अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड हमले के दोषी पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल हसन की मौत की सजा और उसके कथित लाइव प्रसारण को लेकर चर्चा है। हालांकि, सजा की तारीख, प्रसारण और मंजूरी संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
वॉशिंगटन: अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई सामूहिक गोलीबारी के दोषी पूर्व अमेरिकी सेना मेजर निदाल मलिक हसन की मौत की सजा एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी सेना ने हसन को 3 दिसंबर 2026 को गोली मारकर मौत की सजा देने की तारीख तय की है। इस मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि सजा की कार्रवाई का लाइव प्रसारण किया जाएगा। यदि योजना के अनुसार ऐसा होता है, तो यह अमेरिका में मौत की सजा के प्रसारण से जुड़ा अभूतपूर्व घटनाक्रम होगा।
2009 के फोर्ट हुड हमले में 13 लोगों की मौत
5 नवंबर 2009 को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी हुई थी। उस समय अमेरिकी सेना में मेजर और मनोचिकित्सक के पद पर तैनात निदाल हसन ने सैन्य परिसर में लोगों पर गोलियां चलाई थीं। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 32 अन्य घायल हुए थे। यह अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान पर हुई सबसे घातक गोलीबारी की घटनाओं में से एक थी।
उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में सैन्य अभियान चला रहा था। हसन ने अपने मुकदमे के दौरान हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। रिपोर्टों के अनुसार, उसने अमेरिकी सैन्य अभियानों का विरोध करते हुए अपने कृत्य को जिहाद से जोड़ा था। हालांकि, इस मामले में अदालत का फैसला उसके बयानों के बजाय प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी कार्यवाही के आधार पर आया।
2013 में सैन्य अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा
हसन के मामले की सुनवाई अमेरिकी सैन्य अदालत में हुई। अगस्त 2013 में सैन्य जूरी ने उसे हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया। इसके बाद जूरी ने उसे मौत की सजा देने का फैसला किया। अमेरिकी सेना के आधिकारिक विवरण के अनुसार, हसन को 42 आरोपों में दोषी पाया गया था और पांच दिन बाद उसकी सजा निर्धारित की गई थी।
गोलीबारी के दौरान और गिरफ्तारी के समय लगी चोटों के कारण हसन कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया था। मुकदमे के दौरान उसने अपनी ओर से बचाव को सीमित रखा और हमले में अपनी भूमिका को स्वीकार किया। उसकी सजा को अंतिम रूप देने से पहले सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत अपील की प्रक्रिया चली।
ट्रंप की मंजूरी के बाद तय हुई सजा की तारीख
अमेरिकी सैन्य कानून के तहत सैन्य कैदी को दी गई मौत की सजा पर अंतिम मंजूरी देने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है। अमेरिकी सेना के 7 अक्टूबर 2026 को जारी विवरण के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर को हसन की मौत की सजा को मंजूरी दी थी। इसके बाद सेना के कार्यवाहक सचिव एडम टेले ने 6 अक्टूबर को सजा की तारीख निर्धारित की।
आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, हसन को 3 दिसंबर 2026 को टेक्सास के फोर्ट हुड में गोली मारकर मौत की सजा दी जानी है। यह वही सैन्य परिसर है जहां 2009 में हमला हुआ था। अमेरिकी सेना के लिए यह फैसला ऐतिहासिक भी है, क्योंकि सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत इससे पहले 1961 में मौत की सजा दी गई थी।
पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक प्रसारण की बात कही
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि लोग सजा की कार्रवाई देख सकें। इसके बाद 8 अक्टूबर को पेंटागन के एक अधिकारी ने समाचार माध्यमों को बताया कि हसन की मौत की सजा का लाइव प्रसारण करने की योजना है।

इस घोषणा ने अमेरिका में मौत की सजा को सार्वजनिक रूप से दिखाने की सीमा और उद्देश्य पर बहस शुरू कर दी है। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, यह अमेरिका में ऐसी कार्रवाई का पहला लाइव प्रसारण हो सकता है। हालांकि, प्रसारण किस मंच पर होगा, दर्शकों की उम्र से संबंधित कोई प्रतिबंध रहेगा या नहीं और प्रसारण की तकनीकी व्यवस्था कैसी होगी, इन सवालों पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
सैन्य फांसी और गोली मारकर सजा देने का ऐतिहासिक संदर्भ
अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में मौत की सजा दुर्लभ है। हसन की सजा पर अमल किया गया तो यह 1961 के बाद अमेरिकी सेना की पहली मौत की सजा होगी। गोली मारकर मौत की सजा देने की विधि के संदर्भ में भी यह एक ऐतिहासिक मामला होगा, क्योंकि अमेरिकी सेना ने आखिरी बार 1945 में फायरिंग स्क्वाड के जरिए ऐसी सजा दी थी।
अमेरिका में सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दिए जाने का इतिहास इससे भी पुराना है। पहले कई राज्यों में सार्वजनिक फांसी दी जाती थी, लेकिन समय के साथ इस प्रथा पर रोक लगाई गई और सजा को आम जनता की नजरों से दूर रखा जाने लगा। मौजूदा मामले में लाइव प्रसारण की योजना ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि क्या सरकार को किसी व्यक्ति की मौत की सजा को व्यापक दर्शकों के सामने प्रसारित करना चाहिए।
कानूनी चुनौतियां अब भी अहम
राष्ट्रपति की मंजूरी और तारीख तय होने के बावजूद किसी मौत की सजा पर अमल से पहले कानूनी अड़चनें सामने आ सकती हैं। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, हसन को अमेरिकी संघीय अदालतों में कुछ कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार है। ऐसी याचिका दायर होने पर अदालत सजा पर रोक लगाने या मामले की समीक्षा करने का आदेश दे सकती है।
इसलिए 3 दिसंबर की तारीख तय होने का अर्थ यह नहीं है कि सजा हर परिस्थिति में उसी दिन दी ही जाएगी। अंतिम स्थिति कानूनी कार्यवाही और संबंधित अधिकारियों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
मौत की सजा और लाइव प्रसारण पर उठे नैतिक सवाल
हसन का मामला केवल एक पुराने सामूहिक हमले और उसके दोषी को दी गई सजा तक सीमित नहीं है। लाइव प्रसारण की घोषणा ने मौत की सजा की पारदर्शिता, पीड़ित परिवारों की गरिमा और हिंसक घटनाओं को सार्वजनिक तमाशे में बदलने के जोखिम पर सवाल खड़े किए हैं।
समर्थकों के अनुसार, सार्वजनिक प्रसारण से अपराधों के गंभीर परिणामों का संदेश दिया जा सकता है। दूसरी ओर, आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों ने ऐसी कार्रवाई को प्रसारित करने के नैतिक और कानूनी प्रभावों पर चिंता जताई है।
फिलहाल, हसन की सजा के लिए तारीख तय है और पेंटागन की ओर से लाइव प्रसारण की योजना की पुष्टि की गई है। लेकिन प्रसारण की अंतिम व्यवस्था और किसी संभावित कानूनी चुनौती का परिणाम आगे की घटनाओं पर निर्भर करेगा। यह मामला आने वाले हफ्तों में अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था और मौत की सजा से जुड़ी बहस के केंद्र में बना रह सकता है।











