इंग्लैंड और वेल्स में रिकॉर्ड गर्मी बनी जानलेवा, 2,700 से ज्यादा मौतों का अनुमान

इंग्लैंड और वेल्स में मई-जून 2026 की रिकॉर्ड गर्मी के कारण 2,700 से अधिक लोगों की मौत का अनुमान। वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन और हीटवेव को प्रमुख कारण बताया।

इंग्लैंड और वेल्स में मई और जून 2026 की रिकॉर्डतोड़ हीटवेव के कारण 2,700 से अधिक लोगों की गर्मी से जुड़ी वजहों से मौत होने का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को इस संकट का प्रमुख कारण बताया है।

लंदन: यूनाइटेड किंगडम के इंग्लैंड और वेल्स में वर्ष 2026 की भीषण गर्मी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन के अनुसार, मई और जून में आई असाधारण हीटवेव के दौरान गर्मी से संबंधित कारणों से 2,700 से अधिक लोगों की मौत हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अनुमान पिछले वर्षों के मृत्यु आंकड़ों, मौसम के रिकॉर्ड और अत्यधिक तापमान के स्वास्थ्य पर प्रभाव के आधार पर तैयार किया गया है।

यह अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन, मेट ऑफिस और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह जारी रही, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

जून की हीटवेव सबसे घातक साबित हुई

अध्ययन के मुताबिक, मई के अंत में आई गर्मी की लहर के दौरान लगभग 550 लोगों की मौत का अनुमान है, जबकि जून की भीषण हीटवेव में करीब 2,200 लोगों की जान गई हो सकती है। जून 2026 इंग्लैंड के इतिहास का सबसे गर्म जून दर्ज किया गया। इस दौरान नॉरफ़ॉक के लिंगवुड क्षेत्र में तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1957 का 35.6 डिग्री सेल्सियस का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए इंग्लैंड और वेल्स के कई हिस्सों में रेड हीट अलर्ट जारी किया गया था। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अत्यधिक गर्मी स्वस्थ लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या था 'हीट डोम' और कैसे बढ़ा संकट?

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही हीटवेव का प्रमुख कारण "हीट डोम" था। यह एक ऐसी मौसमीय स्थिति होती है जिसमें उच्च दबाव का क्षेत्र लंबे समय तक किसी इलाके के ऊपर बना रहता है और गर्म हवा उसी क्षेत्र में फंस जाती है। इस वजह से तापमान लगातार बढ़ता रहता है और रात के समय भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती। जून में कई क्षेत्रों में गर्म और उमस भरी रातों ने लोगों को राहत नहीं दी, जिससे शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने में कठिनाई हुई।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई गर्मी की तीव्रता

शोधकर्ताओं का कहना है कि मानव गतिविधियों से बढ़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने इस गर्मी को और अधिक गंभीर बना दिया। उनके अनुसार, औद्योगिक युग से अब तक पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इसी कारण मई और जून 2026 की अधिकतम गर्मी में लगभग 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त वृद्धि हुई। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में कमी नहीं लाई गई, तो भविष्य में ऐसी हीटवेव अधिक बार, अधिक लंबी और अधिक घातक हो सकती हैं।

क्यों कहलाती है हीटवेव 'साइलेंट किलर'?

विशेषज्ञ अत्यधिक गर्मी को "साइलेंट किलर" यानी मूक हत्यारा कहते हैं, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। अत्यधिक गर्मी के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। यदि व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता या लगातार गर्म वातावरण में रहता है, तो हीट एक्सहॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसके कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को?

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वर्गों पर हीटवेव का प्रभाव अधिक गंभीर होता है।

बुजुर्ग

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है।

छोटे बच्चे

शिशुओं और छोटे बच्चों का शरीर तेजी से गर्म होता है, जिससे उन्हें अधिक खतरा रहता है।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग

हृदय रोग, श्वसन रोग, मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियों वाले लोगों में जोखिम अधिक रहता है।

स्वस्थ लोग भी सुरक्षित नहीं

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि फिट और स्वस्थ व्यक्ति भी लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने पर गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बढ़ा दबाव

गर्मी के दौरान अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं पर भारी दबाव देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव केवल स्वास्थ्य संबंधी संकट नहीं है, बल्कि यह आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अतिरिक्त बोझ डालती है। शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने कहा कि समय पर चेतावनी प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर तैयारी से भविष्य में मौतों की संख्या कम की जा सकती है।

भविष्य में बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की वर्तमान गति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में उत्तरी यूरोप में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या ठंड से होने वाली मौतों के बराबर या उससे अधिक हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया कितनी तेजी से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाती है और देश जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खुद को कितना तैयार करते हैं।

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