हिमाचल के 10 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी:नदी-नालों से दूर रहने की एडवाइजरी, 23 अगस्त से कमजोर पड़ेगा मानसून

10 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट जारी है। लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। 23 अगस्त से मानसून कमजोर होगा।
हिमाचल के 10 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी:नदी-नालों से दूर रहने की एडवाइजरी, 23 अगस्त से कमजोर पड़ेगा मानसून
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हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर अभी भी बना हुआ है और आज राज्य के 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट और छह जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील भी की गई है। उपलब्ध मौसम अपडेट के मुताबिक 22 अगस्त तक बारिश जारी रहने के आसार हैं, जबकि 23 अगस्त से मानसून के कमजोर पड़ने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार आज बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ऊना, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू, सोलन और शिमला में यलो अलर्ट है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति को लेकर इस समय इस चेतावनी में शामिल नहीं किया गया है।

बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में नदी और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। मौसम विभाग और प्रशासन की ओर से लोगों को विशेष रूप से बरसाती नालों, गधेरों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान ऐसे स्थानों पर जाना जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि पहाड़ों में पानी का बहाव बहुत तेजी से बदलता है।

हिमाचल में इस मानसून सीजन के दौरान पहले ही बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं से काफी नुकसान हो चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार राज्य में कई सड़कें बंद हैं और बिजली तथा पेयजल आपूर्ति से जुड़ी योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। 18 अगस्त के अपडेट में 105 सड़कें बंद होने और कई बिजली ट्रांसफॉर्मर तथा पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

मंडी और कुल्लू जैसे जिलों में बारिश के कारण सड़क संपर्क पर विशेष असर पड़ रहा है। भूस्खलन के कारण प्रमुख सड़कों पर यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में मौसम खराब रहने के दौरान पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा की योजना बनाएं। अगर किसी मार्ग पर भूस्खलन या जलभराव की सूचना हो तो उस रास्ते पर जाने से बचना बेहतर होगा। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है।

बारिश का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में इस समय बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद रहते हैं। नदी किनारे घूमने, झरनों के पास जाने या ऐसे स्थानों पर जाने से खतरा बढ़ सकता है जहां बारिश के बाद अचानक पानी का बहाव तेज हो जाता है। पर्यटकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

भारी बारिश के दौरान सबसे बड़ा खतरा अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन का रहता है। पहाड़ों की ढलानों पर लगातार बारिश होने से मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर हो सकती है। इसके कारण सड़क पर मलबा गिरने, रास्ते बंद होने और कई इलाकों का संपर्क टूटने की स्थिति बन सकती है।

नदी-नालों से दूरी बनाए रखने की सलाह केवल बारिश के दौरान ही नहीं बल्कि बारिश रुकने के बाद भी महत्वपूर्ण है। ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी कुछ समय बाद नीचे के इलाकों में पहुंच सकता है, जिससे नदी या नाले का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इसलिए पानी कम दिखाई देने पर भी जोखिम वाले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है।

राज्य में मानसून के कारण अब तक हुई बारिश का आंकड़ा भी सामान्य से कम बताया गया है। 1 जून से 17 अगस्त के बीच हिमाचल में सामान्य तौर पर 519.5 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस अवधि में करीब 469.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यानी मानसून सीजन में राज्य में सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

इसके बावजूद कुछ दिनों में तेज बारिश के दौर ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। यही वजह है कि कम कुल बारिश के बावजूद संवेदनशील इलाकों में अचानक तेज बारिश से नुकसान का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।

आज ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में प्रशासन को भी अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ सड़कें बंद होने, जलभराव और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका रहती है। आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

यलो अलर्ट वाले जिलों में भी लोगों को मौसम को हल्के में नहीं लेने की जरूरत है। यलो अलर्ट का अर्थ यह नहीं है कि हर जगह अत्यधिक बारिश होगी, बल्कि कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खासकर नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 23 अगस्त से मानसून की गतिविधि कमजोर पड़ने के आसार हैं। इससे राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है।

बारिश कमजोर पड़ने के बाद सड़क और बिजली जैसी प्रभावित सेवाओं को सामान्य करने में भी प्रशासन को मदद मिल सकती है। जिन मार्गों पर मलबा आने के कारण यातायात बाधित है, वहां मौसम साफ होने पर मशीनों के जरिए मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा सकता है।

फिलहाल लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है और कुछ ही समय में सामान्य दिखने वाला नाला या नदी खतरनाक रूप ले सकता है। इसलिए नदी-नालों के किनारे पिकनिक या पर्यटन से बचना और सुरक्षित स्थानों पर रहना बेहतर है।

आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। सड़क पर अचानक मलबा आने या पानी भरने की स्थिति में वाहन को आगे बढ़ाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकना जरूरी है। रात के समय पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से भी यथासंभव बचना चाहिए।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में आज 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट, जबकि ऊना, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू, सोलन और शिमला में यलो अलर्ट है। बारिश के बीच नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। 22 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने के बाद 23 अगस्त से मानसून कमजोर पड़ने के आसार हैं।

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