IDBI Bank Privatization: Fairfax Holdings को मिल सकता है IDBI बैंक का कंट्रोल, ₹53 हजार करोड़ डील पर नजर

IDBI Bank Privatization: IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेयरफैक्स होल्डिंग्स को बैंक का नियंत्रण मिल सकता है।

आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय मंगलवार को वित्त मंत्रालय में हुई बैठकों के बाद लिया गया।

बिजनेस न्यूज़: भारत के बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ी हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ओर से IDBI बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने के लिए कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स (Fairfax Holdings) के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की खबर सामने आई है। यदि यह सौदा पूरा होता है तो यह भारतीय बैंकिंग इतिहास में सबसे बड़े विदेशी निवेश सौदों में से एक बन सकता है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और एलआईसी मिलकर IDBI बैंक में अपनी कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इस सौदे से सरकार को लगभग 53,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।

फेयरफैक्स ने बढ़ाई बोली

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेयरफैक्स होल्डिंग्स ने अपनी पेशकश को संशोधित करते हुए प्रति शेयर 81 रुपये का प्रस्ताव दिया है। यह बोली पिछले साल की 75 रुपये प्रति शेयर की पेशकश से अधिक है। इस मूल्यांकन के आधार पर सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग 26,620 करोड़ रुपये जुटा सकती है। वहीं, एलआईसी भी बैंक में अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।

फेयरफैक्स के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कंपनी को सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए अनिवार्य ओपन ऑफर भी लाना होगा। इससे बैंक में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने की प्रक्रिया पूरी होगी।

भारत में सबसे बड़ा विदेशी बैंक निवेश बन सकता है सौदा

यदि यह सौदा सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो इसे भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में शामिल किया जाएगा। अनुमान के अनुसार, कुल डील का आकार करीब 5.5 अरब डॉलर हो सकता है। फेयरफैक्स होल्डिंग्स के चेयरमैन प्रेम वत्स भारतीय मूल के कनाडाई कारोबारी हैं। उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर वित्तीय सेवाओं, बीमा और निवेश क्षेत्रों में सक्रिय है।

सरकार की विनिवेश योजना को मिलेगी मजबूती

IDBI बैंक में हिस्सेदारी बिक्री केंद्र सरकार की विनिवेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सरकार लंबे समय से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। IDBI बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 95 प्रतिशत है। 

हिस्सेदारी बिक्री के बाद बैंक में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और इसका संचालन नए रणनीतिक निवेशक के प्रभाव में आ सकता है। सरकार का मानना है कि निजी निवेश से बैंक की कार्यक्षमता, प्रतिस्पर्धा और बाजार विस्तार को बढ़ावा मिल सकता है।

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डील की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?

सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही औपचारिक घोषणा कर सकती है। इसके बाद संभावित रूप से लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया जाएगा और फिर शेयर खरीद समझौते (Share Purchase Agreement) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस प्रक्रिया से पहले सरकार के अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह को संशोधित बोलियों और आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई है। इस समूह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल हैं।

हालांकि, सरकार या फेयरफैक्स की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। IDBI बैंक ने भी शेयर बाजार को दी गई जानकारी में इस संबंध में आई खबरों की पुष्टि या खंडन करने से इनकार किया है।

शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर

IDBI बैंक के शेयरों में इस संभावित सौदे की खबर के बाद तेजी देखने को मिली। मंगलवार को NSE पर बैंक का शेयर करीब 2.9 प्रतिशत बढ़कर 86.54 रुपये पर बंद हुआ। इससे पहले बिक्री प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के कारण बैंक के शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर 61.01 रुपये तक पहुंच गए थे। इसके बाद से शेयर में लगभग 42 प्रतिशत की रिकवरी देखी गई है।

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया पहले भी चुनौतियों से गुजरी है। सरकार ने मार्च में उस समय प्रक्रिया रोक दी थी, जब प्राप्त बोलियां निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम थीं।

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