उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में कई श्रद्धालु सावन माह के दौरान भगवान शिव की भक्ति में पूरे महीने नंगे पैर रहते हैं। श्रद्धालु इसे मन्नत, आस्था और आत्म-अनुशासन का प्रतीक मानते हैं।
हरदोई: हरदोई के पिहानी कस्बे में सावन के दौरान भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अनूठी आस्था देखने को मिल रही है। यहां कई लोग पूरे सावन माह जूते-चप्पल का त्याग कर नंगे पैर रहते हैं और रक्षाबंधन के बाद ही दोबारा उन्हें धारण करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह संकल्प उनकी मन्नत, विश्वास और शिवभक्ति का प्रतीक है।
सावन शुरू होते ही त्याग देते हैं जूते-चप्पल
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में भगवान शिव के प्रति अनोखी आस्था की परंपरा देखने को मिल रही है। यहां कई श्रद्धालु सावन माह की शुरुआत के साथ ही जूते-चप्पल पहनना छोड़ देते हैं और पूरे महीने नंगे पैर रहकर भगवान शिव की आराधना करते हैं। चाहे बाजार जाना हो, नौकरी पर जाना हो या किसी निजी काम से बाहर निकलना हो, श्रद्धालु अपने संकल्प का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। रक्षाबंधन के बाद ही वे दोबारा जूते-चप्पल धारण करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्म-अनुशासन और भगवान शिव के प्रति समर्पण का भी प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सावन के दौरान इस संकल्प का पालन करने से मन को शांति मिलती है और भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।
मन्नत पूरी होने के बाद लिया जीवनभर निभाने का संकल्प
कस्बे की रहने वाली सुनीता देवी बताती हैं कि लगभग सात वर्ष पहले उनके बेटे की तबीयत लगातार खराब रहती थी। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि यदि उनका बेटा स्वस्थ हो जाएगा तो वे हर वर्ष पूरे सावन माह नंगे पैर रहकर शिवभक्ति करेंगी। उनके अनुसार, मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने अपना संकल्प निभाना शुरू किया और तब से हर साल पूरे सावन में बिना चप्पल के रहती हैं।
सुनीता देवी की आस्था से प्रेरित होकर अन्य लोगों ने भी यह परंपरा अपनाई। करीब पांच वर्ष पहले जितेंद्र यज्ञसैनी ने भी इसी संकल्प के साथ सावन में नंगे पैर रहने की शुरुआत की। उनका कहना है कि शुरुआत में यह व्यक्तिगत संकल्प था, लेकिन धीरे-धीरे कई अन्य श्रद्धालु भी इससे जुड़ते गए। अब पिहानी में करीब एक दर्जन लोग नियमित रूप से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।
कामकाज के बीच भी नहीं टूटता संकल्प
इस परंपरा से जुड़े श्रद्धालु अपने दैनिक जीवन और कामकाज के दौरान भी नंगे पैर ही रहते हैं। कपड़े की दुकान पर काम करने वाले सूरज चौधरी बताते हैं कि उन्हें दिनभर बाजार में आना-जाना पड़ता है, लेकिन पूरे सावन माह वे बिना चप्पल के ही अपना काम करते हैं। वहीं चाट का ठेला लगाने वाले अभिनय कश्यप का कहना है कि सड़क पर लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्होंने कभी अपना संकल्प नहीं छोड़ा।
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस परंपरा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण, संयम और आत्मविश्वास को मजबूत करना भी है। इस संकल्प का पालन करने वालों में ज्ञान देवी, कशिश गुप्ता, दीपांशी चौधरी, धर्मेंद्र हलवाई, कृष्ण रस्तोगी, शिवम चौधरी, सूरज चौधरी, जतिन, विकास, प्राशु और अभिनय कश्यप सहित कई लोग शामिल हैं।
सावन में आस्था और अनुशासन का संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इसी कारण अनेक श्रद्धालु इस दौरान व्रत, जलाभिषेक, कांवड़ यात्रा और विशेष पूजा-पाठ के साथ विभिन्न व्यक्तिगत संकल्प भी लेते हैं। पिहानी की यह परंपरा भी इसी आस्था का एक उदाहरण है, जिसमें श्रद्धालु पूरे महीने नंगे पैर रहकर अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही यह परंपरा नई पीढ़ी को भी श्रद्धा, अनुशासन और संकल्प की सीख देती है। सावन समाप्त होने और रक्षाबंधन का पर्व आने के बाद श्रद्धालु विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने संकल्प का समापन करते हैं और फिर सामान्य रूप से जूते-चप्पल पहनना शुरू करते हैं। यही कारण है कि पिहानी की यह अनूठी परंपरा हर सावन लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती है।










