पूर्व प्रधानमंत्री से जुड़े वार्ड-65 में इन दिनों गंदगी और जलभराव की गंभीर समस्या स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। क्षेत्र की कई गलियों में सीवर लाइनें उफन रही हैं, जिससे सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। हालात इतने खराब हैं कि सीवर का दूषित पानी और कचरा सीधे ऐतिहासिक 'गंगा की मौसी' के नाम से प्रसिद्ध तालाब तक पहुंच रहा है। इससे न केवल तालाब का पानी प्रदूषित हो रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर ओवरफ्लो की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कई महीनों से लोग नगर निगम और संबंधित विभागों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। बरसात के दौरान स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। सीवर का पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वार्ड-65 में स्थित 'गंगा की मौसी' तालाब धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कभी यह तालाब साफ पानी और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसमें लगातार गंदा पानी, प्लास्टिक, घरेलू कचरा और सीवर का बहाव पहुंचने से इसकी स्थिति बदहाल हो गई है। तालाब के किनारों पर भी कचरे का ढेर जमा हो गया है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि तालाब की नियमित सफाई नहीं होने और सीवर लाइन की खराब व्यवस्था के कारण जल स्रोत लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। कई लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो तालाब का अस्तित्व और उसकी धार्मिक पहचान दोनों पर संकट गहरा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तालाब के संरक्षण और सीवर व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।
इलाके के लोगों का कहना है कि गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ गया है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। कई परिवारों का कहना है कि बदबू और गंदगी के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ रही है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सीवर लाइन की मरम्मत, तालाब की सफाई और कचरा निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है। उन्होंने तालाब के चारों ओर स्वच्छता अभियान चलाने और अवैध रूप से कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी उन्हें मिली है और संबंधित टीम को निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। सीवर लाइन की सफाई, जाम पाइपों की मरम्मत और तालाब में जा रहे गंदे पानी को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही तालाब की सफाई और आसपास की स्वच्छता व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी सफाई अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए सीवर नेटवर्क को पूरी तरह दुरुस्त करना, जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाना और तालाब में गंदे पानी के प्रवेश को स्थायी रूप से रोकना जरूरी है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।
वार्ड-65 की यह स्थिति शहरी स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। एक ओर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्रोत में सीवर का पानी और कचरा पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। अब स्थानीय लोगों की नजर नगर निगम और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक हो पाता है।










