आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद मामले को लेकर विवाद और जांच जारी है। इस बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार को 20 वर्षीय साहिल की मौत पर दुख जताया।
IIT Bombay Student Death: आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में उठे सवालों के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने छात्रों से जाति और धर्म के आधार पर मुद्दे को देखने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की मौत को केवल जातिगत या धार्मिक नजरिए से देखने से उस बड़े सवाल पर चर्चा कमजोर हो सकती है कि आखिर एक युवा इतने गंभीर कदम तक क्यों पहुंचा।
साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को मौत हुई थी। इसके बाद उनके परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस ने मामले में शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया और जांच आगे बढ़ाई। दूसरी ओर, संस्थान ने जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। मामले की जांच में परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा है।
राज ठाकरे ने क्या कहा?
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना पर दुख जताते हुए कहा कि किसी भी दुखद घटना को तुरंत जाति या धर्म के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति पर विचार करने की जरूरत है। उनके अनुसार, साहिल की मौत से जुड़े अलग-अलग दावों और आरोपों की जांच होनी चाहिए, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में यह मूल सवाल पीछे नहीं छूटना चाहिए कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था।
उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा के दौरान किसी छात्र से नियमों का उल्लंघन होता है तो संस्थान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, जांच पूरी होने से पहले किसी मृत छात्र को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है। इसी तरह, किसी शिक्षक या प्रशासनिक अधिकारी पर लगे आरोपों को भी जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए।
जातिगत आरोपों की जांच जारी

साहिल के परिवार ने दावा किया है कि वह कैंपस में जातिगत टिप्पणियों और मानसिक दबाव का सामना कर रहा था। पुलिस जांच में इन आरोपों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित मामले में एक प्रोफेसर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी कानून से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
राज ठाकरे ने इसी संदर्भ में कहा कि जाति से जुड़े आरोपों की जांच अपनी जगह जरूरी है, लेकिन घटना को केवल इसी पहलू तक सीमित करने से शिक्षा व्यवस्था, छात्र दबाव और संस्थागत प्रक्रियाओं जैसे सवालों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाएगी।
शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर दबाव का मुद्दा
राज ठाकरे ने अपने बयान में भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते प्रतिस्पर्धात्मक दबाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए लाखों विद्यार्थी सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। प्रवेश मिलने के बाद पढ़ाई का दबाव, भविष्य की चिंता और रोजगार को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा छात्रों के लिए अतिरिक्त तनाव पैदा कर सकती है।
उन्होंने शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कई दशकों में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की जरूरत महसूस हुई है। उनके मुताबिक, छात्र आंदोलनों का उद्देश्य व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाना और समाधान तलाशना होना चाहिए।
छात्रों से की मुद्दों पर ध्यान देने की अपील
राज ठाकरे ने छात्रों से अपील की कि वे जाति और धर्म से जुड़े विवादों में उलझने के बजाय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मूल सवालों को उठाएं। उनका कहना है कि यदि छात्र संस्थागत सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर छात्र सहायता व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो सरकार और संस्थानों के सामने भी इन सवालों पर जवाब देने की जिम्मेदारी बनेगी।










