IAS Success Story: बस ड्राइवर के बेटे मोइन मंसूरी ने तानों को बनाया ताकत, चौथे प्रयास में बने IAS

IAS Success Story: मोइन अहमद मंसूरी ने आर्थिक तंगी और तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में UPSC पास कर AIR 296 के साथ IAS बनने का सपना पूरा किया।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले मोइन अहमद मंसूरी ने आर्थिक तंगी और लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 296 हासिल की और IAS अधिकारी बने।

IAS Success Story: IAS Success Story में आज बात मोइन अहमद मंसूरी की, जिन्होंने सीमित संसाधनों, आर्थिक कठिनाइयों और समाज के तानों के बावजूद अपने सपनों को नहीं छोड़ा। बस ड्राइवर के बेटे मोइन ने कई असफलताओं से सीख लेकर चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।

मुरादाबाद के छोटे से गांव से शुरू हुआ संघर्ष

मोइन अहमद मंसूरी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के जटपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण था। उनके पिता संविदा पर बस ड्राइवर के रूप में काम करते थे और परिवार की आय निश्चित नहीं थी। सात सदस्यों के परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं था। कई बार आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि स्कूल की फीस भरना भी मुश्किल हो गया और उन्हें गांव के स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ी। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता का संघर्ष देखा और तय कर लिया कि मेहनत के दम पर अपनी और परिवार की जिंदगी बदलनी है।

कम नंबर के बाद बदली सोच, मां ने बढ़ाया हौसला

मोइन की जिंदगी में 12वीं कक्षा एक बड़ा मोड़ साबित हुई। परीक्षा में उम्मीद से कम अंक आने पर उन्हें लोगों की आलोचना और अपमान का सामना करना पड़ा। इसी घटना ने उन्हें खुद को साबित करने की प्रेरणा दी। वह विज्ञान विषयों की बेहतर तैयारी करना चाहते थे, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ट्यूशन की अनुमति नहीं देती थी। ऐसे समय में उनकी मां ने अपनी बचत से पैसे निकालकर उनका साथ दिया। मोइन ने इस भरोसे को अपनी ताकत बनाया और रोज 10 से 12 घंटे पढ़ाई कर शानदार प्रदर्शन किया। यहीं से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा कि मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

क्रिकेट का सपना छोड़ चुना सिविल सेवा का रास्ता

एक समय मोइन का सपना क्रिकेटर बनने का था। उन्होंने मुरादाबाद के सरकारी स्टेडियम में प्रशिक्षण भी लिया और रोज कई किलोमीटर का सफर तय कर अभ्यास करते रहे। लेकिन क्रिकेट की ट्रेनिंग और उपकरणों का खर्च उनके परिवार के लिए उठाना आसान नहीं था। उन्होंने गांव में साइबर कैफे शुरू करने की भी कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा सफल नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने अपने भविष्य को नई दिशा देने का फैसला किया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया।

लगातार तीन बार असफलता, फिर भी नहीं छोड़ा सपना

UPSC की तैयारी के लिए मोइन दिल्ली पहुंचे। शुरुआती दिनों में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ पढ़ाई जारी रखी। लगभग डेढ़ साल में उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। इसके बाद दूसरा और तीसरा प्रयास भी असफल रहा। लगातार असफलताओं के कारण रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया और उन्हें मजदूरी करने तक की सलाह दी। हालांकि मोइन ने नकारात्मक बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और हर असफलता से सीख लेकर अपनी तैयारी को बेहतर बनाया।

चौथे प्रयास में मिली सफलता, बने IAS अधिकारी

मोइन ने चौथे प्रयास के लिए अपनी रणनीति पूरी तरह बदली। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया, पढ़ाई का बेहतर प्लान बनाया और पूरे अनुशासन के साथ तैयारी जारी रखी। वर्ष 2022 के प्रयास में उन्होंने पहले प्रारंभिक परीक्षा पास की, फिर मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके बाद इंटरव्यू में उन्हें 187 अंक मिले। अंतिम परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 296 हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हुए। वर्तमान में वह पश्चिम बंगाल (West Bengal) कैडर के IAS अधिकारी हैं।

मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से बदली किस्मत

मोइन अहमद मंसूरी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार की जाए और असफलताओं से सीखने का साहस हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी पार की जा सकती है। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरित करती है, जो आर्थिक या सामाजिक कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। मोइन ने साबित किया कि लोगों की नकारात्मक बातें नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य पर अटूट विश्वास ही सफलता की असली कुंजी होता है।

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