FCRA संशोधन बिल को लेकर संसद में बढ़ सकता है घमासान, सरकार और विपक्ष होंगे आमने-सामने

FCRA संशोधन बिल को लेकर संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है। सरकार और विपक्ष के बीच विदेशी फंडिंग नियमों, पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सोमवार को संसद में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस बिल को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।

नई दिल्ली: संसद के आगामी सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA Amendment Bill को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है। केंद्र सरकार सोमवार को इस विवादित विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पहले ही इस बिल पर चिंता जताई है, ऐसे में सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। वहीं, विपक्ष और सिविल सोसाइटी से जुड़े संगठन इसे गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर असर डालने वाला कदम बता रहे हैं।

पहले भी लोकसभा में पेश हो चुका है बिल

FCRA संशोधन विधेयक को केंद्र सरकार इससे पहले 25 मार्च को लोकसभा में पेश कर चुकी है। हालांकि, विपक्ष के विरोध और विभिन्न सामाजिक संगठनों की आपत्तियों के कारण उस समय इस पर आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी थी। अब सरकार इसे दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा भी की है। सरकार की कोशिश है कि मौजूदा संसद सत्र में इस विधेयक को पारित कराया जाए।

विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने जताई चिंता

कांग्रेस, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के अलावा कई चर्च संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों ने FCRA संशोधन बिल का विरोध किया है। विरोध करने वालों का तर्क है कि नए प्रावधानों से विदेशी सहायता प्राप्त करने वाली संस्थाओं पर सरकारी निगरानी और नियंत्रण बढ़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव कल्याण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को इससे कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

डीएमके सांसद पी. विल्सन और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) सहित कई संगठनों ने सरकार से विधेयक पर व्यापक चर्चा करने और सभी हितधारकों से सुझाव लेने की मांग की है।

सरकार का पक्ष क्या है?

केंद्र सरकार का कहना है कि FCRA कानून में बदलाव का उद्देश्य केवल उन संस्थाओं पर कार्रवाई करना है जो विदेशी धन का गलत इस्तेमाल करती हैं या नियमों का उल्लंघन करती हैं। सरकार के अनुसार, विदेशी फंड का उपयोग देश के कानूनों के अनुरूप होना चाहिए और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। 

सरकार का दावा है कि संशोधन से ईमानदारी से काम करने वाले संगठनों को परेशानी नहीं होगी, बल्कि अवैध गतिविधियों में शामिल संस्थाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

बिल में बदलाव कर सकती है सरकार

विपक्ष के विरोध और विभिन्न संगठनों की आपत्तियों को देखते हुए केंद्र सरकार विधेयक में कुछ बदलाव करने पर विचार कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बिल को संसद से मंजूरी दिलाना है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि प्रस्तावित बदलाव किस स्तर के होंगे और क्या इससे विपक्ष की आपत्तियां दूर हो पाएंगी।

संसद में हाल के दिनों में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। ऐसे में FCRA संशोधन बिल भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष जहां इसे नागरिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार इसे वित्तीय अनुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सुधार बता रही है।

संसदीय कार्यवाही के दौरान इस विधेयक पर चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों के बीच किस तरह इस बिल को आगे बढ़ाती है और क्या इसमें कोई संशोधन किया जाता है।

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