ग्वालियर में तेज बारिश के दौरान झांसी रोड बस स्टैंड के सामने निर्माणाधीन व्हाइट टॉपिंग सड़क धंस गई। घटना में वाहन गड्ढे में फंस गए और कुछ लोग घायल हुए। स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग की है।
ग्वालियर:ग्वालियर में लगातार हो रही बारिश के बीच एक और सड़क धंसने की घटना सामने आई है। झांसी रोड बस स्टैंड के सामने निर्माणाधीन व्हाइट टॉपिंग सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक बैठ गया, जिससे वाहन गड्ढे में फंस गए और यातायात प्रभावित हुआ। घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
निर्माणाधीन सड़क धंसने से मचा हड़कंप
ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र में बुधवार दोपहर निर्माणाधीन व्हाइट टॉपिंग सड़क अचानक धंस गई। यह घटना झांसी रोड बस स्टैंड के सामने हुई, जहां सड़क का एक बड़ा हिस्सा बैठ जाने से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे के बीच हुई। सड़क धंसते ही वहां से गुजर रही एक कार और एक टमटम गहरे गड्ढे में फंस गए। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद करते हुए ट्रैक्टर की सहायता से दोनों वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सड़क का लगभग तीन फीट गहरा, करीब दस मीटर लंबा और पांच मीटर चौड़ा हिस्सा धंस गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी की जान नहीं गई, हालांकि कुछ महिलाओं के गिरने से उन्हें मामूली चोटें आईं। हादसे के बाद कुछ समय तक इस मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा।
स्थानीय लोगों ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित सड़क पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कार्य किया गया था। जानकारी के अनुसार, यह व्हाइट टॉपिंग सड़क विक्की फैक्ट्री से नाका चंद्रवानी तक करीब दो किलोमीटर लंबाई में बनाई जा रही थी, जिसकी लागत लगभग 18 करोड़ रुपये बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि यदि नई सड़क पहली ही बारिश में धंस जाए, तो इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
निवासियों का कहना है कि यदि हादसे के समय भारी वाहन या स्कूल बस वहां से गुजर रही होती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था। उनका मानना है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों को ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
प्रशासन की देरी पर भी उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क धंसने के करीब एक घंटे बाद तक नगर निगम, प्रशासन या ट्रैफिक पुलिस की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। इस दौरान धंसी हुई सड़क के आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहा।
लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने के कारण कुछ राहगीर सड़क पर गिरकर घायल भी हुए। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं के बाद तुरंत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
तकनीकी जांच और जवाबदेही की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क धंसने के कारणों की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हाल के महीनों में कई स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
नागरिकों का मानना है कि सड़क निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण, नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही, यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल प्रशासन की ओर से सड़क धंसने के कारणों की जांच और मरम्मत कार्य शुरू किए जाने की तैयारी की जा रही है।











