हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम के बीच HRTC की एक इलेक्ट्रिक बस ने शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक बार चार्ज करने के बाद करीब 270 किलोमीटर की दूरी तय कर शानदार प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस प्रदर्शन को उत्साहजनक बताया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य में इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हिमाचल प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए HRTC के बेड़े में लगातार नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज करीब 180 किलोमीटर है, लेकिन वास्तविक परिचालन में शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक बस ने करीब 270 किलोमीटर तक चलकर बेहतर क्षमता का प्रदर्शन किया। इससे लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
पहाड़ी इलाकों में इलेक्ट्रिक बस चलाना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अलग चुनौती माना जाता है। चढ़ाई, मोड़, सड़क की स्थिति, यात्रियों का भार और मौसम जैसे कई कारक बैटरी की खपत को प्रभावित करते हैं। ऐसे में शिमला-चंडीगढ़ जैसे रूट पर करीब 270 किलोमीटर की दूरी एक चार्ज में तय करना HRTC के लिए महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना जा रहा है।
शिमला और चंडीगढ़ के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। नौकरी, कारोबार, शिक्षा, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। इस रूट पर इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन होने से यात्रियों को भविष्य में अपेक्षाकृत स्वच्छ और कम प्रदूषण वाला सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
सरकार की योजना केवल कुछ चुनिंदा रूटों तक इलेक्ट्रिक बसों को सीमित रखने की नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसें पहले से ही शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा सहित कई क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। कुल मिलाकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इलेक्ट्रिक परिवहन का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है।
HRTC के लिए इलेक्ट्रिक बसों का एक बड़ा फायदा परिचालन लागत में कमी भी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऊर्जा लागत पर करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर तक की बचत हो रही है। इससे ईंधन खर्च कम करने और परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिल सकती है।
हाल ही में हिमाचल सरकार ने HRTC में बड़ी संख्या में नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की हैं। 30 जुलाई 2026 को 297 नई Type-I इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में शामिल किया गया था। इस विस्तार के साथ HRTC के इलेक्ट्रिक बस बेड़े में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और सरकार ने आगे भी इलेक्ट्रिक परिवहन को विस्तार देने की योजना बताई है।
सरकार की अगली योजना और भी अधिक क्षमता वाली इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की है। मुख्यमंत्री ने आने वाले समय में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की योजना बताई है। इसके अलावा करीब 200 हाइड्रोजन से चलने वाली बसें लाने की भी योजना का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में डीजल पर निर्भरता कम करना और हिमाचल को हरित ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाना है।
नई पीढ़ी की इलेक्ट्रिक बसों की रेंज भी मौजूदा बसों से ज्यादा रखने की योजना है। सरकार के अनुसार अगली पीढ़ी की बसें एक चार्ज में करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चलने में सक्षम होंगी। इससे लंबी दूरी के रूट पर चार्जिंग की जरूरत कम होगी और बसों को ज्यादा समय तक सेवा में रखा जा सकेगा।
इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी सरकार के लिए अहम चुनौती है। पहाड़ी इलाकों में डिपो और चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए अलग तरह की योजना बनानी पड़ती है। HRTC ने कई स्थानों पर चार्जिंग व्यवस्था विकसित की है, जबकि कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर जैसे क्षेत्रों में भी नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें सड़क पर सीधे उत्सर्जन नहीं करतीं। हिमाचल जैसे हरित और पर्यटन आधारित राज्य के लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है। कम प्रदूषण वाला सार्वजनिक परिवहन शहरों और पर्यटन क्षेत्रों की हवा की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआती खरीद लागत डीजल बसों की तुलना में काफी अधिक है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार नई इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 1.26 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जबकि पारंपरिक डीजल बस की लागत इससे काफी कम रहती है। इसलिए सरकार को शुरुआती निवेश के साथ लंबे समय में होने वाली परिचालन बचत का संतुलन बनाना होगा।
पहाड़ी रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों की सफलता के लिए केवल बैटरी रेंज पर्याप्त नहीं है। चार्जिंग स्टेशन, तकनीकी रखरखाव, बैटरी की स्थिति, चालक प्रशिक्षण और आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी जरूरी होगी। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम और सड़क की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए बसों की तकनीकी क्षमता के साथ परिचालन योजना मजबूत रखना भी जरूरी है।
HRTC के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी इलेक्ट्रिक बसों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार अगले पांच वर्षों में परिवहन निगम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इलेक्ट्रिक बसों की कम परिचालन लागत इस लक्ष्य में मददगार हो सकती है।
राज्य सरकार ने अपने शुरुआती बजट से ही हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में काम करने की बात कही थी। इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार इसी नीति का हिस्सा है। परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से राज्य की ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
शिमला-चंडीगढ़ रूट पर 270 किलोमीटर की वास्तविक दूरी तय करने वाली बस का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिक बसें केवल छोटे शहर या सीमित दूरी के रूट के लिए ही उपयोगी नहीं हैं। सही तकनीक, चार्जिंग व्यवस्था और रूट प्लानिंग के साथ इन्हें लंबी दूरी के अंतरराज्यीय मार्गों पर भी प्रभावी तरीके से चलाया जा सकता है।
यात्रियों के नजरिए से देखें तो इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार यात्रा के अनुभव में भी बदलाव ला सकता है। इन बसों में पारंपरिक डीजल इंजन की तुलना में शोर कम होता है। शहरों और पर्यटन क्षेत्रों में इसका फायदा यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी मिल सकता है।
आने वाले समय में HRTC के इलेक्ट्रिक बेड़े का विस्तार होने पर कई और रूटों को इलेक्ट्रिक बस सेवा से जोड़े जाने की संभावना है। यदि चार्जिंग नेटवर्क और तकनीकी सहायता समान गति से विकसित होती है तो राज्य के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है।
फिलहाल शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक इलेक्ट्रिक बस का करीब 270 किलोमीटर तक एक चार्ज में चलना HRTC के लिए उत्साहजनक उपलब्धि है। इससे सरकार को लंबी दूरी के रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह प्रदर्शन भविष्य में अधिक रेंज वाली बसों की खरीद और तैनाती के फैसलों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, HRTC की इलेक्ट्रिक बस ने शिमला-चंडीगढ़ रूट पर एक बार चार्ज करने के बाद करीब 270 किलोमीटर की दूरी तय कर बेहतर प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे उत्साहजनक बताते हुए इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। सरकार 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें तथा 200 हाइड्रोजन बसें लाने की योजना पर काम कर रही है। आने वाले वर्षों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ हिमाचल में सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्वच्छ, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में यह बड़ा बदलाव हो सकता है।












