भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सौदे में 114 राफेल Fighter Jets और लंबी दूरी की स्कैल्प मिसाइलों की खरीद शामिल है। यह सौदा भारतीय वायु सेना की संख्या, तकनीकी क्षमता और सामरिक ताकत बढ़ाएगा।
Defence Deal: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर दो बड़े सौदे चर्चा में हैं, जो देश की वायु शक्ति और सामरिक क्षमता को नई दिशा देंगे। पहली तरफ लंबी दूरी की स्कैल्प क्रूज मिसाइलों का प्रस्तावित सौदा है, तो दूसरी तरफ 114 राफेल युद्धक विमानों की खरीद पर फैसला तेजी से नज़दीक दिख रहा है। इन दोनों सौदों का मकसद भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाना और भविष्य के किसी भी टकराव में उसे पूरी तरह तैयार रखना है।
स्कैल्प मिसाइलों का महत्व
भारत और फ्रांस के बीच स्कैल्प मिसाइलों के करीब 3200 करोड़ रुपये के सौदे की बातचीत अंतिम दौर में है। स्कैल्प मिसाइल एक लंबी दूरी की एयर टू सरफेस क्रूज मिसाइल है, जो अत्यधिक सटीक प्रहार के लिए जानी जाती है। इसकी मारक दूरी 250 किलोमीटर से अधिक है और यह दुश्मन के मजबूत हवाई सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है।
भारतीय वायु सेना ने पहले भी ऑपरेशन सिंदूर में स्कैल्प मिसाइलों का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। इस अभियान में कई अहम आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और मिसाइलों ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया। इस अनुभव ने यह भरोसा बढ़ाया कि भविष्य के किसी भी सीमा संघर्ष या आतंकवाद विरोधी अभियान में स्कैल्प मिसाइल भारत की सटीक प्रहार क्षमता को मजबूती देंगी।
रणनीतिक दृष्टि से स्कैल्प मिसाइलें
स्कैल्प मिसाइलें पारंपरिक सीमा संघर्ष से परे जाकर रणनीतिक दृष्टि को दर्शाती हैं। अब युद्ध केवल सैनिकों के प्रत्यक्ष मुकाबले तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि दूर बैठे दुश्मन के कमांड सेंटर, हथियार भंडार और आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना भी उतना ही जरूरी हो गया है। इस नजरिए से स्कैल्प मिसाइलों का सौदा भारत की दूरस्थ प्रहार क्षमता को और मजबूत करता है और उसे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में निर्णायक शक्ति देता है।
114 राफेल विमानों की संभावित खरीद

इसी बीच 114 राफेल विमानों की खरीद पर भी फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से पहले निर्णय आने की संभावना बढ़ गई है। यह सौदा भारतीय वायु सेना की संरचना पर बड़ा असर डाल सकता है। खबरों के अनुसार, इस सौदे में कुछ विमान सीधे तैयार हालत में आएंगे, जबकि बाकी का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसमें स्थानीय निर्माण और स्थानीय सामग्री के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारतीय वायु सेना लंबे समय से स्क्वाड्रन की संख्या में कमी की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में आधुनिक बहु-भूमिका वाले विमान मिलना उसकी ताकत को नया आधार दे सकता है। राफेल अपने आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और विभिन्न हथियार ले जाने की क्षमता के कारण पहले ही खुद को साबित कर चुका है।
क्षेत्रीय संतुलन
स्कैल्प मिसाइल और राफेल विमानों के सौदे सामान्य खरीदारी नहीं हैं, बल्कि ये भारत की व्यापक रणनीतिक सोच का संकेत हैं। पहला संदेश यह है कि भारत अपनी लंबी दूरी से सटीक प्रहार क्षमता को बढ़ा रहा है। दूसरा, वह अपनी वायु सेना को संख्या और गुणवत्ता दोनों में मजबूत करना चाहता है।
क्षेत्रीय संदर्भ में देखें तो भारत को दो मोर्चों की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पश्चिमी सीमा पर तनाव और उत्तरी दिशा में सतर्कता आवश्यक है। ऐसे में यदि भारत के पास ऐसी मिसाइलें हों जो दूर से दुश्मन के अहम ठिकानों को निशाना बना सकें और ऐसे आधुनिक विमान हों जो हर मौसम में अभियान चला सकें, तो सामरिक संतुलन स्वाभाविक रूप से भारत के पक्ष में झुकता है।
फ्रांस की भूमिका
फ्रांस उन चुनिंदा देशों में है, जो भारत को उन्नत रक्षा तकनीक देने में खुलापन दिखाते रहे हैं। इससे भारत को आपूर्ति की विविधता मिलती है और किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है। स्कैल्प मिसाइल और राफेल विमान सिर्फ हथियार नहीं हैं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और तकनीकी क्षमता को मजबूती देने वाले औजार हैं।
हाल के वर्षों में भारत की रक्षा नीति में कई बदलाव आए हैं। अब जोर केवल हथियारों की खरीद पर नहीं, बल्कि क्षमता निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और देश में निर्माण पर भी है। मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण, तेज़ फैसले और आत्मनिर्भरता पर बार-बार जोर दिया है। राफेल का पिछला सौदा हो, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा या रणनीतिक साझेदारी का विस्तार, इन सब में साफ तौर पर दिखता है कि भारत सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा।










