हंतावायरस संक्रमण के 3 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 9 हो गई है। World Health Organization ने यात्रियों के लिए 42 दिन आइसोलेशन की सलाह दी है। अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है।
वॉशिंगटन/पेरिस/मेड्रिड: दुनियाभर में हंतावायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल ही में तीन और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में वायरस की पुष्टि होने के बाद कुल मामलों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है, जबकि अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है।
नए संक्रमितों में एक अमेरिकी, एक फ्रांसीसी और एक स्पेनिश नागरिक शामिल हैं। इनमें से अमेरिकी और फ्रांसीसी यात्री अपने-अपने देशों में लौट चुके थे, जबकि स्पेनिश नागरिक को मैड्रिड में क्वारंटीन किया गया है।
ये सभी यात्री उस क्रूज शिप “MV Hondius” से जुड़े हैं, जहां सबसे पहले संक्रमण के मामले सामने आए थे। जहाज हाल ही में स्पेन के कैनरी आइलैंड्स क्षेत्र में रुका था।
World Health Organization (WHO) ने जहाज से लौटे सभी यात्रियों के लिए 42 दिनों तक निगरानी और आइसोलेशन की सिफारिश की है।
अब तक तीन मौतें, कई यात्री निगरानी में
- हंतावायरस संक्रमण से अब तक तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है।
- 11 अप्रैल को एक बुजुर्ग डच यात्री की जहाज पर मौत हुई।
- बाद में उनकी पत्नी दक्षिण अफ्रीका में मृत पाई गईं।
- 2 मई को एक जर्मन महिला यात्री की भी जहाज पर मौत हो गई।
इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेना शुरू किया।
अमेरिका में संक्रमण के संपर्क में आए 17 यात्रियों को नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में विशेष निगरानी के तहत रखा गया है। यहां उन्हें 42 दिनों तक क्वारंटीन और मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा।
हंतावायरस क्या है और यह कितना खतरनाक है
Hantavirus एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों (rodents) से फैलता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों के मल, पेशाब और लार में पाया जाता है।
इंसानों में संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब वायरस वाले कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं।
प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- कमजोरी
- सांस लेने में तकलीफ
- लो ब्लड प्रेशर
- किडनी फेल होने का खतरा
- फेफड़ों में पानी भरना
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे लग सकते हैं, लेकिन कुछ दिनों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।

लक्षण दिखने में लग सकते हैं 8 हफ्ते
WHO के मुताबिक, हंतावायरस के लक्षण संक्रमण के 1 से 8 हफ्ते बाद तक सामने आ सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय तक निगरानी जरूरी मानी जाती है।
स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि गंभीर मामलों में मृत्यु दर 35% से 40% तक हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, समय पर पहचान और मेडिकल सहायता मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या इंसान से इंसान में फैलता है वायरस?
अधिकांश मामलों में हंतावायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है। हालांकि WHO ने चेतावनी दी है कि “Andes” नामक इसकी एक विशेष किस्म इंसान से इंसान में भी फैल सकती है।
संक्रमण निम्न तरीकों से हो सकता है:
- संक्रमित व्यक्ति की लार या थूक से
- बहुत करीबी संपर्क से
- एक ही बिस्तर या कमरे में रहने से
- संक्रमित व्यक्ति की देखभाल के दौरान
हालांकि Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने स्पष्ट किया है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता और व्यापक महामारी का खतरा फिलहाल कम माना जा रहा है।
CDC और WHO की क्या सलाह है
CDC के कार्यवाहक निदेशक जय भट्टाचार्य ने कहा कि संक्रमण जोखिम का आकलन इस आधार पर किया जाएगा कि कौन लोग संक्रमित व्यक्ति के कितने करीब थे।
यात्रियों को तीन श्रेणियों में बांटा जा रहा है:
- कम जोखिम
- मध्यम जोखिम
- उच्च जोखिम
जिन लोगों का संक्रमित व्यक्ति से करीबी संपर्क नहीं था, उन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है।
WHO ने जहाज से लौटे सभी यात्रियों के लिए:
- 42 दिन निगरानी
- नियमित स्वास्थ्य जांच
- लक्षण दिखने पर तुरंत आइसोलेशन
- की सिफारिश की है।
हंतावायरस का इलाज और वैक्सीन
फिलहाल हंतावायरस के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
इलाज मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित होता है।
उपचार में शामिल हैं:
- ऑक्सीजन सपोर्ट
- वेंटिलेटर सहायता
- ब्लड प्रेशर नियंत्रण
- फ्लूइड थेरेपी
- गहन चिकित्सा निगरानी
विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी अस्पताल पहुंचना और शुरुआती इलाज जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में विशेष क्वारंटीन व्यवस्था
अमेरिका का नेब्रास्का मेडिकल सेंटर देश की सबसे उन्नत फेडरल क्वारंटीन सुविधाओं में से एक माना जाता है।
- नेगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम वाले कमरे हैं
- वायरस को हवा में फैलने से रोकने की तकनीक मौजूद है
- रोजाना मेडिकल मॉनिटरिंग की जाती है
डॉक्टर माइकल वाडमैन के अनुसार, यात्रियों को होटल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं ताकि लंबे क्वारंटीन के दौरान मानसिक तनाव कम रहे।
यदि किसी यात्री में गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे बायोकंटेनमेंट यूनिट में स्थानांतरित किया जाएगा।
दुनिया में पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े मामले
हंतावायरस का पहला बड़ा मामला 1993 में अमेरिका में सामने आया था, जब एक दंपत्ति की रहस्यमय मौत के बाद जांच में वायरस की पुष्टि हुई थी।
- इसके बाद कई देशों में संक्रमण के मामले सामने आए:
- अर्जेंटीना में 2018 में एक बर्थडे पार्टी से 34 लोग संक्रमित हुए
11 लोगों की मौत हुई
- हर साल दुनिया में लगभग 1.5 लाख मामले सामने आते हैं
- इनमें से आधे से अधिक मामले चीन में दर्ज किए जाते हैं
भारत में भी दर्ज हो चुके हैं मामले
India में भी हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।
प्रमुख घटनाएं
- 2007 में आंध्र प्रदेश में पहला ज्ञात मामला
- 2008 में चूहे और सांप पकड़ने वाले 28 लोगों में संक्रमण
- 2016 में मुंबई में एक महिला की मौत
रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला को डिलीवरी के बाद तेज बुखार, पेट दर्द और सांस लेने में परेशानी हुई थी। बाद में जांच में हंतावायरस की पुष्टि हुई।
क्या वैश्विक खतरा बढ़ रहा है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल हंतावायरस कोविड जैसी वैश्विक महामारी नहीं बना है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा और क्रूज टूरिज्म के कारण संक्रमण की निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।
WHO और राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार यात्रियों की ट्रैकिंग, जांच और क्वारंटीन पर जोर दे रही हैं ताकि संक्रमण को सीमित रखा जा सके।










