दुनिया के ग्लेशियरों में कहां और कितनी बर्फ जमा है, इसका सटीक अनुमान लगाना वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस मुश्किल काम को आसान बना दिया है।
टेक न्यूज़: दुनिया के ग्लेशियरों में कितनी बर्फ मौजूद है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी मोटाई कितनी है, यह पता लगाना वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से चुनौती रहा है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की मदद से इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल हुई है। इटली के शोधकर्ताओं ने IceBoost v2.0 नाम का एक नया AI मॉडल विकसित किया है, जिसने दुनिया के ग्लेशियरों की मोटाई और बर्फ के कुल आयतन का विस्तृत अनुमान तैयार किया है।
इस अध्ययन की खास बात यह है कि तैयार किए गए डेटासेट का इस्तेमाल भविष्य में ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मॉडल विशेष रूप से उन क्षेत्रों को समझने में मदद कर सकता है जहां ग्लेशियर पिघलने से समुद्र स्तर, जल उपलब्धता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
किन शोधकर्ताओं ने तैयार किया IceBoost v2.0?
यह उपलब्धि वेनिस स्थित Ca' Foscari University of Venice और इटली के National Research Council (CNR) से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम ने हासिल की है। टीम ने पारंपरिक भौतिकी आधारित मॉडल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय वास्तविक ग्लेशियर डेटा से मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित किया।
IceBoost v2.0 को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई से जुड़े 70 लाख से अधिक मापों का इस्तेमाल करके ट्रेन किया गया। इसके बाद मॉडल ने कई पर्यावरणीय और भौगोलिक कारकों को एक साथ विश्लेषित कर ग्लेशियरों के भीतर मौजूद बर्फ की मोटाई का अनुमान लगाया।

AI ने किन आंकड़ों का इस्तेमाल किया?
ग्लेशियर की मोटाई सिर्फ एक पैरामीटर से तय नहीं होती। इसके लिए इलाके की भौगोलिक बनावट और ग्लेशियर की गतिविधियों को समझना पड़ता है। IceBoost v2.0 ने करीब 26 अलग-अलग मानकों को ध्यान में रखा। इनमें जमीन की ढलान, सतह की बनावट, बर्फ की गति, तापमान और अन्य भौगोलिक एवं पर्यावरणीय संकेतक शामिल हैं। इस व्यापक डेटा के आधार पर मॉडल ने दुनिया के अलग-अलग ग्लेशियरों में बर्फ की मात्रा का अनुमान तैयार किया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, मॉडल ने पहले इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ तरीकों की तुलना में बेहतर परिणाम दिए हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे ग्लेशियर अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण डेटासेट मान रहे हैं।
दुनिया के ग्लेशियरों में कितनी बर्फ है?
IceBoost v2.0 के अनुमान के अनुसार, अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की मुख्य बर्फ की चादरों को छोड़कर दुनिया के ग्लेशियरों में करीब 1.5 लाख घन किलोमीटर बर्फ मौजूद है। अगर इन सभी ग्लेशियरों की बर्फ पूरी तरह पिघल जाए तो वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 32.3 सेंटीमीटर की वृद्धि हो सकती है। यह आंकड़ा ग्लेशियरों के वैश्विक जलवायु तंत्र में महत्व को समझने के लिए बेहद अहम है।
मॉडल ने कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी बर्फ की मात्रा को लेकर नए अनुमान दिए हैं, जहां पहले के आकलन सीमित थे। पूर्वी ग्रीनलैंड के गीकी पठार क्षेत्र में कुछ ग्लेशियरों की मोटाई करीब 2 किलोमीटर तक होने का अनुमान सामने आया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यहां मौजूद बर्फ की मात्रा पहले के अनुमानों से काफी अधिक हो सकती है।
हिमालय और काराकोरम के लिए भी अहम
इस शोध की उपयोगिता सिर्फ यूरोप या ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है। IceBoost v2.0 ने हिमालय, काराकोरम और पैटागोनिया जैसे महत्वपूर्ण पर्वतीय ग्लेशियर क्षेत्रों से जुड़े डेटा को भी शामिल किया है। इन क्षेत्रों के ग्लेशियर करोड़ों लोगों के लिए पानी के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ग्लेशियरों के पिघलने की गति में बदलाव का सीधा असर नदियों के प्रवाह, कृषि, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन पर पड़ सकता है।
ग्लेशियरों की मौजूदा स्थिति का सटीक डेटाबेस तैयार होना जलवायु वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब वैज्ञानिकों के पास वर्तमान में मौजूद बर्फ की मात्रा का बेहतर अनुमान होगा, तब वे भविष्य में तापमान और जलवायु परिस्थितियों में बदलाव के आधार पर ग्लेशियरों के संभावित भविष्य का अधिक सटीक मॉडल तैयार कर सकेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के डेटासेट का इस्तेमाल वर्ष 2100 तक ग्लेशियरों की स्थिति का अनुमान लगाने वाले अध्ययनों में आधार के तौर पर किया जा सकता है।











