हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को चुनाव होने वाला है। जैसे ही चुनाव की घोषणा हुई, दोनों पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। मौजूदा विधानसभा में भाजपा के पास 51 और कांग्रेस के पास 37 विधायकों का संख्या बल है।
चंडीगढ़: हरियाणा में 16 मार्च को अन्य राज्यों के साथ-साथ दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होगा। चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी रणनीतियाँ तैयार कर ली हैं। इस बार का राज्यसभा चुनाव काफी दिलचस्प रहने वाला है। वर्तमान में इन दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। वहीं, इस बार कांग्रेस भी कमर कस रही है और उसे एक सीट पर बाजी मारने की संभावना दिखाई दे रही है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
राज्यसभा के चुनाव में विधायक वोटिंग करते हैं। हरियाणा में 90 विधानसभा सीटें हैं और दो राज्यसभा सीटें खाली हैं। वोटिंग के लिए लागू फॉर्मूला इस प्रकार है:
- खाली सीटों की संख्या + 1 = 3
- कुल विधानसभा सीटों (90) ÷ 3 = 30
- इसमें 1 जोड़ें → 31
यानी, हरियाणा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इस गणित के अनुसार, भाजपा के 51 विधायकों के पास पर्याप्त वोट हैं, इसलिए वे आराम से एक सीट जीत सकते हैं। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो आवश्यक 31 वोट पूरा कर देते हैं। हालांकि क्रॉस वोटिंग की स्थिति में कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है।

भाजपा का दावेदारों का पैनल
भाजपा के वर्तमान सांसद हैं रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी। इस बार पार्टी द्वारा नए नामों पर भी विचार किया जा रहा है। चर्चा में शामिल संभावित नाम हैं:
- पंचकूला से रेखा शर्मा
- पूर्व सीएम स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई
- पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्या
- अंबाला के पूर्व सांसद बंतो कटारिया
- सिरसा की पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल
- करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया
- पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर
- पूर्व मंत्री असीम गोयल
भाजपा के पास अपने 51 विधायकों की संख्या के कारण एक सीट पक्की है और पार्टी रणनीति के अनुसार दूसरी सीट के लिए भी दावेदारों का चयन किया जा सकता है।
कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार
- कांग्रेस की ओर से इस बार भी चर्चा में कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद
- पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान
- पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर
पिछले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने अजय माकन को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन क्रॉस वोटिंग की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार पार्टी ने अनुभव और संख्या बल का लाभ उठाने की तैयारी की है।











