ERO नियुक्तियों पर चिंता, सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में बाधा रोकने पर दिखाया सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को चेताया कि SIR प्रक्रिया में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं होगी। सुधार की जरूरत पर निर्देश होंगे, लेकिन प्रक्रिया को रोकने की अनुमति नही

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त न करने का स्पष्ट संदेश दिया। अदालत ने समय सीमा बढ़ाई, लेकिन प्रक्रिया रोकने की अनुमति नहीं दी और सभी राज्यों को तैयारी के लिए निर्देश दिए।

New Delhi: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Investigation Report) प्रक्रिया को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कड़ा संदेश दिया कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायमूर्ति सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता होगी, तो अदालत आदेश जारी करेगी, लेकिन किसी भी प्रकार की रुकावट को सहन नहीं किया जाएगा।

समय सीमा बढ़ी

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति पर जताई गई चिंताओं के बावजूद SIR डेटा को अंतिम रूप देने की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि अधिकारियों की सूची 5 फरवरी तक प्रस्तुत कर दी गई होती, तो भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अब तक निर्णय ले चुका होता। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार ही आगे बढ़नी चाहिए।

ERO नियुक्तियों पर चिंता

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (EROs) की नियुक्तियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ERO अर्ध-न्यायिक कार्य करते हैं और उनके पास पर्याप्त न्यायिक अनुभव होना आवश्यक है।

नायडू ने बताया कि ECI ने लगभग 300 ग्रुप बी अधिकारियों की मांग की थी, लेकिन ऐसे अनुभव वाले केवल 64 अधिकारियों को ही नियुक्त किया गया। शेष नियुक्तियां वेतन समानता के आधार पर की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियर जैसे अधिकारी SIR के तहत न्यायिक निर्णयों को संभालने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि उनके निर्णय अपीलीय अधिकारियों के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।

सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को सूचित किया कि मतदाताओं के नामों को बड़े पैमाने पर हटाना सूक्ष्म पर्यवेक्षकों के माध्यम से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया का पैमाना बहुत व्यापक है और इस काम के लिए पर्याप्त अनुभव और संसाधन जरूरी हैं।

दीवान ने मामले की तात्कालिकता पर जोर देते हुए बताया कि SIR प्रक्रिया 14 फरवरी को समाप्त होने वाली है। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी, जिससे राज्यों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया।

राज्यों के लिए संदेश

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं होगी। अदालत ने कहा कि जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां निर्देश जारी किए जाएंगे, लेकिन प्रक्रिया को रोकने का कोई अवसर नहीं दिया जाएगा।

अदालत की चिंता

चुनाव आयोग द्वारा उठाई गई चिंता मुख्य रूप से अधिकारियों की अपर्याप्त संख्या और उनके अनुभव पर केंद्रित थी। ERO नियुक्तियों में कमी से SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सभी अधिकारियों की समय पर नियुक्ति और प्रशिक्षण आवश्यक है, ताकि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कमी न रहे।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रक्रिया में रुकावट आती है, तो अदालत सख्त कार्रवाई कर सकती है। न्यायाधीशों ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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