कान में दर्द, पानी आना या इंफेक्शन हो, तो खुद से दवा न लें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही इलाज शुरू करें।

सुनाई कम होना और चक्कर आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें

अचानक सुनाई कम होना या वर्टिगो (चक्कर) आना इनर ईयर की समस्या का संकेत हो सकता है। इनर ईयर सुनने और संतुलन दोनों को नियंत्रित करता है। Dr. Kalra बताते हैं कि ऐसी स्थिति में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। देर करने से सुनने की क्षमता पर स्थायी असर पड़ सकता है।

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