हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित विकास के लिए नई निर्माण नीति की तैयारी शुरू की है। इसके तहत जाखू हिल्स में निर्माण पर रोक रहेगी और पंचायतों में नो-कंस्ट्रक्शन जोन चिन्हित किए जाएंगे।
शिमला: हिमाचल निर्माण नीति को अधिक वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण पर रोक, पंचायतों में नो-कंस्ट्रक्शन जोन और जाखू हिल्स में पूर्ण प्रतिबंध लागू करने की तैयारी की जा रही है।
हिमाचल में संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर सख्ती
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए नई निर्माण नीति लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार अब राज्य के विभिन्न पंचायत क्षेत्रों में नो-कंस्ट्रक्शन जोन चिन्हित करेगी, जबकि शिमला के ऐतिहासिक जाखू हिल्स क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ-साथ आपदा के जोखिम को कम करना है।

तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि प्रदेश सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह रोकना उद्देश्य नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक योजना के तहत सुरक्षित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
भूस्खलन वाले क्षेत्रों में निर्माण नहीं होगा
सरकार भूस्खलन और भूमि धंसने की आशंका वाले इलाकों का विस्तृत सर्वे कराकर उनका मानचित्र तैयार करेगी। जिन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया जाएगा, वहां नए निर्माण कार्यों की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्राकृतिक नालों, जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के आसपास भी निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
इसके अलावा प्रदेश के प्रत्येक शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए उपयुक्त भूमि पर अर्बन फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहरों में हरियाली बढ़ेगी और जलवायु संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सड़क किनारे निर्माण के नियम भी होंगे सख्त
सरकार ने मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास हो रहे अनियोजित निर्माण पर भी चिंता जताई है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सड़कों से निर्धारित दूरी के भीतर निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। संपर्क मार्गों के किनारे निर्माण संबंधी नियमों में भी संशोधन किया जा रहा है।
जाखू हिल्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निजी भूमि मालिकों को अपनी जमीन सरकार को बेचने का विकल्प भी दिया जाएगा, ताकि इन इलाकों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सके।
सुरक्षित और योजनाबद्ध विकास पर रहेगा जोर
प्रदेश सरकार का कहना है कि नई नीति का मुख्य उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना है। वैज्ञानिक तरीके से निर्माण की अनुमति देने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कदम भविष्य में सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और योजनाबद्ध विकास साथ-साथ चल सकते हैं। इसी सोच के तहत आने वाले समय में निर्माण संबंधी नियमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन सुरक्षित रह सके।











