रामनगर वन प्रभाग में बाघ से ज्यादा सर्पदंश का खतरा, पांच साल में चार मौतें

रामनगर वन प्रभाग में पांच साल में सर्पदंश के 36 मामले सामने आए, जिनमें चार लोगों की मौत हुई। बरसात में सांपों से सावधानी और तुरंत इलाज की सलाह।

रामनगर वन प्रभाग में पांच वर्षों के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की 73 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें सर्पदंश के 36 मामले सामने आए, जबकि चार लोगों की मौत हुई। बरसात में सांपों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Ramnagar: Uttarakhand में पिछले पांच वर्षों के आंकड़े सर्पदंश के बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार इस अवधि में 36 सांप काटने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें चार लोगों की मौत हुई। वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष की कुल 73 घटनाओं में 52 लोग घायल हुए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी है।

रामनगर में सर्पदंश का बढ़ा खतरा

रामनगर वन प्रभाग में गर्मी और उमस के साथ बरसात के मौसम में सांपों का खतरा बढ़ गया है। वन विभाग के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी कुल 73 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 52 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। खास बात यह है कि इसी अवधि में सर्पदंश के 36 मामले सामने आए और चार लोगों की जान चली गई।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघों के हमलों की तुलना में सांप के काटने की घटनाएं अधिक सामने आई हैं। सर्पदंश के मामलों में 32 पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा भी दिया गया है। रामनगर वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी अंकित बडोला ने लोगों से बरसात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

अस्पताल में सर्पदंश के चार मरीज भर्ती

हल्द्वानी के एसटीएच में फिलहाल सर्पदंश के चार मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें खटीमा का 16 वर्षीय बालक भी शामिल है, जिसे 8 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चोरगलिया निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति को 13 अगस्त को कोबरा के काटने के बाद अस्पताल लाया गया।

इसके अलावा बाजपुर निवासी 30 वर्षीय मरीज को 16 अगस्त को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। एक 60 वर्षीय महिला भी 16 अगस्त से अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इन सभी मरीजों के पैर में सांप ने काटा था। चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

झाड़-फूंक से इलाज में देरी बनी गंभीर समस्या

सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से मरीजों की हालत गंभीर होने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में खैरना निवासी 35 वर्षीय व्यक्ति को सांप के काटने के तीन दिन बाद अस्पताल लाया गया। इस दौरान परिवार की ओर से झाड़-फूंक कराई जाती रही। अस्पताल पहुंचने तक मरीज के गुर्दे को गंभीर नुकसान हो चुका था।

इसी तरह करीब पांच दिन पहले हल्दूचौड़ की एक महिला को रात के समय सड़क पर सांप ने काट लिया। महिला को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक कराई गई। इलाज में देरी होने के कारण उनके गुर्दे पर भी गंभीर असर पड़ा।

सर्पदंश के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार सांप के काटने के बाद समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। पीड़ित को घबराने से बचाना चाहिए और उसे कम से कम हिलाने-डुलाने की कोशिश करनी चाहिए। काटे गए हिस्से को कसकर बांधना या किसी तरह का घरेलू उपचार करना नुकसानदायक हो सकता है।

सर्पदंश की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां आवश्यक आपातकालीन सुविधाएं और वेंटिलेटर उपलब्ध हों। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जरूरत पड़ने पर एंटी स्नेक वेनम यानी एंटीवेनम दिया जाता है।

बरसात के मौसम में घर से बाहर निकलते समय जूते और कपड़ों की जांच करना, अंधेरे स्थानों पर सावधानी बरतना और झाड़ियों के आसपास सतर्क रहना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता ली जाए।

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