हिमाचल प्रदेश में इस मानसून भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम सोमवार को कांगड़ा पहुंची। छह सदस्यीय टीम ने गगल एयरपोर्ट पहुंचने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान, राहत कार्यों तथा पुनर्वास की स्थिति की जानकारी ली। टीम अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान कांगड़ा और आसपास के प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने के साथ नुकसान का मौके पर आकलन कर रही है। इसके बाद टीम प्रदेश के दूसरे प्रभावित जिलों का भी दौरा करेगी।
केंद्रीय टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु कर रहे हैं। टीम में जलशक्ति मंत्रालय के निदेशक प्रकाश चंद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. सुभाष चंद्र, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक रामवतार मीणा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कार्यकारी अभियंता शाश्वत महापात्रा, वित्त मंत्रालय के उप निदेशक कनव दुआ और इसरो के वैज्ञानिक डॉ. शशिवर्धन रेड्डी शामिल हैं। अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को टीम में शामिल करने का उद्देश्य बारिश और आपदा से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों में हुए नुकसान का विभागवार आकलन करना है।
गगल एयरपोर्ट पहुंचने पर उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों ने केंद्रीय टीम का स्वागत किया। इसके बाद जिला प्रशासन के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें मानसून के दौरान जिले में हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी केंद्रीय अधिकारियों के सामने रखी गई। अधिकारियों ने सड़क, पुल, पेयजल योजनाओं, कृषि, ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जरूरी सेवाओं पर पड़े असर के बारे में जानकारी दी। साथ ही आपदा के बाद प्रशासन की ओर से चलाए गए राहत, पुनर्स्थापना और पुनर्वास कार्यों की प्रगति से भी टीम को अवगत कराया गया।
केंद्रीय टीम का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हिमाचल प्रदेश सरकार ने मानसून के दौरान हुए नुकसान के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग की है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बारिश से जुड़ी आपदाओं के कारण नुकसान का आकलन 3200 करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। एक अन्य सरकारी आंकलन में नुकसान करीब 3412.80 करोड़ रुपये बताया गया है। राज्य सरकार ने केंद्र को नुकसान से जुड़ी रिपोर्ट और सहायता की मांग भेजी है।
मानसून के दौरान हिमाचल के कई हिस्सों में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, कई स्थानों पर मलबा सड़कों पर आया और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए। कुछ क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। कृषि भूमि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर भी बारिश और बाढ़ का असर पड़ा। केंद्रीय टीम इन सभी क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों की जांच करने के साथ मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी।
प्रदेश के राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 366 लोगों की मौत हुई है, जबकि 614 लोग घायल हुए हैं और चार लोग लापता बताए गए हैं। आपदा में 579 मवेशियों की भी मौत हुई है। बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं के कारण 43 पक्के और 101 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 161 पक्के और 365 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसून का असर सिर्फ बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
नुकसान के मामले में सड़क और पुलों का क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सरकारी आकलन के अनुसार करीब 6215 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुई हैं और सड़क तथा पुलों को लगभग 2531.84 करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है। जलशक्ति क्षेत्र में भी करीब 385 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और 4784 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। केंद्रीय टीम के साथ सड़क परिवहन, जलशक्ति, ग्रामीण विकास और वित्त मंत्रालय के अधिकारी होने के कारण इन क्षेत्रों के नुकसान का अलग-अलग स्तर पर मूल्यांकन किया जाएगा।
कांगड़ा पहुंचने के बाद केंद्रीय दल चंबा जिले के भटियात क्षेत्र की ओर भी रवाना हुआ। वहां आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया जाना है। अधिकारियों के अनुसार टीम प्रभावित इलाकों में सड़कों, पेयजल व्यवस्था, कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े नुकसान को मौके पर देखेगी। विभागों की ओर से तैयार किए गए नुकसान के आंकड़ों को भी जमीनी स्थिति से मिलाया जाएगा, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सके।
केंद्रीय टीम के दौरे का कार्यक्रम कई प्रभावित जिलों तक रखा गया है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 28 सितंबर को चंबा-कांगड़ा के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। 29 सितंबर को कांगड़ा और कुल्लू तथा 30 सितंबर को कुल्लू क्षेत्र का दौरा प्रस्तावित है। इसके बाद एक अक्टूबर को टीम शिमला और सोलन के प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेगी। कांगड़ा के बोह क्षेत्र, चंबा के भटियात-चुवाड़ी, कुल्लू के सैंज और बंजार तथा शिमला, कसौली और परवाणू जैसे इलाकों को निरीक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
कांगड़ा में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में केंद्रीय टीम ने सिर्फ नुकसान के आंकड़े ही नहीं, बल्कि आपदा के बाद किए गए राहत और पुनर्वास कार्यों की स्थिति भी जानी। प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने, क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा खड़ा करने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने के लिए किए गए कार्यों की जानकारी अधिकारियों ने दी। ऐसे निरीक्षण के दौरान प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, प्रशासन की ओर से किए गए कार्य और आगे की जरूरतों को एक साथ देखा जाता है।
इस मानसून में कांगड़ा भी उन जिलों में शामिल रहा है, जहां बारिश और आपदा से जुड़ी घटनाओं का असर देखने को मिला। सरकारी आंकड़ों में कांगड़ा में बारिश से संबंधित घटनाओं में 19 मौतें दर्ज की गई हैं। चंबा में 22 मौतें हुई हैं। शिमला में 23 मौतों के साथ यह आंकड़ा सबसे अधिक बताया गया है, जबकि मंडी और लाहौल-स्पीति में 18-18 लोगों की जान गई है।
केंद्रीय टीम के सदस्य अलग-अलग विभागों से जुड़े होने के कारण आपदा के प्रभाव का व्यापक आकलन करेंगे। सड़क और पुलों की स्थिति को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी देखेंगे, पेयजल और जलस्रोतों से जुड़े नुकसान की जानकारी जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारी लेंगे, ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े नुकसान का मूल्यांकन ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी करेंगे। कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान की भी समीक्षा की जाएगी। इसरो के वैज्ञानिक की मौजूदगी से प्रभावित क्षेत्रों के आकलन में रिमोट सेंसिंग और उपग्रह आधारित जानकारी का उपयोग भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
जिला प्रशासन ने केंद्रीय टीम के दौरे को देखते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज और नुकसान से जुड़े आंकड़े तैयार रखने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों को बैठक और निरीक्षण के दौरान टीम के साथ मौजूद रहने को कहा गया था, ताकि किसी भी क्षेत्र से जुड़े सवाल का जवाब मौके पर दिया जा सके। इससे केंद्रीय टीम को विभागवार नुकसान और राहत कार्यों की स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
हिमाचल सरकार की ओर से केंद्र से राहत और मुआवजे के लिए सहायता मांगी गई है। ऐसे में केंद्रीय टीम का स्थलीय निरीक्षण आगे की सहायता प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम के सदस्य प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद नुकसान से संबंधित जानकारी तैयार करेंगे। इसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर राज्य की ओर से मांगी गई सहायता पर आगे की प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि, केंद्रीय टीम के दौरे के दौरान किसी अंतिम वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं की गई है।
प्रदेश में इस मानसून के दौरान सार्वजनिक और निजी बुनियादी ढांचे को 2023 और 2025 के अत्यधिक नुकसान वाले मानसून सीजन की तुलना में कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, लेकिन जानमाल की क्षति और घरों के टूटने के कारण कई परिवार प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा सड़क, पुल और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं को हुए नुकसान ने प्रशासन के सामने बहाली की चुनौती खड़ी की है। केंद्रीय टीम का निरीक्षण इन्हीं जरूरतों को जमीनी स्तर पर समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
अब केंद्रीय टीम के सदस्य अगले चरण में कांगड़ा और अन्य जिलों के प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। वहां अधिकारियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाएगा। टीम की रिपोर्ट और राज्य सरकार की ओर से भेजे गए ज्ञापन के आधार पर आगे राहत एवं पुनर्वास सहायता को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल प्रभावित जिलों में लोगों की नजर केंद्रीय टीम के निरीक्षण और केंद्र से मिलने वाली संभावित सहायता पर बनी हुई है।











