गोरखपुर जंक्शन पर श्रवण बाधित यात्रियों के लिए AI आधारित सांकेतिक भाषा सूचना प्रणाली लगाई जाएगी। एलईडी स्क्रीन पर ट्रेन आगमन-प्रस्थान, प्लेटफार्म बदलाव और जरूरी घोषणाएं रियल टाइम में सांकेतिक भाषा में दिखाई जाएंगी।
Gorakhpur: Uttar Pradesh में रेलवे श्रवण बाधित यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए नई तकनीक लागू करने जा रहा है। गोरखपुर जंक्शन पर AI आधारित सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह सिस्टम मौजूदा ऑडियो घोषणाओं को सांकेतिक भाषा में बदलकर एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित करेगा। इससे यात्रियों को ट्रेन की जानकारी समझने के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
गोरखपुर जंक्शन पर AI से बदलेगी यात्री सुविधा
गोरखपुर जंक्शन पर अब श्रवण बाधित यात्रियों के लिए ट्रेन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करना आसान होगा। पूर्वोत्तर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बेहतर accessibility को ध्यान में रखते हुए AI आधारित सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस सिस्टम के जरिए ट्रेन के आगमन और प्रस्थान, प्लेटफार्म में बदलाव तथा अन्य जरूरी घोषणाओं की जानकारी स्क्रीन पर सांकेतिक भाषा में उपलब्ध कराई जाएगी।

रेलवे की मौजूदा व्यवस्था में ट्रेन से संबंधित अधिकांश महत्वपूर्ण सूचनाएं ऑडियो अनाउंसमेंट के माध्यम से यात्रियों तक पहुंचती हैं। श्रवण बाधित यात्रियों के लिए ऐसी घोषणाओं को समझना मुश्किल होता है। नई तकनीक इस समस्या को दूर करने में मदद करेगी। सिस्टम रेलवे की घोषणा व्यवस्था से जुड़कर ऑडियो संदेशों को स्वतः सांकेतिक भाषा में बदलने का काम करेगा।
गोरखपुर में सिस्टम लगाने के लिए टेंडर जारी
पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल प्रशासन ने इस तकनीक को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बादशाहनगर स्टेशन पर सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली को पहले ही शुरू किया जा चुका है। इसी अनुभव के आधार पर अब गोरखपुर जंक्शन पर भी सिस्टम लगाने की तैयारी है।
गोरखपुर में इस सुविधा के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। योजना के तहत स्टेशन पर ऐसी स्क्रीन लगाई जाएगी, जहां यात्रियों को ट्रेन संचालन से जुड़ी जरूरी सूचनाएं दिखाई देंगी। खासतौर पर श्रवण बाधित यात्री इन स्क्रीन के माध्यम से प्लेटफार्म और ट्रेन से संबंधित अपडेट आसानी से समझ सकेंगे।
रेलवे के अनुसार यह प्रणाली मौजूदा घोषणा व्यवस्था के साथ काम करेगी। जब किसी ट्रेन के आगमन, प्रस्थान या प्लेटफार्म में बदलाव की घोषणा होगी, तो सिस्टम संबंधित जानकारी को सांकेतिक भाषा के रूप में स्क्रीन पर प्रदर्शित करेगा। इससे सूचना मिलने और उसे समझने के बीच किसी अतिरिक्त माध्यम की जरूरत कम होगी।
दो महीने तक किया गया तकनीक का परीक्षण
सांकेतिक भाषा प्रणाली को लागू करने से पहले इसकी कार्यक्षमता का परीक्षण भी किया गया। लखनऊ मंडल में करीब दो महीने तक सिस्टम का ट्रायल चला। इस दौरान सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के साथ नोएडा की एक मूक-बधिर संस्था के प्रतिनिधियों और चार प्रमाणित सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स ने तकनीक की जांच की।
परीक्षण के दौरान यह देखा गया कि रेलवे की ऑडियो घोषणाओं को सांकेतिक भाषा में किस तरह बदला जा रहा है और स्क्रीन पर सूचना कितनी स्पष्ट तरीके से प्रदर्शित हो रही है। परीक्षण के सफल रहने के बाद बादशाहनगर स्टेशन पर इसे लागू किया गया।
प्लेटफार्म दो पर बहुभाषी कियोस्क भी लगेगा
गोरखपुर जंक्शन पर श्रवण बाधित यात्रियों के लिए सांकेतिक भाषा सिस्टम के अलावा एक बहुभाषी नागरिक सहायता कियोस्क स्क्रीन लगाने की भी योजना है। यह कियोस्क प्लेटफार्म नंबर दो पर लगाया जाएगा।
बहुभाषी कियोस्क यात्रियों को अलग-अलग भाषाओं में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इससे दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए भी स्टेशन पर जरूरी जानकारी हासिल करना आसान होगा।
रेलवे की यह पहल केवल AI तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे यात्रियों को भी समान रूप से सूचना उपलब्ध कराना है, जिन्हें पारंपरिक ऑडियो अनाउंसमेंट से जानकारी हासिल करने में परेशानी होती है। गोरखपुर जंक्शन पर इस सुविधा के शुरू होने के बाद श्रवण बाधित यात्रियों को ट्रेन की जानकारी के लिए दूसरों की मदद पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और वे अपनी यात्रा से जुड़े अपडेट अधिक आसानी से हासिल कर सकेंगे।











