Farmers Protest: किसान आंदोलन में शंभू बॉर्डर पर एक और मौत, सल्फास सेवन से सुसाइड

पंजाब के शंभू बॉर्डर पर किसान रेशम सिंह ने सल्फास निगलकर आत्महत्या की। किसान एमएसपी गारंटी कानून की मांग कर रहे थे, और आंदोलन में निराशा बढ़ी किसान की आत्महत्या

पंजाब के शंभू बॉर्डर पर किसान ने सल्फास निगलकर आत्महत्या की, उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित किया। किसान एमएसपी गारंटी कानून की मांग कर रहे थे।

Farmers Protest: एमएसपी की गारंटी कानून और अन्य किसानी मांगों को लेकर पंजाब के शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। किसानों की मांगों को लेकर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी अपनी आवाज उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी बीच, शंभू बॉर्डर पर एक किसान ने आत्महत्या करने की कोशिश की। उसने सल्फास निगल लिया, जिसके बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई।

रेशम सिंह की मौत

Farmers Protest: किसान आंदोलन में शंभू बॉर्डर पर एक और मौत, सल्फास सेवन से सुसाइड

तरनतारन जिले के गांव पहुविंड के किसान रेशम सिंह ने 6 जनवरी को धरने में भाग लेने के लिए शंभू बॉर्डर का रुख किया था। रेशम सिंह ने प्रदर्शन के दौरान सल्फास निगल लिया, और उसे तुरंत पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर हो गई और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत की पुष्टि किसान नेता तेजवीर सिंह पंजोखरा ने की।

रेशम सिंह के योगदान को किया याद

रेशम सिंह के निधन के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। गांव के पूर्व सरपंच इंद्रवीर सिंह ने बताया कि रेशम सिंह की पत्नी दविंदर कौर और बेटा इंद्रजीत सिंह बहुत परेशान हैं। वे इसे न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी मान रहे हैं, बल्कि इस घटना ने पूरे आंदोलन को और भी दुखी कर दिया है। रेशम सिंह पहले भी दिल्ली में किसान आंदोलन में भाग ले चुके थे और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

किसान आंदोलन में बढ़ती निराशा

Farmers Protest: किसान आंदोलन में शंभू बॉर्डर पर एक और मौत, सल्फास सेवन से सुसाइड

रेशम सिंह की मौत ने किसानों के आंदोलन में निराशा का माहौल पैदा कर दिया है। इस घटना के बाद आंदोलनकारियों में और भी गुस्सा और निराशा का माहौल है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को किसानों की मांगों पर जल्दी ध्यान देना चाहिए और इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

किसान संगठनों का कहना है कि शंभू बॉर्डर और अन्य स्थानों पर यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।

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