गुमला में 7 माह में सर्पदंश की 181 घटनाएं, जुलाई में सबसे ज्यादा मामले; ग्रामीण इलाकों में बढ़ा खतरा

गुमला में सात माह में सर्पदंश की 181 घटनाएं सामने आईं। जुलाई में सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए। ग्रामीणों से अंधविश्वास छोड़कर तुरंत अस्पताल जाने की अपील की गई।
गुमला में 7 माह में सर्पदंश की 181 घटनाएं, जुलाई में सबसे ज्यादा मामले; ग्रामीण इलाकों में बढ़ा खतरा
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झारखंड के गुमला जिले में सर्पदंश की घटनाओं ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। इस साल के शुरुआती सात महीनों में जिले में सर्पदंश के 181 मामले सामने आए हैं। इनमें जुलाई महीने में सबसे अधिक लोगों के सांप के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं। बारिश के मौसम में खेतों, कच्चे घरों, झाड़ियों और जलजमाव वाले इलाकों में सांपों की गतिविधियां बढ़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक, ओझा-गुनी या किसी घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें और पीड़ित को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं।

गुमला जिले का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में लोग खेती-किसानी और मजदूरी से जुड़े हैं। बारिश के दौरान खेतों में काम करने, घास काटने, लकड़ी या अन्य सामग्री इकट्ठा करने तथा घर से बाहर निकलने के दौरान सांपों के संपर्क में आने की आशंका बढ़ जाती है। रात के समय भी ग्रामीण इलाकों में सांप घरों के अंदर या आसपास पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि बरसात के महीनों में सर्पदंश के मामले अचानक बढ़ते दिखाई देते हैं।

सात महीने में सामने आए 181 मामलों का आंकड़ा यह बताता है कि जिले में सर्पदंश कोई सामान्य या मामूली समस्या नहीं है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर सांप का जहर शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। खासतौर पर जहरीले सांप के काटने के मामलों में उपचार में देरी मरीज की स्थिति को तेजी से गंभीर बना सकती है। ऐसे में शुरुआती समय में अस्पताल पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

जुलाई में सर्पदंश के सबसे अधिक मामले सामने आना भी बारिश और ग्रामीण गतिविधियों से जुड़ा हुआ माना जा सकता है। बारिश के दौरान सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं और सुरक्षित स्थान की तलाश में खेतों, घरों, पशुशालाओं और आसपास के दूसरे स्थानों तक पहुंच सकते हैं। खेतों में पानी भरने या मिट्टी गीली होने के कारण सांपों के सामान्य ठिकाने प्रभावित होते हैं। इस दौरान लोगों और सांपों के बीच संपर्क बढ़ने की संभावना रहती है।

गुमला जैसे ग्रामीण जिले में सर्पदंश के मामले सामने आने के बाद सबसे बड़ी चुनौती मरीज को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना होती है। कई बार गांव से अस्पताल की दूरी अधिक होती है और परिवहन की सुविधा समय पर नहीं मिल पाती। इसके अलावा कुछ परिवार सामाजिक मान्यताओं और अंधविश्वास के कारण पहले अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने चले जाते हैं। इससे इलाज में महत्वपूर्ण समय निकल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को समझाते हैं कि सर्पदंश के बाद सबसे पहले पीड़ित को शांत रखना चाहिए और उसे जल्द से जल्द चिकित्सा केंद्र पहुंचाना चाहिए। मरीज को दौड़ाकर या पैदल चलाकर ले जाने के बजाय संभव हो तो वाहन से ले जाना बेहतर होता है, क्योंकि अधिक शारीरिक गतिविधि से शरीर में जहर के फैलने की गति प्रभावित हो सकती है। काटे गए स्थान पर चीरा लगाना, जहर चूसने की कोशिश करना, कसकर रस्सी बांधना या किसी तरह का रसायन अथवा घरेलू पदार्थ लगाने जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास भी सर्पदंश के उपचार में बड़ी बाधा बन सकता है। कई जगह आज भी सांप काटने के बाद लोग अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा या झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति के पास पहुंचते हैं। कुछ मामलों में परिवार के लोग यह पता लगाने में समय गंवा देते हैं कि सांप जहरीला था या नहीं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सलाह दी जाती है कि सांप की पहचान करने या उसके प्रकार का इंतजार करने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाएं। चिकित्सक लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर उपचार शुरू कर सकते हैं।

सर्पदंश के मामलों में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधा और एंटी-स्नेक वेनम जैसी दवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हालांकि हर सांप के काटने से जहर फैलना जरूरी नहीं है, लेकिन किसी भी सर्पदंश को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जहरीले सांप के काटने पर शुरुआती लक्षण कई बार धीरे-धीरे भी सामने आ सकते हैं। इसलिए मरीज को घर पर छोड़कर केवल निगरानी करने के बजाय चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है।

गुमला के ग्रामीण इलाकों में लोगों को खास तौर पर रात के समय सावधानी बरतने की जरूरत है। घर के आसपास झाड़ियों और अनावश्यक कचरे को जमा नहीं होने देना, जमीन पर सोने से बचना, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना और जूते या कपड़े पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांच लेना जैसी सावधानियां जोखिम को कम कर सकती हैं। लकड़ी, घास या अन्य सामान उठाते समय भी हाथ डालने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

बारिश के दिनों में घरों के दरवाजे और खिड़कियों के आसपास भी विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि घर के आसपास पानी जमा है या दीवारों और फर्श में ऐसे स्थान हैं जहां से सांप अंदर आ सकता है, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से बंद करने का प्रयास किया जाना चाहिए। पशुओं के चारे और लकड़ी के ढेर जैसी चीजों को भी घर से कुछ दूरी पर व्यवस्थित रखना उपयोगी हो सकता है।

खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों के लिए सावधानी और भी जरूरी है। बारिश के मौसम में घास या झाड़ियों के बीच काम करते समय हाथ-पैर पूरी तरह ढके होने चाहिए। खेत या झाड़ी वाले इलाके में बिना देखे हाथ-पैर डालने से बचना चाहिए। बच्चों को भी ऐसे स्थानों पर अकेले खेलने या जाने से रोकना जरूरी है, क्योंकि छोटे बच्चों में सर्पदंश के बाद स्थिति गंभीर होने का जोखिम अधिक हो सकता है।

सर्पदंश की घटना के बाद सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश करना भी खतरनाक हो सकता है। कई बार परिवार के लोग सांप की पहचान के लिए उसे पकड़ने लगते हैं, जिससे दूसरा व्यक्ति भी काटे जाने के खतरे में आ जाता है। यदि सांप सुरक्षित दूरी से दिखाई दे और उसकी तस्वीर बिना जोखिम के ली जा सके तो चिकित्सकों को जानकारी देने में मदद मिल सकती है, लेकिन सांप को पकड़ने के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।

गुमला में सात महीने के दौरान 181 सर्पदंश के मामले सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है। खासकर जुलाई में मामलों की संख्या बढ़ने से बारिश के दौरान अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत स्पष्ट होती है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सर्पदंश के बाद सही कदमों की जानकारी देना जरूरी है। पंचायत स्तर पर भी ग्रामीणों को यह बताया जा सकता है कि नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र कहां है और आपात स्थिति में मरीज को कैसे पहुंचाया जाए।

सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज मिलने पर कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इसलिए लोगों को सांप के काटने को लेकर घबराने के बजाय तत्काल सही कदम उठाना चाहिए। पीड़ित को शांत रखते हुए जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना सबसे जरूरी है। रास्ते में किसी तरह की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने से बचना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को यही संदेश दिया जा रहा है कि सर्पदंश को लेकर अंधविश्वास से दूर रहें और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति पर भरोसा करें। बारिश के मौसम में सांपों की गतिविधि बढ़ने के कारण सावधानी जरूरी है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। जागरूकता, सावधानी और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सर्पदंश से होने वाले गंभीर परिणामों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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