गयाजी में पुलिस विभाग ने ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पुलिस केंद्र में जांच के दौरान छुट्टी खत्म होने के बाद निर्धारित समय पर ड्यूटी पर योगदान नहीं देने वाले 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई की जद में एक पुलिस अवर निरीक्षक (SI), एक सहायक अवर निरीक्षक (ASI) और सात सिपाही शामिल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में अनुशासन को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त रुख का संदेश गया है।
बताया गया है कि एसएसपी सुशील कुमार पुलिस सेंटर में जांच के लिए पहुंचे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों की उपस्थिति, ड्यूटी पर योगदान और छुट्टी से वापस लौटने की स्थिति की जांच की गई। जांच के दौरान ऐसे पुलिसकर्मियों के बारे में जानकारी सामने आई, जो अवकाश की अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित समय पर अपनी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे थे। विभाग ने इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता माना और उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
पुलिस सेवा में अवकाश की अनुमति निर्धारित अवधि के लिए दी जाती है। छुट्टी समाप्त होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को तय समय पर अपनी ड्यूटी पर योगदान देना होता है। किसी कारण से अतिरिक्त अवकाश की आवश्यकता होने पर विभागीय स्तर पर अनुमति लेना जरूरी होता है। निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटना और इसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं देना विभागीय नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा जाता है। इसी तरह के मामले में गयाजी पुलिस केंद्र की जांच के दौरान कार्रवाई की गई।
एसएसपी सुशील कुमार ने पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्यूटी के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहें और विभाग द्वारा तय नियमों का पालन करें। पुलिस बल की जिम्मेदारी आम लोगों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की होती है। ऐसे में किसी पुलिसकर्मी का बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहना विभाग के लिए गंभीर विषय माना जाता है।
गयाजी पुलिस केंद्र में हुई जांच को इसी अनुशासन व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों की ओर से समय-समय पर पुलिस लाइन और पुलिस केंद्र में जवानों की उपस्थिति तथा ड्यूटी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाती है। इस तरह की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि स्वीकृत अवकाश के बाद सभी पुलिसकर्मी समय पर अपने निर्धारित स्थान पर योगदान कर रहे हैं और ड्यूटी व्यवस्था प्रभावित नहीं हो रही है।
इस कार्रवाई का असर पुलिस महकमे में भी देखने को मिल सकता है। निलंबन जैसी विभागीय कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी केवल अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की समीक्षा ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि पुलिस बल के अंदर अनुशासन और जवाबदेही पर भी नजर रख रहे हैं। पुलिसकर्मियों के लिए समय की पाबंदी और ड्यूटी पर उपलब्ध रहना सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गयाजी में इससे पहले भी इसी तरह की बड़ी कार्रवाई सामने आ चुकी है। 2 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस केंद्र के निरीक्षण के दौरान छुट्टी समाप्त होने के बाद निर्धारित समय पर ड्यूटी पर योगदान नहीं देने वाले 14 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। इनमें दो पुलिस अवर निरीक्षक और 12 सिपाही शामिल थे। एसएसपी सुशील कुमार ने उस समय भी इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की थी।
उस कार्रवाई के दौरान पुलिस केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों से यह भी सवाल किया गया था कि जिन पुलिसकर्मियों ने समय पर ड्यूटी पर योगदान नहीं किया, उनकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर क्यों नहीं दी गई। संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। एसएसपी ने साफ किया था कि अवकाश समाप्त होने के बाद प्रत्येक पुलिसकर्मी को निर्धारित स्थान पर समय पर योगदान करना होगा और नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
लगातार सामने आ रही ऐसी कार्रवाइयों से पुलिस विभाग के अंदर जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। एक ओर पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के लिए लगातार सक्रिय रहना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अनुशासन बनाए रखना भी वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। पुलिस बल में किसी स्तर पर लापरवाही होने से ड्यूटी का बोझ दूसरे कर्मचारियों पर बढ़ सकता है और आपात परिस्थितियों में उपलब्ध बल की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।
छुट्टी से वापस नहीं लौटने के मामलों में यह भी महत्वपूर्ण होता है कि संबंधित पुलिसकर्मी ने अपनी अनुपस्थिति के संबंध में कोई सूचना दी थी या नहीं। यदि किसी कर्मचारी को बीमारी, पारिवारिक आपात स्थिति या किसी अन्य वास्तविक कारण से अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है तो विभागीय प्रक्रिया के तहत इसकी सूचना और अनुमति जरूरी होती है। बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
एसएसपी सुशील कुमार की ओर से पुलिस अधिकारियों और जवानों को अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहने का निर्देश इसी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी केवल थाने या पुलिस लाइन तक सीमित नहीं होती। कानून-व्यवस्था की स्थिति, त्योहारों, भीड़भाड़, आपराधिक घटनाओं और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस बल की तत्काल जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में हर स्तर पर कर्मियों की उपलब्धता और समय पर ड्यूटी ज्वाइन करना जरूरी हो जाता है।
गयाजी एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र भी है, जहां अलग-अलग समय पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अलावा जिले में सामान्य कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी भी पुलिस बल पर रहती है। इसलिए पुलिस विभाग के लिए यह जरूरी है कि स्वीकृत अवकाश की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी समय पर वापस ड्यूटी पर मौजूद रहें।
हालिया कार्रवाई से पुलिसकर्मियों के बीच यह संदेश भी गया है कि ड्यूटी से जुड़ी छोटी समझी जाने वाली लापरवाही को भी वरिष्ठ अधिकारी गंभीरता से ले रहे हैं। निलंबन विभागीय कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे संबंधित कर्मियों के खिलाफ आगे की विभागीय प्रक्रिया भी चल सकती है। हालांकि किसी भी कर्मचारी के मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण विभागीय जांच तथा लागू नियमों के अनुसार होता है।
गयाजी पुलिस में हाल के दिनों में अनुशासन को लेकर हुई कार्रवाई केवल छुट्टी से देर से लौटने तक सीमित नहीं रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जहानाबाद के कड़ौना थानाध्यक्ष देवकांत वर्मा को भी एक अलग मामले में निलंबित किया गया था। उन पर बांकेबाजार थानाध्यक्ष के साथ बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और जमीन विवाद के मामले में एक पक्ष पर दबाव बनाने का आरोप था। शिकायत के बाद जांच कराई गई और जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
इन घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ड्यूटी, अनुशासन और पद के दायित्वों को लेकर सख्त रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का संदेश है कि पुलिस सेवा में जिम्मेदारी निभाते समय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। चाहे मामला समय पर ड्यूटी ज्वाइन करने का हो या किसी मामले में पद की मर्यादा बनाए रखने का, लापरवाही सामने आने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
गयाजी में पुलिस केंद्र की जांच और उसके बाद हुई कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि वरिष्ठ अधिकारी अब केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय विभागीय स्तर पर भी निगरानी बढ़ा रहे हैं। पुलिस बल की कार्यक्षमता सीधे तौर पर उसके अनुशासन और उपलब्धता से जुड़ी होती है। इसलिए जवानों की उपस्थिति, छुट्टी का रिकॉर्ड और ड्यूटी योगदान जैसे मामलों की नियमित जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल 9 पुलिसकर्मियों के निलंबन से जुड़ी कार्रवाई को लेकर विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी मामलों में अनुपस्थिति की अवधि कितनी थी और संबंधित कर्मियों ने ड्यूटी पर वापस नहीं आने के लिए क्या कारण बताया था। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का मुख्य आधार छुट्टी समाप्त होने के बाद निर्धारित समय पर ड्यूटी पर योगदान नहीं देना है।
गयाजी पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से एक बात साफ है कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही को लेकर वरिष्ठ अधिकारी अब सख्ती बरत रहे हैं। पुलिसकर्मियों को निर्धारित समय पर ड्यूटी पर लौटने, वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक सूचना देने और विभागीय नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। आने वाले दिनों में भी यदि इसी तरह की जांच जारी रहती है तो ड्यूटी से अनुपस्थित रहने या अनुशासन तोड़ने वाले अन्य कर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।









