हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगेंद्रनगर में दो भाइयों ने जनहित में ऐसा काम किया है, जिसकी स्थानीय स्तर पर खूब सराहना हो रही है। बरसात और भारी बारिश के कारण करीब दो महीने से बंद पड़े चघेड़-बनगोटा से मोल्थरी चौक गलू मार्ग को ग्राम पंचायत बघैर रकतल के उपप्रधान विजय कुमार और उनके बड़े भाई संजीव कुमार ने अपने निजी खर्च पर जेसीबी लगवाकर दोबारा यातायात के लिए खोल दिया। सड़क पर जगह-जगह जमा भारी मलबे के कारण रास्ता पूरी तरह बंद था। लंबे समय से सड़क बंद रहने के कारण आसपास की पांच पंचायतों के हजारों लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। दोनों भाइयों की पहल के बाद अब लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के अनुसार जोगेंद्रनगर उपमंडल की ग्राम पंचायत बघैर रकतल के अंतर्गत आने वाला यह मार्ग बरसात के दौरान भारी मलबा आने के कारण बंद हो गया था। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बाद जगह-जगह भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने की घटनाएं होती रहती हैं। इसी वजह से चघेड़-बनगोटा से मोल्थरी चौक गलू जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ और करीब दो महीने तक इस मार्ग पर सामान्य आवाजाही नहीं हो सकी। रास्ता बंद होने से स्थानीय लोगों के सामने आने-जाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी।
सड़क बंद होने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा, जिन्हें हर दिन इसी रास्ते से स्कूल, कार्यालय और दूसरे जरूरी कामों के लिए जाना पड़ता था। विद्यार्थियों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा था, वहीं सरकारी और निजी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी आने-जाने में अतिरिक्त समय और परेशानी उठानी पड़ रही थी। स्थानीय ग्रामीणों के लिए बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो रही थी। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क किसी इलाके की जीवनरेखा की तरह होता है, इसलिए लंबे समय तक मार्ग बंद रहने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती गईं।
जब सड़क लंबे समय तक नहीं खुल सकी तो बघैर रकतल पंचायत के उपप्रधान विजय कुमार और उनके बड़े भाई संजीव कुमार ने खुद आगे आने का फैसला किया। दोनों भाइयों ने रविवार को अपने निजी खर्च पर जेसीबी मशीन मंगवाई और सड़क पर जमा मलबा हटवाने का काम शुरू कराया। जेसीबी की मदद से रास्ते पर जमा मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबे को हटाया गया, जिसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो सकी।
इस पहल की खास बात यह रही कि दोनों भाइयों ने सड़क खुलवाने के लिए अपनी तरफ से खर्च किया। स्थानीय स्तर पर अक्सर सड़क बंद होने के बाद सरकारी मशीनरी के सक्रिय होने और काम शुरू होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जब किसी जनप्रतिनिधि या स्थानीय व्यक्ति की ओर से तत्काल पहल होती है तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। विजय कुमार और संजीव कुमार ने भी लोगों की परेशानी को देखते हुए इसी तरह तत्काल कदम उठाया।
सड़क खुलने के बाद आसपास की पांच पंचायतों के हजारों लोगों को राहत मिली है। स्थानीय लोगों के लिए यह रास्ता केवल एक सामान्य संपर्क मार्ग नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही का महत्वपूर्ण साधन है। सड़क बहाल होने से अब स्कूल जाने वाले बच्चे, कर्मचारी, किसान, दुकानदार और अन्य स्थानीय निवासी पहले की तरह इस मार्ग का इस्तेमाल कर सकेंगे।
स्थानीय लोगों ने दोनों भाइयों की इस पहल की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क बंद होने के कारण उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही थी। बरसात के कारण सड़क पर मलबा आने के बाद आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी और लोगों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे थे। ऐसे में निजी खर्च पर जेसीबी लगवाकर रास्ता खुलवाना लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विजय कुमार और संजीव कुमार की पहल दूसरे जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों के लिए उदाहरण बन सकती है। स्थानीय स्तर पर कई बार छोटी-छोटी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, लेकिन यदि जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मिलकर तत्काल समाधान की कोशिश करें तो लोगों को राहत दी जा सकती है। जोगेंद्रनगर की यह घटना इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आई है।
पहाड़ी इलाकों में बरसात के मौसम में सड़कें बंद होना कोई नई बात नहीं है। लगातार बारिश से पहाड़ों से पत्थर और मिट्टी गिरने लगती है। कई जगह सड़क का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसे में लोगों की आवाजाही के साथ-साथ जरूरी सामान की सप्लाई और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। मंडी और जोगेंद्रनगर क्षेत्र में भी बारिश के दौरान सड़क पर मलबा आने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल में भी जोगेंद्रनगर क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत और बारिश से हुए नुकसान को दूर करने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से काम और टेंडर जारी किए गए हैं।
इस मामले में राहत की बात यह है कि करीब दो महीने से बंद मार्ग को अब स्थानीय पहल के जरिए फिर से खोल दिया गया है। सड़क बहाल होने से लोगों को अपने दैनिक कामों के लिए लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करने की जरूरत नहीं रहेगी। खासकर विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें रोजाना निर्धारित समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है।
विजय कुमार ने बताया कि भारी बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। इसी वजह से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था। लोगों की समस्या को देखते हुए दोनों भाइयों ने खुद पहल की और जेसीबी मशीन लगवाकर मलबा हटवाया। इस काम के बाद सड़क पर यातायात बहाल हो गया।
इस पहल से यह भी संदेश गया है कि किसी क्षेत्र की समस्या के समाधान में स्थानीय भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रशासन और संबंधित विभागों की अपनी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन कई बार किसी आपदा या प्राकृतिक कारण से रास्ता बंद होने पर तत्काल राहत की जरूरत होती है। ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से रास्ता खोलने की पहल लोगों के लिए तत्काल राहत का कारण बन सकती है।
हालांकि सड़क को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए केवल मलबा हटाना पर्याप्त नहीं होगा। बरसात के दौरान पहाड़ी सड़कों पर दोबारा मलबा आने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सड़क किनारे जल निकासी की व्यवस्था, संवेदनशील हिस्सों की निगरानी और जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं। यदि किसी स्थान पर बार-बार मलबा आता है तो वहां स्थायी समाधान की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।
जोगेंद्रनगर के इस मामले में फिलहाल स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनका संपर्क मार्ग फिर से चालू हो गया है। करीब दो महीने से बंद सड़क के खुलने के बाद ग्रामीणों की आवाजाही आसान हुई है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और रोजाना कार्यालय आने-जाने वाले कर्मचारियों को विशेष राहत मिली है। पांच पंचायतों के हजारों लोगों के लिए यह रास्ता दोबारा खुलना रोजमर्रा की जिंदगी को सामान्य बनाने वाला कदम है।
विजय कुमार और संजीव कुमार की पहल को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने समस्या को केवल उठाने या शिकायत करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने स्तर पर समाधान की कोशिश की। दोनों ने निजी खर्च से जेसीबी लगवाई और मलबा हटवाकर सड़क को यातायात के लिए बहाल कराया। स्थानीय लोगों ने उनके इस प्रयास के लिए आभार जताया और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया है।
बरसात के मौसम में हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर इस तरह की चुनौतियां बनी रहती हैं। भूस्खलन और मलबे के कारण सड़कें अचानक बंद हो जाती हैं और कई बार लोगों को कई दिनों तक संपर्क मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जोगेंद्रनगर के इन दो भाइयों ने जिस तरह पहल करते हुए रास्ता खुलवाया, वह स्थानीय स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी और जनसेवा का उदाहरण बन गया है।
फिलहाल चघेड़-बनगोटा से मोल्थरी चौक गलू मार्ग पर आवाजाही बहाल हो गई है और पांच पंचायतों के हजारों लोगों को राहत मिली है। अब स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि सड़क की स्थिति को आगे भी ठीक रखा जाएगा, ताकि दोबारा मलबा आने की स्थिति में यातायात लंबे समय तक प्रभावित न हो। दोनों भाइयों की पहल ने न केवल तत्काल समस्या का समाधान किया, बल्कि यह भी दिखाया कि स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति और सहयोग से लोगों की बड़ी परेशानी को कम किया जा सकता है।











