Global Cities Index 2026: दुनिया के उभरते टॉप-100 शहरों में 55 भारतीय, दिल्ली-मुंबई की आर्थिक ताकत बढ़ेगी

Global Cities Index 2026: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में टॉप-100 उभरते शहरों में 55 भारतीय शहर शामिल हैं। दिल्ली और मुंबई की आर्थिक क्षमता में आने वाले

भारतीय शहर तेजी से दुनिया के प्रमुख शहरी विकास केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है।

Global Cities Index 2026: भारत के कई शहर आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के उभरते शीर्ष 100 शहरों में 55 भारतीय शहर शामिल हैं। इनमें से 23 शहरों ने टॉप-50 में जगह बनाई है। खास बात यह है कि सूची में केवल दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर ही नहीं, बल्कि कई छोटे और मध्यम शहर भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है। उस समय शहर की आर्थिक क्षमता 2 खरब डॉलर से अधिक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, आर्थिक संभावनाओं के बावजूद भारतीय शहरों को जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और आय असमानता जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

55 भारतीय शहरों की मौजूदगी

ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में शहरों का मूल्यांकन अर्थव्यवस्था, मानव पूंजी, जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण और गवर्नेंस जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 55 शहर उभरते शीर्ष 100 शहरों में शामिल हैं, जबकि 23 भारतीय शहर टॉप-50 में हैं। विकासशील महानगरों की श्रेणी में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहर शामिल हैं। वहीं आगरा, अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, पुणे, सूरत, वडोदरा और नागपुर जैसे शहरों को उभरते केंद्रों के रूप में देखा गया है।

हालांकि, पांचों मानकों को मिलाकर तैयार की गई समग्र वैश्विक रैंकिंग में 1,000 शहरों में कोई भी भारतीय शहर शीर्ष 250 में जगह नहीं बना सका। यह अंतर बताता है कि आर्थिक विकास के साथ भारतीय शहरों को शहरी जीवन और बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार की जरूरत होगी।

उत्तर प्रदेश के 15 शहर सूची में

उत्तर प्रदेश सबसे अधिक शहरों वाला राज्य रहा। राज्य के 15 शहर ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में शामिल किए गए हैं। इनमें लखनऊ सबसे ऊपर रहा और उसे 725वीं रैंक मिली। इसके बाद मुरादाबाद 745वें, प्रयागराज 764वें, बरेली 784वें और अलीगढ़ 804वें स्थान पर रहे। गोरखपुर को 821वीं, मेरठ को 827वीं, वाराणसी को 832वीं, आगरा को 861वीं और सहारनपुर को 872वीं रैंक मिली। फैजाबाद, कानपुर, हरदोई, शाहजहांपुर और सुल्तानपुर भी सूची में शामिल हैं।

वाराणसी की पर्यावरण रैंकिंग कमजोर रही। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस शहर का पर्यावरण स्कोर भारतीय शहरों में सबसे निचले स्तर पर रहा। दूसरी ओर, लखनऊ ने मानव पूंजी के क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

चंडीगढ़ और पंजाब के शहर

चंडीगढ़ को वैश्विक सूची में 558वां स्थान मिला। शहर का अर्थव्यवस्था में प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण से जुड़े मानकों में उसकी रैंक अपेक्षाकृत नीचे रही। पंजाब से लुधियाना, जालंधर और अमृतसर को सूची में जगह मिली। इनमें लुधियाना 611वें स्थान के साथ राज्य में सबसे ऊपर रहा। इसकी औद्योगिक गतिविधियां आर्थिक प्रदर्शन को मजबूती देती हैं, हालांकि पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

बेंगलुरु में AI और डीप टेक की संभावनाएं

रिपोर्ट में बेंगलुरु की तकनीकी अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। पिछले 25 वर्षों में शहर की आबादी में तेज वृद्धि हुई है और वर्ष 2000 के बाद इसकी जीडीपी में औसतन करीब 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। प्रस्तावित नई एआई सिटी से बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम को और विस्तार मिलने की संभावना जताई गई है। इससे शहर पारंपरिक बीपीओ गतिविधियों से आगे बढ़कर रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डीप टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाओं के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

दिल्ली और मुंबई की भूमिका बढ़ने का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की वैश्विक रैंकिंग में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में 268वें स्थान पर मौजूद दिल्ली के 2050 तक 49 पायदान ऊपर जाने का अनुमान है। दिल्ली और मुंबई दोनों के 2050 तक दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले महानगरीय क्षेत्रों में शामिल होने की संभावना बताई गई है। दिल्ली की अनुमानित आर्थिक क्षमता 2 खरब डॉलर से अधिक होने के कारण उसका वैश्विक आर्थिक महत्व भी बढ़ सकता है।

देहरादून को 632वां स्थान

उत्तराखंड से देहरादून को वैश्विक सूची में 632वां स्थान मिला। मानव पूंजी के मामले में शहर का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरण से जुड़े मानकों में उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की जैसे अन्य प्रमुख शहरों का सूची में शामिल न होना यह संकेत देता है कि राज्य की बड़ी आर्थिक गतिविधियां अभी भी सीमित शहरी केंद्रों में केंद्रित हैं। वहीं गुरुग्राम और फरीदाबाद को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा मानकर अलग तरीके से वर्गीकृत किया गया है।

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