बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच नवजात बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले 30 दिन बच्चे के लिए सबसे नाजुक होते हैं। साफ हवा, सीमित बाहरी संपर्क, स्तनपान और घर के वातावरण की शुद्धता नवजात को प्रदूषण से होने वाले खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
नवजात शिशु देखभाल: देश के प्रदूषित इलाकों में जन्म लेने वाले बच्चों पर हवा में मौजूद धूल, धुआं और जहरीले कणों का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे सांस और संक्रमण की समस्याएं बढ़ रही हैं। दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, जन्म के बाद पहले 30 दिन नवजात की सेहत के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। इसी कारण घर की हवा को स्वच्छ रखना, भीड़ से दूर रखना और इम्यूनिटी मजबूत करना बेहद जरूरी है।
हाई पॉल्यूशन में नवजात को कैसे रखें सुरक्षित
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एल.एच. घोटेकर के मुताबिक, प्रदूषित इलाकों में जन्मे नवजात शिशुओं की सुरक्षा की शुरुआत घर की हवा को साफ रखने से होती है। बच्चे का कमरा रोज साफ किया जाए और यदि संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल जरूर किया जाए, ताकि हवा में मौजूद धूल और स्मॉग के कण कम हो सकें।
डॉ. घोटेकर बताते हैं कि नवजात को पहले 30 दिनों तक किसी भी तरह की भीड़, ट्रैफिक और खुले प्रदूषित वातावरण में नहीं ले जाना चाहिए। बच्चे के कमरे में अगरबत्ती, धूम्रपान, परफ्यूम या किसी भी तरह का धुआं पूरी तरह बंद होना चाहिए, क्योंकि ये सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
पहले महीने में किन गलतियों से बचना जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार, कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बच्चे के लिए खतरा बढ़ा देती हैं। बार-बार बाहर ले जाना, कमरे में धूल जमा रहने देना या अधिक लोगों को बच्चे के संपर्क में लाना संक्रमण का बड़ा कारण बन सकता है।
इसके अलावा जरूरत से ज्यादा नहलाना, ओवरड्रेसिंग या कमरे को बहुत ठंडा रखना भी सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चे को केवल साफ हाथों से छुएं और विज़िटर्स को सीमित रखें, ताकि किसी भी तरह का वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन न फैले।

इम्यूनिटी मजबूत करने के जरूरी उपाय
नवजात की सुरक्षा के लिए मां का दूध सबसे बड़ा कवच माना जाता है। नियमित स्तनपान से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वह संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। इसके साथ ही कमरे में हल्की नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है।
बच्चे के आसपास धूल न जमे, इसके लिए बिस्तर और कपड़े नियमित बदले जाएं। पौधे, केमिकल स्प्रे और तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट भी कमरे में रखने से बचना चाहिए, ताकि नवजात की सांस की नली सुरक्षित रहे।













