असम CM हिमंत सरमा का चिदंबरम पर हमला, बोले- ‘दिमागी नहीं, शुद्ध नक्सल

CM हिमंत बिस्वा ने पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर पलटवार किया। उन्होंने चिदंबरम के गृह मंत्री कार्यकाल में नक्सलवाद से निपटने की नीति की जांच की मांग की।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरमा ने चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद से निपटने की रणनीति की जांच की मांग करते हुए उन पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए।

गुवाहाटी: यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद शुरू हुआ। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश में सशस्त्र नक्सलवाद की स्थिति का उल्लेख करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि जहां ग्रामीण इलाकों में सशस्त्र नक्सलवाद को काफी हद तक कमजोर किया गया है, वहीं उसकी वैचारिक विचारधारा से जुड़े लोग संस्थानों और नीति निर्माण के क्षेत्रों में मौजूद हो सकते हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने वाले वर्ग से जोड़ते हुए इस शब्द का इस्तेमाल व्यंग्यात्मक और राजनीतिक अंदाज में किया। चिदंबरम की इसी टिप्पणी ने BJP और कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

हिमंत सरमा ने क्या कहा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चिदंबरम पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चिदंबरम को केवल ‘दिमागी नक्सल’ कहना पर्याप्त नहीं है और उन पर ‘शुद्ध नक्सल’ होने का आरोप लगाया।

सरमा ने दावा किया कि चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री रहने के दौरान देश में नक्सलवाद से जुड़ी गतिविधियों को लेकर उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए जानबूझकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, ये सरमा के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें किसी स्थापित जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चिदंबरम की टिप्पणी और सरमा की प्रतिक्रिया फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी के दायरे में हैं।

नक्सलवाद पर सरकार का दावा

नक्सलवाद लंबे समय से भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों में रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने के कारण देश के कई हिस्सों में वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव काफी कम हुआ है।

सरकार विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर देती रही है।

वहीं, नक्सलवाद के राजनीतिक और वैचारिक पहलुओं को लेकर अलग-अलग दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। BJP जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और हिंसा से जोड़कर देखती है, वहीं विपक्ष कई मौकों पर सरकार की नीतियों और सुरक्षा अभियानों पर सवाल उठाता रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व पर भी सरमा का निशाना

हिमंत बिस्वा सरमा ने इस दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व की गतिविधियां देश में अस्थिरता पैदा करने की दिशा में हैं।

सरमा ने कांग्रेस मुख्यालय से सामने आए कुछ दृश्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान कांग्रेस के कुछ नेता आपस में बातचीत करते दिखाई दिए। मुख्यमंत्री ने इसे राष्ट्रीय गीत के प्रति कथित अनादर से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।

यह आरोप भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा है। कांग्रेस ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी की गतिविधियों को वंदे मातरम् के अपमान से जोड़ना गलत है।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया राजनीतिक

कांग्रेस नेताओं ने BJP की ओर से लगाए गए आरोपों को राजनीतिक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत का अनादर करना नहीं था। पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम के दौरान की गई गतिविधियों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

कांग्रेस और BJP के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब स्वतंत्रता दिवस के बाद देश में राष्ट्रवाद, नक्सलवाद और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर बहस तेज है। प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने विपक्षी दलों को प्रतिक्रिया देने का अवसर दिया, जबकि BJP नेताओं ने इसे वैचारिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।

बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक टकराव

पी. चिदंबरम लंबे समय तक केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं और केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भी रहा है। दूसरी ओर, हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद असम की राजनीति में BJP के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। सरमा की मांग है कि चिदंबरम के गृह मंत्री रहने के दौरान नक्सलवाद से निपटने की सरकारी नीति और कार्रवाई की जांच की जाए। दूसरी ओर, कांग्रेस BJP के आरोपों को राजनीतिक हमला बता रही है।

आगे क्या?

फिलहाल विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। चिदंबरम के बयान पर BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएं और कांग्रेस की ओर से उनका बचाव आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और तूल दे सकता है। नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियान के साथ-साथ वैचारिक समर्थन को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी रहने की संभावना है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि नक्सलवाद से लड़ाई को केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित रखा जाए या उसके वैचारिक और सामाजिक पहलुओं पर भी समान रूप से चर्चा की जाए। फिलहाल BJP और कांग्रेस इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक नजरिये को मजबूती से सामने रख रहे हैं।

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