हिमाचल में बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट: कल्पा का पारा 8.2°C लुढ़का, ऊंचे क्षेत्रों में बढ़ी ठिठुरन

हिमाचल में बारिश और बर्फबारी से तापमान में बड़ी गिरावट आई। कल्पा का पारा 8.2°C लुढ़का। ऊंचे क्षेत्रों में ठंड बढ़ी, मानसून अब धीरे कमजोर पड़ने के संकेत हैं।
हिमाचल में बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट: कल्पा का पारा 8.2°C लुढ़का, ऊंचे क्षेत्रों में बढ़ी ठिठुरन
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हिमाचल प्रदेश में सितंबर के मध्य में मौसम ने अचानक करवट ली है। प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी और कई इलाकों में बारिश के बाद तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर मौसम का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। रोहतांग पास, शिंकुला, बारालाचा ला और कुंजुम दर्रे में ताजा बर्फबारी हुई है। इसके साथ ही प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई, जिससे पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कल्पा में अधिकतम तापमान में 8.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

गुरुवार को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का मिजाज अचानक बदला और कई पर्वतीय दर्रों पर सीजन का पहला हिमपात दर्ज किया गया। रोहतांग पास, शिंकुला, बारालाचा ला और कुंजुम दर्रे में करीब 4 से 6 इंच तक ताजा बर्फ गिरने की सूचना है। चंबा के मणिमहेश क्षेत्र में भी बर्फबारी हुई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ पड़ने के बाद तापमान में गिरावट से वहां ठंड का असर बढ़ गया है। दूसरी ओर शिमला समेत कई मध्यवर्ती क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला।

बारिश और बर्फबारी के बाद शुक्रवार सुबह हिमाचल के कई हिस्सों में मौसम कुछ साफ दिखाई दिया और शिमला समेत कई क्षेत्रों में धूप खिली। धूप निकलने से लोगों को बारिश और ठंड के बाद राहत मिली। हालांकि ऊंचे क्षेत्रों में तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है और वहां ठिठुरन महसूस की जा रही है। मौसम साफ होने के बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में मौसम के बदलाव पर लोगों और प्रशासन की नजर बनी हुई है।

कल्पा में तापमान में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार यहां अधिकतम तापमान में 8.2 डिग्री की कमी आई और यह 14.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भुंतर में अधिकतम तापमान 7.5 डिग्री गिरकर 24.1 डिग्री रहा, जबकि ताबो में 7.1 डिग्री की गिरावट के बाद अधिकतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मंडी में भी अधिकतम तापमान में करीब 6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। प्रदेश के बाकी इलाकों में तापमान दो से तीन डिग्री तक नीचे गया है।

न्यूनतम तापमान में भी कई स्थानों पर बदलाव दर्ज किया गया है। ज्यादातर क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की कमी या बढ़ोतरी रही, जबकि पालमपुर में न्यूनतम तापमान में 4.5 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तरह प्रदेश में दिन के तापमान में आई तेज गिरावट का असर ऊंचाई वाले इलाकों में ज्यादा महसूस हो रहा है। सितंबर के मध्य में ही पहाड़ों पर ठंड का असर बढ़ने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी मौसम के अनुसार तैयारी करनी पड़ रही है।

भारतीय मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में भी कल्पा के मौसम में तापमान का अंतर साफ दिखाई देता है। 17 सितंबर को कल्पा में अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 18 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 7 डिग्री और अधिकतम 20 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। 19 सितंबर को हल्की बारिश की संभावना के साथ अधिकतम तापमान 22 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 20 और 21 सितंबर को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने की संभावना बताई गई है।

बारिश और बर्फबारी का असर सिर्फ तापमान पर नहीं बल्कि सड़क यातायात पर भी पड़ा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेशभर में 60 सड़कें प्रभावित हुई हैं और 31 विद्युत ट्रांसफार्मर भी बाधित हुए हैं। मंडी में सबसे ज्यादा 33 सड़कें, कांगड़ा में 10 और कुल्लू में 9 सड़कें प्रभावित बताई गई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से इन मार्गों को बहाल करने का काम किया जा रहा है। सिरमौर में भी बिजली आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें सामने आई हैं।

ऊंचे दर्रों पर बर्फ जमने के कारण फिसलन का खतरा भी बढ़ गया है। रोहतांग, शिंकुला, बारालाचा ला और कुंजुम जैसे ऊंचाई वाले मार्गों पर मौसम खराब होने की स्थिति में वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय वाहन चालकों को ऊंचे दर्रों की ओर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। बर्फबारी के बाद सड़क पर पकड़ कम होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए मौसम और सड़क की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करने की जरूरत है।

हिमाचल में इस मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा भी सामान्य से नीचे चल रहा है। 1 जून से 17 सितंबर के बीच प्रदेश में 627.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम है। सितंबर के शुरुआती 17 दिनों में 78.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से लगभग 3 प्रतिशत कम बताई गई है। यानी सितंबर में बारिश की गतिविधि के बीच भी पूरे मानसून सीजन का संचयी आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।

पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। श्री नैना देवी जी में सबसे ज्यादा 86 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा घाघस में 40 मिलीमीटर, सुंदरनगर में 37 मिलीमीटर, नाहन में 34 मिलीमीटर और मनाली में 17 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के इन आंकड़ों से साफ है कि मौसम का असर केवल ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मध्य और निचले क्षेत्रों में भी वर्षा गतिविधियां हुई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 सितंबर को प्रदेश के मैदानी और मध्यवर्ती क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इसके बाद 20 और 21 सितंबर को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इससे संकेत मिलते हैं कि मौजूदा मौसम गतिविधि धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में तत्काल बारिश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी को लेकर भी देशभर में गतिविधियां शुरू हो गई हैं। भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं और पश्चिमी राजस्थान से करीब 19 सितंबर के आसपास वापसी शुरू होने की संभावना है। सामान्य तौर पर उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 17 सितंबर मानी जाती है। हालांकि वापसी की प्रक्रिया मौसम की वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करती है और यह एक साथ पूरे देश से नहीं होती।

हिमाचल में मानसून के कमजोर पड़ने के संकेत ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब प्रदेश ने इस सीजन में बारिश से भारी नुकसान भी झेला है। 30 जून से 17 सितंबर के बीच मानसून के कारण प्रदेश में 3212.84 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें लोक निर्माण विभाग को सड़क और पुलों से करीब 2744.67 करोड़ रुपये तथा जल शक्ति विभाग को करीब 383.57 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। इसी अवधि में 234 मकानों के पूरी तरह ध्वस्त होने की जानकारी भी सामने आई है।

मौसम में बदलाव का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। सितंबर में आमतौर पर हिमाचल के कई हिस्सों में मौसम सुहावना रहता है, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक बर्फबारी होने से यात्रियों को अब मौसम के अनुरूप तैयारी करनी पड़ रही है। खासकर लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चंबा के ऊंचे इलाकों में जाने वाले लोगों के लिए तापमान और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर यात्रा करना जरूरी हो गया है।

मणिमहेश यात्रा के दौरान भी इस मौसम परिवर्तन का असर देखने को मिला है। चंबा के मणिमहेश क्षेत्र में बर्फबारी के बाद यात्रा को सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए रोका गया था। बाद में मौसम में सुधार होने पर यात्रा दोबारा शुरू की गई। राधाष्टमी के शाही स्नान के लिए श्रद्धालु लगातार मणिमहेश की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन ऊंचाई वाले इलाके में बर्फबारी और फिसलन के कारण यात्रा के दौरान सावधानी जरूरी है।

हिमाचल के लोगों के लिए सितंबर के इस मौसम बदलाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बारिश के साथ ही ऊंचे पहाड़ों पर ठंड का दौर समय से पहले तेज होता दिखाई दे रहा है। कल्पा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिकतम तापमान का 14.2 डिग्री तक पहुंचना इसका उदाहरण है। हालांकि आने वाले दिनों में दिन का तापमान कुछ बढ़ने का अनुमान है, लेकिन सुबह और शाम के समय ठंड का असर बने रहने की संभावना है।

शिमला में शुक्रवार सुबह धूप निकलने से मौसम कुछ राहत भरा रहा। बारिश के बाद आसमान साफ होने और धूप खिलने से लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली। हालांकि मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है और अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसलिए धूप निकलने को मानसून की तत्काल पूरी विदाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 18 और 19 सितंबर को बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश में मानसून के अंतिम चरण में मौसम ने अचानक करवट लेकर पहाड़ों पर ठंड बढ़ा दी है। ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी, कई जिलों में बारिश, तापमान में 8.2 डिग्री तक की गिरावट और सड़क-बिजली व्यवस्था पर असर इसके प्रमुख संकेत हैं। कल्पा में तापमान की तेज गिरावट ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ती ठिठुरन को साफ कर दिया है। वहीं मानसून की वापसी के लिए उत्तर-पश्चिम भारत में परिस्थितियां बनने लगी हैं। इसके बावजूद हिमाचल में 18 और 19 सितंबर को बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने के संकेत हैं।

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