IIT मंडी का ‘सेफ डैश’ सिस्टम ड्राइवर की नींद पहचानकर हादसों से बचाएगा

IIT मंडी का AI आधारित Safe Dash सिस्टम ड्राइवर की थकान और नींद का रियल-टाइम पता लगाकर वॉयस अलर्ट, स्क्रीन वार्निंग और वाइब्रेशन से सतर्क करता है।

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने ‘सेफ डैश’ नामक स्मार्ट सिस्टम विकसित किया है, जो ड्राइवर की थकान और नींद का रियल-टाइम पता लगाता है। यह वॉयस अलर्ट, स्क्रीन वार्निंग और स्टीयरिंग वाइब्रेशन के जरिए चालक को सतर्क करता है।

मंडी: सड़क हादसों की बड़ी वजह बनने वाली ड्राइवर की झपकी और थकान को रोकने के लिए आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने ‘सेफ डैश’ नामक अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित यह सिस्टम ड्राइवर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है और नींद आने के संकेत मिलते ही तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सकता है।

सड़क हादसों को रोकने के लिए IIT मंडी की नई पहल

देश में हर साल बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं ड्राइवर की थकान और नींद के कारण होती हैं। लंबी दूरी तक वाहन चलाने वाले बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के चालकों के लिए यह समस्या और भी गंभीर बन जाती है। इसी चुनौती का समाधान खोजते हुए आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के शोधार्थियों ने ‘सेफ डैश’ नामक एक स्मार्ट ड्राइवर ड्रोसिनेस डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है।

यह सिस्टम ड्राइवर की आंखों, चेहरे और सिर की गतिविधियों का रियल-टाइम विश्लेषण करता है। जैसे ही चालक की एकाग्रता कम होती है या उसे नींद आने के संकेत मिलते हैं, सिस्टम तुरंत सक्रिय होकर चेतावनी देना शुरू कर देता है। शोधार्थियों का मानना है कि यह तकनीक सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

AI और एज कंप्यूटिंग से लैस है तकनीक

‘सेफ डैश’ केवल एक कैमरा आधारित निगरानी उपकरण नहीं है, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एज कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। वाहन के डैशबोर्ड पर लगाए जाने वाले इस सिस्टम में एक सामान्य वेबकैम और एनवीडिया जेटसन नैनो प्रोसेसर का उपयोग किया गया है।

वेबकैम लगातार ड्राइवर के चेहरे की निगरानी करता है, जबकि प्रोसेसर इंटरनेट की जरूरत के बिना वाहन के भीतर ही डेटा को प्रोसेस करता है। सिस्टम में मीडिया पाइप तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो चेहरे के 468 महत्वपूर्ण बिंदुओं को ट्रैक करती है। इससे आंखों की पुतलियों की गतिविधि, पलक झपकने की दर और सिर के झुकाव का सटीक विश्लेषण संभव हो पाता है।

इस तकनीक की खास बात यह है कि यह महंगी लग्जरी कारों तक सीमित नहीं है। शोधार्थियों ने इसे ट्रक, बस और अन्य सामान्य वाहनों के लिए भी किफायती बनाने का प्रयास किया है।

तीन स्तर पर चेतावनी देकर जगाता है ड्राइवर

‘सेफ डैश’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका तीन-स्तरीय सुरक्षा अलर्ट सिस्टम है। यदि ड्राइवर की एकाग्रता कम होती है, तो सबसे पहले डैशबोर्ड की स्क्रीन पर लाल रंग की चेतावनी दिखाई देती है। यह शुरुआती संकेत चालक को सतर्क करने के लिए होता है।

अगर स्थिति में सुधार नहीं होता, तो सिस्टम तेज आवाज में ‘वेक अप’ जैसी वॉयस कमांड जारी करता है। इसके बाद भी ड्राइवर की प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर तीसरा और सबसे प्रभावी चरण सक्रिय हो जाता है। इस चरण में स्टीयरिंग व्हील में लगाए गए वाइब्रेशन मोटर्स कंपन पैदा करते हैं, जिससे चालक तुरंत सतर्क हो जाता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मल्टी-लेयर अलर्ट सिस्टम गंभीर हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी मिलेगा फायदा

‘सेफ डैश’ केवल ड्राइवर की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह ट्रांसपोर्ट कंपनियों और वाहन मालिकों को भी उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराता है। सिस्टम ड्राइवर की थकान से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करता है और उसका विश्लेषण तैयार करता है।

प्रबंधन यह देख सकता है कि पिछले 24 घंटों में ड्राइवर कितनी बार थकान की स्थिति में पाया गया। यदि कोई चालक बार-बार लापरवाही करता है, तो सिस्टम स्वतः ईमेल के माध्यम से अलर्ट भेज सकता है। रेडिस तकनीक की मदद से यह डेटा ग्राफ और चार्ट के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है।

अब नाइट विजन तकनीक पर काम जारी

इस परियोजना से जुड़े शोधार्थी नवदीप सिंह, श्रियांश गुप्ता, वंश गोयल, तनिष्क गुप्ता, रोहन अग्रवाल, नवेद्या गोयल, ओजस मोरे और हिमांशी ने बताया कि सिस्टम को मजबूत ब्लैक एक्रिलिक केस में तैयार किया गया है, जिससे यह कठिन और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी सुरक्षित रह सके।

फिलहाल टीम इसे और उन्नत बनाने के लिए इंफ्रारेड (IR) कैमरा तकनीक पर काम कर रही है। इससे रात के समय या कम रोशनी वाले क्षेत्रों में भी ड्राइवर की गतिविधियों की सटीक निगरानी की जा सकेगी। शोधार्थियों ने इस नवाचार के पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर अपनाई जाती है, तो देश में थकान और नींद के कारण होने वाले सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

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