गर्मियों में आइसक्रीम को लोग ‘कूलिंग फूड’ मानकर खूब खाते हैं। तेज गर्मी में ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खाने से तुरंत राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह राहत सिर्फ कुछ मिनटों की होती है। असल में आइसक्रीम शरीर को ठंडा करने के बजाय कई बार उल्टा असर डाल सकती है।
‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है, जो शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का खतरा बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में जब शरीर पहले से ही हीट स्ट्रेस झेल रहा होता है, तब ज्यादा आइसक्रीम खाना शरीर के संतुलन को और बिगाड़ सकता है।

आइसक्रीम खाने के बाद शरीर में क्या होता है?
- आइसक्रीम खाने पर सबसे पहले मुंह और गले में ठंडक महसूस होती है और दिमाग को “कूलिंग सिग्नल” मिलता है। इससे कुछ समय के लिए ताजगी और खुशी का एहसास होता है। लेकिन इसके साथ ही शरीर में कई प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं।
- आइसक्रीम में मौजूद ज्यादा शुगर के कारण ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और इंसुलिन का स्तर अचानक बढ़ जाता है। साथ ही, फैट को पचाने के लिए पाचन तंत्र अधिक सक्रिय हो जाता है।
- शरीर का तापमान संतुलित रखने के लिए बॉडी “थर्मोजेनेसिस” प्रक्रिया शुरू करती है, जिसमें शरीर अंदर से गर्मी पैदा करता है। यही कारण है कि कुछ देर बाद शरीर फिर से गर्म महसूस करने लगता है।
- करीब 20-30 मिनट बाद एनर्जी लेवल गिरने लगता है, प्यास बढ़ जाती है और शरीर में भारीपन या सुस्ती महसूस हो सकती है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि आइसक्रीम से मिलने वाली ठंडक सिर्फ अस्थायी होती है।
- आइसक्रीम में स्वाद और टेक्सचर बढ़ाने के लिए कई तरह के इंग्रीडिएंट्स मिलाए जाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इनमें हाई शुगर, सैचुरेटेड फैट, आर्टिफिशियल फ्लेवर, कलर, स्टेबलाइज़र और इमल्सीफायर शामिल हैं।
इन तत्वों के कारण कई तरह के हेल्थ रिस्क बढ़ सकते हैं
- मोटापा और वजन बढ़ना – ज्यादा शुगर और फैट शरीर में फैट जमा करते हैं।
- टाइप-2 डायबिटीज का खतरा – बार-बार ब्लड शुगर बढ़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है।
- दिल की बीमारियां – सैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाता है।
- पाचन संबंधी समस्याएं – गैस, ब्लोटिंग और अपच की समस्या हो सकती है।
- गट हेल्थ खराब होना – ज्यादा शुगर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को प्रभावित करती है।
- इम्यून सिस्टम कमजोर होना – ठंडी चीजें म्यूकस मेम्ब्रेन को प्रभावित कर सकती हैं।
- दांतों की समस्या – मीठा और ठंडा मिलकर दांतों में सेंसिटिविटी और कैविटी बढ़ाते हैं।
खासतौर पर जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस है, उन्हें आइसक्रीम खाने के बाद पेट दर्द, गैस और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कब और कैसे आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है?
- आइसक्रीम का असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इसे कब और कैसे खा रहे हैं।
- खाली पेट आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और पेट में एसिडिटी, गैस या ऐंठन हो सकती है।
- रात में आइसक्रीम खाना भी सही नहीं माना जाता। रात में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, जिससे शुगर और फैट आसानी से पच नहीं पाते। इससे अपच, एसिडिटी और नींद की समस्या हो सकती है।
- ज्यादा मात्रा में बार-बार खाना शरीर के थर्मल बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है।
- शुगर-फ्री या लो-फैट आइसक्रीम भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो गट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

क्या घर की आइसक्रीम बेहतर विकल्प है
घर पर बनी आइसक्रीम बाजार की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकती है, क्योंकि इसमें आप शुगर और फैट की मात्रा नियंत्रित कर सकते हैं। इसमें ताजे फल, ड्राई फ्रूट्स और नेचुरल स्वीटनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, यह भी याद रखना जरूरी है कि घर की बनी आइसक्रीम भी ठंडी और मीठी ही होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।











