UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में जनवरी से जून 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए बाल और जबरन विवाह के मामलों में 123% वृद्धि हुई। युद्ध, भूख, गरीबी और विस्थापन ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा के जोखिम को बढ़ाया है।
गाजा सिटी: गाजा में युद्ध, विस्थापन, भूख और बुनियादी जरूरतों की कमी के बीच महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच दर्ज बाल और जबरन शादियों के मामलों में 123% की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवारों पर बढ़ते आर्थिक और मानवीय दबाव के कारण कुछ लड़कियों की कम उम्र में शादी को जीवित रहने के एक तरीके के रूप में देखा जा रहा है। UNFPA ने कहा है कि भूख, गरीबी, आय के साधनों की कमी, विस्थापन और स्कूल बंद होने जैसी परिस्थितियां इस जोखिम को बढ़ा रही हैं।
123% बढ़े बाल और जबरन विवाह के मामले
UNFPA के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच गाजा में रिपोर्ट किए गए जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123% की वृद्धि हुई। संस्था ने इसे महिलाओं और लड़कियों के लिए बिगड़ते सुरक्षा माहौल से जोड़ते हुए बताया कि परिवारों के सामने भोजन, आश्रय और आय जैसी बुनियादी जरूरतों का गंभीर संकट है।
UNFPA की अप्रैल-जून 2026 की रिपोर्ट भी बताती है कि विस्थापन, अपर्याप्त आश्रय, संसाधनों की कमी और आवश्यक सेवाओं तक सीमित पहुंच ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के जोखिम को बढ़ाया है।
अप्रैल 2026 में जारी UNFPA के एक अलग विश्लेषण में भी कहा गया था कि युद्ध के दौरान गाजा में बाल विवाह को लेकर दबाव बढ़ा है। संगठन के अनुसार, 2025 में केवल चार महीनों के दौरान 14 से 16 वर्ष की कम से कम 400 लड़कियों के लिए विवाह की अनुमति दिए जाने के कागजी रिकॉर्ड साझेदार संस्थाओं ने देखे थे। UNFPA ने यह भी चेतावनी दी थी कि पंजीकरण व्यवस्था के कमजोर होने के कारण वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
भूख और विस्थापन से बढ़ा लड़कियों पर दबाव
UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में बाल विवाह के पीछे कई मामलों में जीवित रहने की मजबूरी और आर्थिक संकट जैसे कारण दिखाई दे रहे हैं। परिवारों के विस्थापन, आय के साधनों के खत्म होने और भोजन की कमी ने लड़कियों की स्थिति को और कमजोर किया है।
रिपोर्ट में दर्ज एक मामले के अनुसार, एक पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि गंभीर खाद्य संकट किस तरह परिवारों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।
कुछ मामलों में सामाजिक बदनामी या तथाकथित ‘इज्जत’ के दबाव में यौन हिंसा की पीड़िताओं की शादी आरोपी या किसी अन्य व्यक्ति से कराए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में ऐसे मामलों को लैंगिक हिंसा और सामाजिक दबाव के व्यापक संकट के संदर्भ में रखा गया है।
रेप पीड़िताओं की शादी आरोपियों से कराने के मामले
रिपोर्ट में गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में महिलाओं के अनुभवों को भी दर्ज किया गया है। UNFPA के अनुसार, संगठन और उसके साझेदारों ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के मामलों की निगरानी की है, जबकि हालिया विश्लेषण में सेवा प्रदाताओं द्वारा दर्ज मामलों में यौन हिंसा और जबरन विवाह में वृद्धि सामने आई है।
कुछ मामलों में परिवारों और समुदायों की ओर से पीड़िता को सामाजिक कलंक से बचाने के नाम पर शादी कराने का दबाव डाला गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन महिलाओं और लड़कियों को आरोपी पहले से जानता था, उन मामलों में हिंसा को छिपाने का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई।
स्कूल और विस्थापन शिविरों में भी खतरा
महिलाओं के अनुसार, यौन हिंसा की घटनाएं केवल किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहीं। विस्थापन की परिस्थितियों में टेंट, स्कूलों में बनाए गए अस्थायी आश्रय, गलियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
एक महिला ने रिपोर्ट में बताया कि किसी स्कूल में रेप की घटना सामने आने के बाद अगले दिन उसी जगह शादी और जश्न आयोजित किए जाने की घटना देखी गई। यह अनुभव युद्ध के दौरान सामाजिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं में आए बदलाव को दर्शाता है।
दिव्यांग लड़कियां भी ज्यादा जोखिम में
रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को विशेष रूप से संवेदनशील समूह के रूप में बताया गया है। उनकी शारीरिक या मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
एक मामले में एक दिव्यांग लड़की कई घंटे तक लापता रही। वापस लौटने के बाद वह रो रही थी, लेकिन परिवार ने शुरुआत में इसे डर का परिणाम समझा। बाद में उसके गर्भवती होने पर यौन हिंसा का पता चला। आरोपी की पहचान नहीं हो सकी।
दूसरे मामले में ऐसी महिला के साथ यौन हिंसा की जानकारी दी गई, जिसे दूसरों की बातें समझने में परेशानी होती थी। रिपोर्ट में इस तरह के मामलों को कमजोर और निर्भर महिलाओं के सामने मौजूद अतिरिक्त सुरक्षा जोखिमों के उदाहरण के रूप में दर्ज किया गया है।
माता-पिता खो चुकी लड़कियों पर भी बाल विवाह का दबाव
युद्ध में परिवार के सदस्यों की मौत और विस्थापन के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी रिश्तेदारों पर आ गई है। UNFPA ने अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में भी कहा था कि देखभाल करने वालों का नुकसान और परिवारों का अलग होना किशोरियों को अधिक असुरक्षित बना रहा है।
रिपोर्ट में 14 और 15 वर्ष की दो लड़कियों का मामला भी सामने आया, जिन्होंने युद्ध में अपने माता-पिता खो दिए थे। इसके बाद रिश्तेदारों ने उनकी शादी कर दी। महिलाओं के अनुसार, परिवार के सदस्य लड़कियों की जिम्मेदारी और खर्च उठाने की स्थिति में नहीं थे।
परिवार के भीतर भी बढ़ी हिंसा
गाजा में महिलाओं के सामने खतरा केवल विस्थापन शिविरों या सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है। UNFPA के अनुसार, परिवारों के भीतर भी मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और यौन हिंसा के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
अप्रैल-जून 2026 के विश्लेषण में मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा को रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा के प्रमुख रूपों में शामिल किया गया। UNFPA ने बताया कि भीड़भाड़, आजीविका का नुकसान और सुरक्षित आवास की कमी ने ऐसे जोखिमों को बढ़ाया है। महिलाओं ने बताया कि बेरोजगारी, गरीबी, घरों का नष्ट होना, बार-बार विस्थापन और लंबे समय तक जारी तनाव के कारण परिवारों में तनाव बढ़ा है। कुछ मामलों में इसका असर महिलाओं और बच्चों पर हिंसा के रूप में पड़ा।

निजता की कमी ने बढ़ाई मुश्किल
विस्थापन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों का छोटे टेंट या अस्थायी आश्रयों में रहना महिलाओं की सुरक्षा और निजता के लिए बड़ी चुनौती है। UNFPA के अनुसार, गाजा में सैकड़ों विस्थापन स्थलों पर महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच आसान नहीं है।
भीड़भाड़ वाले शिविरों में परिवारों को निजी जगह नहीं मिलती। इससे महिलाओं के सामने घरेलू और यौन हिंसा का खतरा बढ़ सकता है। रिपोर्ट में ऐसे मामलों का उल्लेख है जिनमें महिलाओं ने अपने ही पति द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा की जानकारी दी।
भोजन और मानवीय सहायता पर नियंत्रण
गाजा में भोजन और जरूरी सामान की कमी ने महिलाओं की स्थिति को और जटिल बनाया है। UNFPA के ताजा विश्लेषण में संसाधनों, अवसरों और सहायता से वंचित करना रिपोर्ट की गई लैंगिक हिंसा के सबसे आम रूपों में शामिल रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महिलाओं ने बताया कि पति मानवीय सहायता के रूप में मिलने वाले भोजन, नकदी या अन्य सामान पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के पास सहायता तक स्वतंत्र पहुंच नहीं रह जाती।
UNFPA ने बताया कि अप्रैल-जून 2026 के दौरान रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा के मामलों में संसाधनों और सहायता से वंचित किए जाने की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई थी।
2026 में लैंगिक हिंसा के मामलों में लगातार वृद्धि
UNFPA के 23 सितंबर 2026 के बयान के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में गाजा में रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा के मामलों में 60% वृद्धि दर्ज की गई। संस्था ने स्पष्ट किया कि इस वृद्धि के पीछे हिंसा के बढ़ते जोखिम के साथ-साथ सुरक्षा सेवाओं के विस्तार से अधिक पीड़ितों का सामने आना भी एक कारण हो सकता है।
अप्रैल-जून 2026 में रिपोर्ट किए गए मामलों में जनवरी-मार्च की तुलना में लैंगिक हिंसा के मामलों में 27% और वृद्धि हुई। शारीरिक हमले लगभग 31% मामलों में शामिल थे, जबकि मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा भी लगभग 31% मामलों में दर्ज हुई। संसाधनों, भोजन, नकदी और सहायता से वंचित करने के मामले करीब एक-तिहाई रहे।
यौन हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी
UNFPA के अप्रैल-जून विश्लेषण में यौन हिंसा के रिपोर्ट किए गए मामलों में जनवरी-मार्च की तुलना में 61% वृद्धि दर्ज की गई। संस्था ने साथ ही यह रेखांकित किया कि उपलब्ध आंकड़े केवल रिपोर्ट किए गए मामलों को दर्शाते हैं और वास्तविक घटनाओं की संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़िताएं सामाजिक दबाव, सुरक्षा जोखिम या सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण सामने नहीं आतीं।
UNFPA ने महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक सहायता को मजबूत करने की जरूरत बताई है। संस्था के अनुसार, गाजा के लगभग 500 विस्थापन स्थलों में महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच अभी भी सीमित है।
UNFPA ने सुरक्षा सेवाएं बढ़ाने पर दिया जोर
UNFPA के मुताबिक, महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान ऐसे केंद्र बन गए हैं जहां हिंसा की शिकार महिलाएं सुरक्षित तरीके से अपनी बात रख सकती हैं और स्वास्थ्य, मनोसामाजिक, कानूनी तथा आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
संस्था ने मानवीय सहायता के हर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा को शामिल करने, सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।











