गणपत कृष्णा यादव ने आर्थिक तंगी, कम उम्र में शादी और कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी। UPSC में पांच बार असफल होने के बाद उन्होंने 2022 में छठे प्रयास में सफलता हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया।
Success Story: गणपत कृष्णा यादव की कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। साधारण परिवार से आने वाले गणपत ने बचपन में ऊंटगाड़ी पर ईंटें ढोने का काम किया, कम उम्र में शादी की जिम्मेदारी संभाली और कई बार असफल होने के बावजूद अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। आखिरकार वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का सपना साकार कर दिखाया।
कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन
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गणपत कृष्णा यादव का जीवन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा। उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था और घर के अधिकांश सदस्य मजदूरी से जुड़े काम करते थे। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता के साथ ईंट भट्टों पर काम करना शुरू कर दिया था। पढ़ाई के साथ-साथ वे ऊंटगाड़ी पर ईंटें ढोने का काम भी करते थे। कठिन मौसम और लंबी मेहनत के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी नहीं छोड़ा। परिवार में पढ़ाई-लिखाई की परंपरा नहीं थी, लेकिन गणपत ने शुरुआत से ही कुछ अलग करने का सपना देखा था।
कम उम्र में शादी, फिर भी नहीं छोड़ा पढ़ाई का रास्ता
सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गणपत ने दसवीं कक्षा अच्छे अंकों से पास की थी। इसी दौरान उनके परिवार ने उनकी शादी तय कर दी। कम उम्र में शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियां किसी भी छात्र के लिए बड़ी चुनौती हो सकती थीं, लेकिन उन्होंने इसे अपने सपनों के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने का फैसला किया और लगातार आगे बढ़ते रहे।
इंजीनियरिंग से नौकरी तक का सफर
बारहवीं के बाद गणपत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और नौकरी हासिल की। नौकरी मिलने के बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद शुरू की और घर की जिम्मेदारियों को निभाया। इस दौरान वे एक पति और पिता की भूमिका भी निभा रहे थे। हालांकि, उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना हमेशा जीवित रहा। इसी सपने ने उन्हें एक बड़ा जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया।
लोगों के ताने और लगातार असफलताएं
UPSC की तैयारी के दौरान गणपत को केवल पढ़ाई की चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा। गांव के कई लोग उनकी तैयारी को लेकर सवाल उठाते थे और बार-बार असफल होने पर उनका मजाक भी उड़ाते थे। स्थिति ऐसी हो गई थी कि गांव में निकलना तक मुश्किल महसूस होने लगा था।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने UPSC परीक्षा में कई बार प्रयास किया, लेकिन शुरुआती पांच प्रयासों में सफलता नहीं मिली। हर असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और नई रणनीति के साथ फिर तैयारी शुरू की। यही लगातार प्रयास उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
नौकरी छोड़ी और सपने को दी प्राथमिकता
एक समय ऐसा आया जब गणपत ने स्थायी नौकरी छोड़ने का कठिन फैसला लिया। उन्होंने गांव लौटकर जैविक खेती शुरू की और साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। यह निर्णय जोखिम भरा था क्योंकि परिवार की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही थीं। फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और पूरी मेहनत के साथ तैयारी जारी रखी।
छठे प्रयास में मिली सफलता
लगातार संघर्ष और वर्षों की मेहनत के बाद गणपत यादव ने 2022 में अपने छठे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ली। यह सफलता उनकी शादी के लगभग 17 साल बाद मिली। तैयारी के अंतिम चरण में उन्होंने मॉक टेस्ट, उत्तर लेखन अभ्यास और टॉपर्स की रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया, जिससे उनका प्रदर्शन बेहतर हुआ।
UPSC में सफलता के बाद उनकी नियुक्ति इंडियन रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स सर्विस (IRPFS) में असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर (ASC) के पद पर हुई। यह ग्रुप-ए राजपत्रित अधिकारी का पद होता है और इसे प्रतिष्ठित सेवाओं में गिना जाता है।
गणपत कृष्णा यादव की कहानी यह साबित करती है कि सफलता उम्र, परिस्थितियों या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार जारी रहें, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उनकी यात्रा आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।









