ग्लोबल मार्केट: साउथ कोरिया बना दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार, भारत सातवें स्थान पर खिसका

ग्लोबल शेयर बाजार रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साउथ कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है, जबकि भारत सातवें

भारत के शेयर बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां पहले ताइवान और अब दक्षिण कोरिया ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया है। एआई और चिप (semiconductor) कंपनियों में तेज उछाल के चलते दक्षिण कोरिया अब दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है।

बिजनेस न्यूज़: वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई तेज़ी के कारण हुआ है। वहीं, भारत अब सातवें स्थान पर खिसक गया है।

यह बदलाव वैश्विक निवेश प्रवाह और टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जहां AI और चिप निर्माण उद्योग नए आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

कैसे भारत से आगे निकला दक्षिण कोरिया?

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले भारत का बाजार मूल्य घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया। इस अंतर के कारण दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक सूची में छठा स्थान हासिल कर लिया है। यह बदलाव निवेशकों के बदलते रुझान और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार को दर्शाता है।

दक्षिण कोरिया की इस ऐतिहासिक छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर उद्योग में तेजी है। वैश्विक स्तर पर AI सर्वर, डेटा सेंटर और हाई-एंड चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ कोरियाई कंपनियों को मिला है। Samsung Electronics और SK Hynix जैसी दिग्गज कंपनियों ने बाजार में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की है। 

दोनों कंपनियां AI मेमोरी चिप्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में वैश्विक स्तर पर प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। इन कंपनियों का बाजार मूल्य तेजी से बढ़कर लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर क्लब के करीब पहुंच गया है, जिससे पूरे बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

भारत क्यों पीछे रह गया?

दक्षिण कोरिया का प्रमुख स्टॉक इंडेक्स KOSPI इस वर्ष 100% से अधिक बढ़ चुका है। विशेष रूप से मई 2026 में इसमें लगभग 28% की मासिक वृद्धि दर्ज की गई। AI आधारित कंपनियों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी ने पूरे बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। तकनीकी शेयरों में आई इस तेज़ी को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी रैली में से एक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक कहानी कमजोर नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक पूंजी प्रवाह में बदलाव के कारण बाजार दबाव में आया है। पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकासी देखी गई है। इसके साथ ही रुपये की डॉलर के मुकाबले कमजोरी ने भी विदेशी निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित किया है।

इसके अलावा, भारत में अभी ऐसी बड़ी कंपनियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है जो सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-एंड चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी हों। यही कारण है कि वैश्विक AI बूम का पूरा फायदा भारतीय बाजार को नहीं मिल पाया।

ताइवान और कोरिया की बढ़ती ताकत

इस रैंकिंग बदलाव में केवल दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि ताइवान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। एशियाई टेक्नोलॉजी कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। AI और चिप निर्माण क्षेत्र में एशिया अब दुनिया का सबसे बड़ा हब बनता जा रहा है, जहां अमेरिका और यूरोप के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।

दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था को उसके निर्यात सेक्टर से भी बड़ा समर्थन मिला है। मई 2026 में देश का कुल निर्यात 53% से अधिक बढ़ा, जबकि सेमीकंडक्टर निर्यात में लगभग 169% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से AI आधारित डिवाइस, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण हुई है।

क्या भारत की ग्रोथ स्टोरी कमजोर हुई है?

विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि भारत की आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत है। भले ही शेयर बाजार की रैंकिंग में भारत पीछे चला गया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था का आकार दक्षिण कोरिया से कहीं अधिक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, भारत की जीडीपी लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है।

इसका अर्थ है कि भारत की वास्तविक आर्थिक ताकत अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक पूंजी बाजार में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भूमिका निर्णायक होती जा रही है।

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