हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज उन दिग्गज कलाकारों में शामिल हैं, जो सिनेमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं।
Tom Cruise AI Speech: हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रूज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव के बीच फिल्म निर्माण में इंसानी प्रतिभा और रचनात्मकता की अहमियत पर जोर दिया है। BAFTA के ‘Life in Pictures’ कार्यक्रम में उन्होंने करीब छह मिनट तक सिनेमा, कलाकारों की मेहनत और थिएटर में फिल्म देखने के अनुभव पर बात की। उनके विचारों के बाद कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।
64 वर्षीय टॉम क्रूज लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और कलाकारों की भूमिका को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। हालांकि इस कार्यक्रम में उन्होंने AI के संभावित खतरों पर सीधे चर्चा करने के बजाय इस बात पर अधिक जोर दिया कि सिनेमा की असली ताकत इंसानों की कल्पनाशक्ति, मेहनत और सामूहिक अनुभव में है।
‘इंसान जैसा कुछ नहीं होता’
BAFTA कार्यक्रम के दौरान होस्ट एडिथ बोमन ने टॉम क्रूज से पूछा कि AI उस फिल्मी माध्यम को किस तरह प्रभावित कर सकता है, जिससे वह लंबे समय से जुड़े हुए हैं। जवाब में अभिनेता ने कहा कि “इंसान जैसा कुछ नहीं होता।” उन्होंने समझाया कि फिल्म निर्माण सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय करने तक सीमित नहीं है। किसी फिल्म को तैयार करने में अभिनेता, निर्देशक, सिनेमैटोग्राफर, लेखक, तकनीकी टीम और कई अन्य कलाकारों की भूमिका होती है। इन सभी के अनुभव और रचनात्मक फैसले मिलकर फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं।
क्रूज ने कैमरा लेंस की तकनीक से लेकर फिल्म और स्ट्रीमिंग के अनुभव के अंतर तक कई पहलुओं पर बात की। उनके मुताबिक तकनीक लगातार बदल सकती है, लेकिन दर्शकों और कलाकारों के बीच बनने वाला मानवीय जुड़ाव सिनेमा की बुनियादी ताकत बना रहेगा।
थिएटर में फिल्म देखने के अनुभव पर जोर
टॉम क्रूज ने सिनेमाघरों में फिल्म देखने के अनुभव को भी खास बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी फिल्मों की सफलता और थिएटर में दर्शकों की मौजूदगी यह दिखाती है कि लोग अब भी सामूहिक रूप से फिल्म देखने का अनुभव चाहते हैं। उन्होंने खास तौर पर युवा दर्शकों का जिक्र किया और बताया कि नई पीढ़ी के लोग भी सिनेमाघरों में जाकर फिल्मों का आनंद ले रहे हैं। उनके अनुसार थिएटर में फिल्म देखना सिर्फ बड़ी स्क्रीन पर कहानी देखने का अनुभव नहीं है, बल्कि आसपास मौजूद लोगों के साथ उस कहानी को महसूस करना भी इसका हिस्सा है।
अभिनेता ने यह भी कहा कि वह उन कलाकारों और फिल्म क्रू को खोना नहीं चाहते, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सिनेमा को समर्पित की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दर्शक वास्तविक और मानवीय अनुभवों को महत्व देते हैं।
‘आप जिस चीज पर ध्यान देते हैं, उसे जिंदगी देते हैं’

अपने संबोधन के दौरान टॉम क्रूज ने कहा कि इंसान जिस चीज पर अपना ध्यान केंद्रित करता है, उसे एक तरह से जीवन देता है। उनका यह विचार फिल्म निर्माण में मानवीय रचनात्मकता की भूमिका को रेखांकित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि सिनेमा में तकनीकी बदलाव हमेशा होते रहे हैं। कैमरा, लेंस, विजुअल इफेक्ट्स और वितरण के तरीकों में लगातार बदलाव आया है, लेकिन फिल्म के केंद्र में कहानी और उसे प्रस्तुत करने वाले इंसान आज भी महत्वपूर्ण हैं।
टॉम क्रूज इससे पहले 2023 में हॉलीवुड कलाकारों की हड़ताल के दौरान AI के इस्तेमाल को लेकर चर्चा में रहे थे। उस समय फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री में कलाकारों की डिजिटल समानता, उनकी छवि और आवाज के इस्तेमाल जैसे मुद्दे प्रमुख थे। क्रूज ने बातचीत में AI से जुड़े सुरक्षा उपायों और कलाकारों के अधिकारों की आवश्यकता पर जोर दिया था।
‘Digger’ को लेकर भी की बात
BAFTA के इस कार्यक्रम में टॉम क्रूज ने अपनी आगामी फिल्म ‘Digger’ पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करने से पहले उन्होंने निर्देशक एलेजांद्रो गोंजालेज इनारितु के साथ फिल्म की स्क्रिप्ट पर काफी समय बिताया था। अभिनेता ने फिल्म को अपने करियर की बेहद मौलिक और भावनात्मक परियोजनाओं में से एक बताया।
फिल्म में क्रूज डिगर रॉकवेल नाम के एक तेल कारोबारी का किरदार निभा रहे हैं। कहानी एक पर्यावरणीय संकट के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे रोकने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति के सामने आती है जिसकी गतिविधियां उस संकट से जुड़ी होती हैं। फिल्म 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित है।










