हिमाचल के 2 विधायकों में फेसबुक जंग: सुधीर बोले- कांग्रेस का दिल्ली में सुंदरकांड, सुंदर ठाकुर का पलटवार

हिमाचल में सुधीर शर्मा ने कांग्रेस के दिल्ली दौरे पर सुंदरकांड का तंज कसा। सुंदर ठाकुर ने पलटवार कर धर्मशाला के पंडित पर निशाना साधा।
हिमाचल के 2 विधायकों में फेसबुक जंग: सुधीर बोले- कांग्रेस का दिल्ली में सुंदरकांड, सुंदर ठाकुर का पलटवार
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हिमाचल प्रदेश की सियासत में इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए नेताओं के बीच बयानबाजी का नया दौर देखने को मिल रहा है। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और कुल्लू से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के बीच फेसबुक पोस्ट को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए ऐसे तंज किए, जिनके बाद प्रदेश की सियासत में इस विवाद की चर्चा शुरू हो गई है। ताजा मामला कांग्रेस से जुड़े दिल्ली दौरे और वहां हुए सुंदरकांड के संदर्भ में सुधीर शर्मा की टिप्पणी से शुरू हुआ, जिस पर सुंदर सिंह ठाकुर ने भी पलटवार किया।

मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के अनुसार, सुधीर शर्मा ने कांग्रेस के दिल्ली दौरे को लेकर अपने फेसबुक पोस्ट में 'सुंदरकांड' का इस्तेमाल राजनीतिक तंज के तौर पर किया। उन्होंने कांग्रेस की गतिविधियों पर कटाक्ष करते हुए दिल्ली में 'सुंदरकांड' होने की बात कही। इसके जवाब में कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कहा कि कांड दिल्ली में नहीं, बल्कि धर्मशाला के पंडित कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच यह शब्दों की लड़ाई अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि दोनों नेता हिमाचल विधानसभा के सदस्य हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और वर्तमान दल अलग हैं। सुधीर शर्मा धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं, जबकि सुंदर सिंह ठाकुर कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक सुंदर सिंह ठाकुर 2017 से कुल्लू का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और हिमाचल सरकार में मुख्य संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। सुधीर शर्मा धर्मशाला से विधायक हैं और 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा के टिकट पर उपचुनाव जीत चुके हैं।

सुधीर शर्मा की राजनीति में कांग्रेस से भाजपा तक का सफर भी काफी चर्चित रहा है। वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और धर्मशाला से विधायक रहे। वर्ष 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। इसके बाद धर्मशाला सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। इसलिए कांग्रेस के नेताओं के साथ उनका राजनीतिक टकराव अब कई बार सीधे और तीखे अंदाज में सामने आता रहा है।

वहीं सुंदर सिंह ठाकुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और कुल्लू विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह कांग्रेस सरकार में मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में जब भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कांग्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर तंज किया तो सुंदर ठाकुर की ओर से जवाब आना हिमाचल की सियासी बहस में स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया।

दोनों नेताओं की पोस्ट के बीच 'सुंदरकांड' शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है। धार्मिक संदर्भ में सुंदरकांड रामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी में सुधीर शर्मा ने इसी शब्द का इस्तेमाल कांग्रेस के दिल्ली दौरे पर कटाक्ष के रूप में किया। सुंदर ठाकुर ने जवाब देते हुए 'कांड' शब्द को ही पलटवार का आधार बनाया और धर्मशाला के 'पंडित' पर निशाना साधा। इस तरह धार्मिक शब्दावली को राजनीतिक व्यंग्य में इस्तेमाल किए जाने के कारण सोशल मीडिया पर यह विवाद और ज्यादा सुर्खियों में आ गया।

सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब हिमाचल प्रदेश कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। प्रदेश में संगठन, सरकार के कामकाज और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर हमलावर हैं। ऐसे माहौल में नेताओं की फेसबुक पोस्ट भी राजनीतिक संदेश देने और समर्थकों के बीच माहौल बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई हैं।

सुधीर शर्मा की पोस्ट को भाजपा खेमे की ओर से कांग्रेस पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि सुंदर ठाकुर का जवाब कांग्रेस की ओर से पलटवार के रूप में सामने आया है। हालांकि दोनों नेताओं की पोस्ट में इस्तेमाल शब्दों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन इतना साफ है कि यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे हिमाचल की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही व्यापक राजनीतिक खींचतान भी दिखाई देती है।

इस फेसबुक जंग का एक पहलू यह भी है कि अब नेताओं के बीच राजनीतिक बहस के लिए पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या सार्वजनिक मंच ही जरूरी नहीं रह गए हैं। फेसबुक, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नेता सीधे अपनी बात जनता तक पहुंचाते हैं और विरोधी नेता उसी मंच पर जवाब भी दे देते हैं। इससे बयानबाजी तेजी से फैलती है और कुछ ही समय में स्थानीय राजनीतिक टिप्पणी प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन जाती है।

सुधीर शर्मा और सुंदर ठाकुर के मामले में भी ऐसा ही हुआ। एक नेता की पोस्ट सामने आई और उसके बाद दूसरे नेता का जवाब सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। दोनों ओर से समर्थक अपने-अपने नेता के पक्ष में प्रतिक्रिया देने लगे। इस तरह एक राजनीतिक तंज ने सोशल मीडिया पर पूरी बहस का रूप ले लिया।

धर्मशाला और कुल्लू दोनों ही हिमाचल की राजनीति के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। सुधीर शर्मा लंबे समय से धर्मशाला की राजनीति में सक्रिय हैं और उनके परिवार की भी क्षेत्र की राजनीति में पुरानी भूमिका रही है। दूसरी ओर सुंदर सिंह ठाकुर कुल्लू से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं और कांग्रेस सरकार में संगठन तथा सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों में भी रहे हैं। इसलिए दोनों नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी को उनके-अपने विधानसभा क्षेत्रों से बाहर भी राजनीतिक महत्व के साथ देखा जाता है।

राजनीतिक जानकारों के लिए भी यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल में पिछले कुछ वर्षों में दल-बदल और विधायकों की राजनीतिक निष्ठा को लेकर काफी चर्चा रही है। सुधीर शर्मा उन कांग्रेस विधायकों में शामिल रहे जिन्होंने 2024 के राजनीतिक संकट के दौरान कांग्रेस से अलग होकर भाजपा का रुख किया था। इसके बाद उनकी कांग्रेस नेताओं के साथ राजनीतिक बयानबाजी कई मौकों पर देखने को मिली है। ऐसे में सुंदर ठाकुर के साथ ताजा सोशल मीडिया विवाद को भी इसी व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि दोनों नेताओं की फेसबुक पोस्ट को उनके राजनीतिक तंज के रूप में ही देखा जाए। सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किए गए व्यंग्यात्मक शब्दों को किसी गंभीर आरोप या तथ्यात्मक आरोप के रूप में तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उसके समर्थन में अलग से प्रमाण या आधिकारिक जानकारी सामने न आए। मौजूदा मामले में भी विवाद मुख्य रूप से एक-दूसरे पर किए गए राजनीतिक कटाक्ष को लेकर है।

हिमाचल की राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नेता अपने कार्यक्रमों, सरकार की उपलब्धियों, विपक्ष की आलोचना और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को सीधे सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इसके साथ ही राजनीतिक भाषा भी पहले के मुकाबले ज्यादा तीखी और तत्काल होती जा रही है। कोई बयान सामने आते ही कुछ ही मिनटों में उसका जवाब दूसरे नेता की ओर से आ सकता है। इससे राजनीतिक बहस तेज होती है, लेकिन कई बार शब्दों के चयन को लेकर विवाद भी बढ़ जाता है।

ताजा मामले में भी यही देखने को मिला है। सुधीर शर्मा की 'दिल्ली में सुंदरकांड' वाली टिप्पणी के बाद सुंदर सिंह ठाकुर ने 'धर्मशाला के पंडित' का जिक्र करते हुए पलटवार किया। दोनों नेताओं के समर्थक इस बयानबाजी को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए पोस्ट और प्रतिक्रियाओं ने इस राजनीतिक तकरार को और चर्चा में ला दिया है।

आने वाले दिनों में यह विवाद और आगे बढ़ता है या दोनों नेता इस पर विराम लगा देते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि हिमाचल की राजनीति में दो विधायकों की यह 'फेसबुक जंग' चर्चा का विषय बन गई है और 'सुंदरकांड' से शुरू हुई यह शब्दों की लड़ाई राजनीतिक गलियारों में नए सियासी तंज के तौर पर देखी जा रही है।

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