DRDO ने चौथी पीढ़ी के VSHORADS का किया सफल परीक्षण, भारत की वायु रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने स्वदेशी चौथी पीढ़ी के VSHORADS मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। इस उपलब्धि से भारत की

भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने चौथी पीढ़ी के ‘वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम’ (VSHORADS) का सफल परीक्षण किया है।

नई दिल्ली: भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीक को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ मजबूत किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने चौथी पीढ़ी के वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) के सफल उड़ान परीक्षणों की घोषणा की है। राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किए गए तीन विकासात्मक परीक्षणों ने इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता को प्रदर्शित किया।

यह सफलता भारत के रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली भविष्य के हवाई खतरों से निपटने में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को और मजबूत करेगी।

क्या है VSHORADS?

VSHORADS यानी Very Short Range Air Defence System एक अत्याधुनिक, मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) है, जिसे कम दूरी पर आने वाले हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली सैनिकों द्वारा आसानी से ले जाई और संचालित की जा सकती है, जिससे युद्धक्षेत्र में इसकी उपयोगिता और लचीलापन बढ़ जाता है।

इस परियोजना का विकास DRDO के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने अन्य रक्षा प्रयोगशालाओं और औद्योगिक भागीदारों के सहयोग से किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित प्रणाली है, जो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।

परीक्षण में क्या रहा खास?

DRDO ने चौथी पीढ़ी के VSHORADS का किया सफल परीक्षण, भारत की वायु रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में किए गए तीनों उड़ान परीक्षण विभिन्न प्रकार के तेज गति वाले हवाई लक्ष्यों के विरुद्ध किए गए। परीक्षणों का उद्देश्य अधिकतम रेंज, अधिकतम ऊंचाई और विभिन्न परिस्थितियों में लक्ष्य भेदन क्षमता का मूल्यांकन करना था। इन परीक्षणों में मिसाइल ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और महत्वपूर्ण प्रदर्शन मानकों को पूरा किया। 

विशेष रूप से इसकी "हिट-टू-किल" क्षमता ने विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। यह तकनीक मिसाइल को लक्ष्य से सीधे टकराकर उसे नष्ट करने में सक्षम बनाती है, जिससे उसकी मारक क्षमता और सटीकता दोनों बढ़ जाती हैं। परीक्षणों के दौरान मिसाइल ने ऐसे लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक ट्रैक और नष्ट किया जो उसकी ओर आ रहे थे, उससे दूर जा रहे थे या उसके मार्ग को पार कर रहे थे। यह क्षमता आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां हवाई खतरे लगातार दिशा और गति बदल सकते हैं।

भारतीय सशस्त्र बलों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रणाली?

आधुनिक युद्ध में ड्रोन, हेलीकॉप्टर, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान और अन्य हवाई प्लेटफॉर्म सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। VSHORADS जैसी प्रणालियां अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों को ऐसे खतरों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना की सामरिक क्षमताओं को मजबूत करेगी। परियोजना के विकास चरण से ही तीनों सेनाएं इससे जुड़ी रही हैं और परीक्षण प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं।

VSHORADS का सफल विकास भारत के "आत्मनिर्भर भारत" और स्वदेशी रक्षा उत्पादन कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लंबे समय तक भारत को इस श्रेणी की प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। अब स्वदेशी समाधान उपलब्ध होने से न केवल रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।

Leave a comment