बाड़मेर में तेज तूफान और बारिश से कच्चे मकान ढह गए। दो मासूमों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। बिजली पोल और पेड़ गिरने से जनजीवन प्रभावित रहा।
बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले में सोमवार देर रात आए तेज तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचा दी। तेज हवाओं, बारिश और कमजोर संरचनाओं के कारण कई कच्चे मकान, टीनशेड और बिजली के खंभे गिर गए। इस प्राकृतिक आपदा में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। प्रशासन और राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, तूफान का सबसे अधिक असर बाड़मेर जिले के ग्रामीण इलाकों में देखा गया, जहां तेज हवाओं ने कई घरों और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया।
दीवार गिरने से दो बच्चों की दर्दनाक मौत
बोला ग्राम पंचायत के सबरी नगर गांव में अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों में दो बच्चों की जान चली गई। पुलिस के अनुसार, तेज आंधी के दौरान एक टीनशेड वाले कमरे की दीवार अचानक ढह गई, जिसके नीचे दबकर आठ वर्षीय खगेन्द्र की मौत हो गई।
परिजन और ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे तथा मलबा हटाकर बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसी गांव में एक अन्य कच्चे मकान की दीवार गिरने से तीन वर्षीय खुमानाराम भी मलबे में दब गया। स्थानीय लोगों ने उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी भी जान नहीं बच सकी। दोनों घटनाओं ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
पिता-पुत्र मलबे में दबे, महिला गंभीर रूप से घायल
रामसर उपखंड के कंटल का पार पाबूसरिया गांव में भी तूफान ने गंभीर नुकसान पहुंचाया। यहां तेज आंधी के दौरान टीनशेड वाला कमरा ढह गया, जिसके नीचे 40 वर्षीय शैतान सिंह और उनका चार वर्षीय बेटा रोहित दब गए।
ग्रामीणों और परिजनों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दोनों को मलबे से बाहर निकाला। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बाड़मेर रेफर कर दिया गया।
इसी गांव में एक अन्य हादसे में अनिता कंवर नामक महिला अपने घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भाग रही थीं, तभी लोहे की एंगल उनके सिर पर गिर गई। गंभीर रूप से घायल महिला को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दो युवक भी हुए घायल
गुडीसर क्षेत्र में तेज तूफान के कारण कई टीनशेड उड़ गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, दो युवक अपने रिश्तेदारों के घर आए हुए थे, तभी तेज हवा के कारण टीनशेड उनके ऊपर गिर गया। दोनों को चोटें आईं और अस्पताल में उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई
तूफान का असर केवल आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। बाड़मेर, रामसर, चौहटन, गडरारोड और सीमा से सटे कई इलाकों में सैकड़ों बिजली पोल गिर गए।
तेज हवाओं के कारण विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे कई गांवों और कस्बों में पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और पोलों को दुरुस्त करने में जुटी हैं, लेकिन व्यापक नुकसान के कारण बहाली में समय लग सकता है।

सड़कों पर गिरे पेड़ और मलबा, यातायात प्रभावित
आंधी और बारिश के कारण कई प्रमुख और ग्रामीण सड़कों पर पेड़ गिर गए। कई स्थानों पर बिजली के खंभे और तार सड़क पर गिरने से यातायात बाधित हुआ।
गडरारोड से खलीफे की बावड़ी मार्ग सहित कई सड़कों पर आवागमन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। प्रशासन ने मशीनों की मदद से रास्तों को साफ करने का अभियान शुरू किया है।
मौसम विभाग ने दर्ज की 25.4 मिमी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, बाड़मेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 25.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। दिनभर उमस और हल्की हवाओं के बाद रात करीब 10 बजे मौसम ने अचानक करवट ली और तेज तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में इस प्रकार के तीव्र मौसमीय बदलाव हाल के वर्षों में अधिक देखने को मिल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और अस्थिर मौसम पैटर्न को इसके संभावित कारणों में शामिल किया जा रहा है।
प्रशासन ने शुरू किया राहत और सर्वे अभियान
घटनाओं की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गईं। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान कच्चे मकानों, कमजोर संरचनाओं और खुले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। साथ ही अगले कुछ दिनों तक मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह भी दी गई है।
शोक में डूबा बाड़मेर
दो मासूम बच्चों की मौत और कई लोगों के घायल होने से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।
बाड़मेर में आया यह तूफान एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हादसों को कम करने के लिए मजबूत आवासीय ढांचे, बेहतर मौसम चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत करना आवश्यक होगा।













