लाल सागर में हूतियों ने एक कार्गो जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। यमन सरकार के अनुसार, छह लोगों की मौत और 10 लोग घायल हुए। जहाज में आग लग गई। इसे ईरान युद्ध शुरू होने के बाद हूतियों का पहला घातक समुद्री हमला बताया गया है।
सना: लाल सागर में एक कार्गो जहाज पर हूतियों के कथित मिसाइल हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अनुसार, हमले में छह लोगों की मौत हुई है, जबकि 10 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल के कई सदस्यों को जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
यमन के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, जहाज को तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया। यह हमला यमन के मोखा बंदरगाह के दक्षिण में हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमले में जहाज के चालक दल के चार सदस्यों की मौत हुई, जिनमें तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल थे। घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में बचाव अभियान शुरू किया गया।
बचाव के दौरान भी हुआ दूसरा हमला
यमन के तटरक्षक बल ने दावा किया कि जहाज से लोगों को निकालने के लिए पहुंचे बचावकर्मियों को भी दूसरी मिसाइल से निशाना बनाया गया। इस हमले के कारण राहत एवं बचाव अभियान में जुटे लोगों को भी नुकसान पहुंचा। इससे पहले समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड ने बताया था कि यमनी नौसेना ने जहाज की सहायता के लिए अपनी टीम भेजी थी, लेकिन उस पर भी गोलीबारी की गई। इस दौरान तीन अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में जहाज को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दे रहा है। बीबीसी वेरिफाई की जांच के अनुसार, तस्वीरों में दिखाई देने वाला जहाज बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास का प्रतीत होता है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।
जहाज का नाम तिहामा बताया गया
उपलब्ध तस्वीरों और शिप-ट्रैकिंग जानकारी के आधार पर क्षतिग्रस्त जहाज की पहचान तिहामा के रूप में की गई है। मरीनट्रैफिक के अनुसार, जहाज लाल सागर में वार्नर पॉइंट के पास मौजूद था। समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड ने इसे तंजानिया के झंडे के नीचे चलने वाला जहाज बताया है। वहीं, मरीनट्रैफिक की जानकारी के अनुसार इसका स्वामित्व या संचालन मिस्र से जुड़े एक ऑपरेटर से संबंधित है।
हालांकि जहाज की पहचान और उसके संबंध को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यमन के परिवहन मंत्रालय ने इसे यमनी वाणिज्यिक जहाज बताया है, जबकि ईरानी मीडिया की शुरुआती रिपोर्टों में इसे सऊदी अरब से संबद्ध बताया गया। हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने जिस जहाज को निशाना बनाया, वह सऊदी सैन्य उपकरण ले जा रहा था।
इसके विपरीत, यमन की सरकार ने कहा कि जहाज पर खाद्य सामग्री लदी हुई थी और यह एक वाणिज्यिक पोत था। दोनों पक्षों के दावों में अंतर के कारण जहाज के माल और उसके वास्तविक संचालन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
ईरान युद्ध के बाद पहला घातक समुद्री हमला
यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद हूतियों का किसी जहाज पर पहला घातक हमला बताया जा रहा है। ईरान समर्थित हूती संगठन पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाता रहा है और क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान समुद्री मार्गों को प्रभावित करने की धमकी देता रहा है।

हाल के घटनाक्रम में हूतियों ने सऊदी बंदरगाहों के खिलाफ कथित नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद लाल सागर में तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ताजा घटना ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के सामने एक बार फिर सुरक्षा का गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
यमन में पुराना संघर्ष फिर हुआ तेज
यमन में हूतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच वर्षों से संघर्ष चल रहा है। हूती देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं और राजधानी सना भी उनके कब्जे में है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार दक्षिणी शहर अदन से अपना प्रशासन चलाती है।
दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चली युद्धविराम व्यवस्था ने संघर्ष को कुछ हद तक नियंत्रित किया था। लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद स्थिति फिर बिगड़ती दिखाई दे रही है। यमन के भीतर राजनीतिक और सैन्य तनाव बढ़ने के साथ लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ रहा है।
लाल सागर से लेकर होर्मुज तक बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव केवल लाल सागर तक सीमित नहीं है। ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
यदि लाल सागर और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। जहाजों की बीमा लागत, माल ढुलाई खर्च और लंबी समुद्री यात्राओं का दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापार पर पड़ने की आशंका है।
विदेशी नागरिकों की मौत से बढ़ी गंभीरता
ताजा हमले में पाकिस्तानी और इंडोनेशियाई नागरिकों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद घटना का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और बढ़ गया है। एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला और बचावकर्मियों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।
हूतियों की ओर से जहाज को सऊदी सैन्य उपकरण ले जाने वाला बताए जाने के बावजूद यमनी सरकार का कहना है कि यह एक वाणिज्यिक पोत था और उसमें खाद्य सामग्री मौजूद थी। ऐसे में हमले के वास्तविक उद्देश्य और जहाज के माल को लेकर जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल तिहामा जहाज पर हुए हमले से संबंधित अलग-अलग दावों की जांच की जा रही है। जहाज की राष्ट्रीयता, स्वामित्व और उसमें मौजूद सामान को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। हालांकि छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यमन और लाल सागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का संकट एक बार फिर गंभीर रूप ले रहा है।











