IIT मंडी के स्टाफ समेत कई लोगों से 10 करोड़ की ठगी: 10% रिटर्न का झांसा देकर निवेश कराया

IIT मंडी के स्टाफ समेत कई लोगों से 10 करोड़ की ठगी का आरोप है। 10 प्रतिशत रिटर्न का झांसा देकर रकम ली गई और आरोपी के नेपाल भागने की बात सामने आई।
IIT मंडी के स्टाफ समेत कई लोगों से 10 करोड़ की ठगी: 10% रिटर्न का झांसा देकर निवेश कराया
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हिमाचल प्रदेश के मंडी में निवेश पर मोटा रिटर्न देने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक शातिर ने आईआईटी मंडी के स्टाफ समेत कई लोगों को अपने जाल में फंसाया और करीब 10 करोड़ रुपये की रकम जुटा ली। लोगों को हर महीने 10 प्रतिशत तक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया गया था। शुरुआत में निवेशकों को विश्वास में लेने के लिए आकर्षक रिटर्न और नियमित भुगतान का लालच दिया गया। जब बड़ी संख्या में लोगों ने उस पर भरोसा कर अपनी रकम लगा दी तो आरोपी कथित तौर पर पैसे लेकर नेपाल भाग गया।

मामला सामने आने के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई आरोपी के बताए निवेश मॉडल में लगाई थी। सबसे ज्यादा चिंता उन निवेशकों को है, जिन्होंने मोटे रिटर्न के लालच में बड़ी रकम जमा कराई थी। बताया जा रहा है कि ठगी का नेटवर्क केवल एक या दो लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई लोगों से अलग-अलग समय पर पैसे लिए गए। इनमें आईआईटी मंडी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि कितने कर्मचारियों ने कितनी रकम निवेश की और कुल कितने पीड़ित हैं, इसका अंतिम आंकड़ा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि उसके पास ऐसा निवेश मॉडल है, जिससे सामान्य बैंक या दूसरे सुरक्षित निवेश माध्यमों की तुलना में कई गुना ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। हर महीने करीब 10 प्रतिशत रिटर्न का दावा निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना। सामान्य निवेश योजनाओं में मिलने वाले रिटर्न की तुलना में इतनी अधिक निश्चित कमाई का वादा अपने आप में बड़ा लालच था। इसी भरोसे के कारण कई लोगों ने पहले छोटी रकम लगाई और जब शुरुआती स्तर पर भरोसा बना तो निवेश की राशि बढ़ाते चले गए।

ऐसे मामलों में ठगी करने वाले अक्सर शुरुआत में निवेशकों को कुछ रकम वापस देकर उनका भरोसा जीतते हैं। इसके बाद लोग अपने परिचितों, दोस्तों और सहकर्मियों को भी योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। अगर इस मामले में भी इसी तरह का तरीका इस्तेमाल हुआ है तो पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि शुरुआत में किन लोगों को भुगतान किया गया और बाद में उनसे किन लोगों को जोड़ने के लिए कहा गया।

आईआईटी मंडी के स्टाफ का नाम सामने आने के कारण यह मामला और गंभीर हो गया है। शिक्षण संस्थान से जुड़े कर्मचारियों के बीच यदि आरोपी ने भरोसा बनाया था तो संभव है कि एक व्यक्ति के माध्यम से दूसरे लोगों तक उसकी पहुंच हुई हो। हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि आरोपी की आईआईटी मंडी के कर्मचारियों से पहचान किस माध्यम से हुई थी और क्या उसने संस्थान या किसी कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल अपने निवेश दावे को विश्वसनीय दिखाने के लिए किया।

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि करीब 10 करोड़ रुपये की रकम आखिर कहां गई। यदि पुलिस शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ती है तो बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, नकद लेनदेन, संपत्ति खरीद, दूसरे लोगों के खातों में भेजी गई रकम और विदेश या नेपाल से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जा सकती है। डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी आरोपी तक पहुंचने में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकती है।

आरोपी के नेपाल भागने की बात भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर पुलिस के पास आरोपी के नेपाल जाने की पुष्टि होती है तो उसके यात्रा रिकॉर्ड, पासपोर्ट या अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों और सीमा पार आवाजाही की जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या आरोपी पहले से नेपाल में किसी व्यक्ति के संपर्क में था या ठगी की रकम को वहां पहुंचाने की कोई तैयारी पहले से की गई थी।

मामले में पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपी ने लोगों को निवेश के नाम पर कौन-कौन से दस्तावेज दिखाए थे। क्या उसने कोई कंपनी, फर्म, निवेश संस्था या कारोबार चलाने का दावा किया था? क्या निवेशकों को रसीद, एग्रीमेंट या किसी तरह का प्रमाण दिया गया था? अगर दस्तावेज दिए गए थे तो उनमें दर्ज कंपनी या संस्था की वास्तविक स्थिति क्या थी, यह भी जांच का हिस्सा होगा।

दस प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। निवेश के क्षेत्र में बहुत अधिक और निश्चित रिटर्न का दावा अक्सर लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन किसी भी योजना में निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी होता है कि पैसा किस कारोबार में लगाया जा रहा है, कंपनी का कानूनी पंजीकरण क्या है, निवेश की निगरानी कौन करता है और रिटर्न का स्रोत क्या है। यदि इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते हैं तो निवेशकों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाता है।

आरोप है कि आरोपी ने इसी आकर्षक रिटर्न को आधार बनाकर लोगों को लगातार निवेश के लिए तैयार किया। शुरुआती दौर में यदि किसी निवेशक को पैसा मिला होगा तो उसके बाद उसके भरोसे में और वृद्धि होना स्वाभाविक है। यही भरोसा बाद में बड़ी रकम जुटाने का माध्यम बन सकता है। पुलिस जांच में यदि इस तरह का पैटर्न सामने आता है तो ठगी की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती भी होगी कि 10 करोड़ रुपये की रकम वास्तव में एक ही व्यक्ति ने जुटाई या उसके साथ कुछ अन्य लोग भी काम कर रहे थे। बड़े स्तर की वित्तीय ठगी में कई बार रकम अलग-अलग बैंक खातों या व्यक्तियों के जरिए इधर-उधर की जाती है। यदि इस मामले में भी ऐसा हुआ है तो बैंकिंग ट्रेल के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।

पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने जिस रकम को निवेश समझकर दिया था, उसे वापस पाना अब मुश्किल दिखाई दे रहा है। कई लोगों ने संभवतः अपनी बचत, जमा पूंजी या दूसरी जरूरतों के लिए रखी रकम को अधिक रिटर्न के लालच में लगाया होगा। यदि रकम बड़ी है तो इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। ऐसे में पीड़ितों की शिकायत, बैंक रिकॉर्ड और आरोपी के साथ हुई बातचीत जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है।

इस तरह के मामलों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया चैट भी अहम भूमिका निभाते हैं। आरोपी ने यदि व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या किसी अन्य माध्यम से निवेशकों को रिटर्न, भुगतान और निवेश संबंधी जानकारी भेजी थी तो पुलिस उन डिजिटल रिकॉर्ड को जांच में शामिल कर सकती है। कॉल रिकॉर्ड और चैट से यह भी पता चल सकता है कि आरोपी ने किस-किस व्यक्ति से संपर्क किया और किस तरह लोगों को निवेश के लिए तैयार किया।

यदि आरोपी वास्तव में नेपाल पहुंच चुका है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए भारतीय एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा होने के कारण किसी व्यक्ति की आवाजाही का पता लगाना कई परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए आरोपी के मोबाइल लोकेशन, बैंकिंग गतिविधियों और संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

मामले में यह भी जांच जरूरी होगी कि आरोपी ने नेपाल जाने से पहले अपनी संपत्ति या बैंक खातों से कोई रकम निकाली थी या नहीं। यदि उसने अचानक बड़ी मात्रा में नकद निकाला, दूसरे खातों में पैसा ट्रांसफर किया या संपत्ति से जुड़े लेनदेन किए तो यह जानकारी जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। इसी तरह परिवार या करीबी लोगों के खातों में भेजी गई रकम की भी जांच की जा सकती है।

पीड़ितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अक्सर निवेश संबंधी ठगी का मामला तब सामने आता है जब आरोपी भुगतान करना बंद कर देता है। शुरुआत में केवल कुछ लोग शिकायत करते हैं, लेकिन बाद में दूसरे निवेशक भी सामने आते हैं और कुल ठगी की रकम तथा पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए पुलिस के सामने आने वाले नए शिकायतकर्ताओं के आधार पर मामले का दायरा और बड़ा हो सकता है।

आईआईटी मंडी से जुड़े कर्मचारियों के नाम आने के कारण संस्थान स्तर पर भी यह देखना जरूरी होगा कि आरोपी की लोगों तक पहुंच कैसे बनी। आईआईटी मंडी एक तकनीकी शिक्षण संस्थान है और उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर संस्थान से जुड़े शोध और परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। हालांकि किसी संस्थान के कर्मचारी का व्यक्तिगत निवेश किसी संस्था की आधिकारिक गतिविधि नहीं माना जा सकता, जब तक इसके विपरीत कोई आधिकारिक जानकारी सामने न आए।

इस मामले में निवेशकों को भी अब अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराने की जरूरत होगी। आरोपी के साथ हुई बातचीत, बैंक ट्रांसफर की रसीद, चेक, भुगतान की जानकारी, निवेश से जुड़े एग्रीमेंट, रिटर्न का रिकॉर्ड और आरोपी द्वारा दिए गए किसी भी दस्तावेज को सुरक्षित रखना जांच में मदद कर सकता है। खासकर ऑनलाइन भुगतान से जुड़ी जानकारी से रकम के अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में पुलिस को सुराग मिल सकता है।

पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित ठगी की रकम किस अवधि में जमा की गई। यदि कई वर्षों में धीरे-धीरे रकम जुटाई गई तो आरोपी के नेटवर्क और गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है। वहीं यदि कुछ ही महीनों में करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए तो इससे यह संकेत मिल सकता है कि आरोपी पहले से किसी संगठित योजना के साथ काम कर रहा था। हालांकि वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आएगी।

10 प्रतिशत रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं में निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि अधिक रिटर्न के साथ अधिक जोखिम भी जुड़ा होता है। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारोबारी मॉडल, नियामकीय जानकारी या लिखित समझौते के बहुत अधिक निश्चित रिटर्न देने का दावा करता है तो निवेश करने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूरी है। इस मामले में भी यदि आरोपी ने इसी तरह के वादे किए थे तो पुलिस उनके आधार और वास्तविकता की जांच करेगी।

ठगी का मामला सामने आने के बाद अब आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ कथित रूप से ठगी गई रकम की बरामदगी भी महत्वपूर्ण होगी। यदि पुलिस आरोपी तक पहुंचती है तो पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कितने लोगों से रकम ली गई, पैसा कहां लगाया गया, किन खातों में भेजा गया और नेपाल जाने की वजह क्या थी। इसके साथ ही यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों की है, जिन्होंने 10 प्रतिशत रिटर्न के भरोसे अपनी रकम लगाई थी। आईआईटी मंडी के स्टाफ समेत कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप ने निवेश के नाम पर चलने वाले ऐसे नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी रकम की ठगी हुई, कितने लोग पीड़ित हैं, आरोपी ने किस तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाया और नेपाल भागने के पीछे उसकी पूरी योजना क्या थी।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड, निवेश से जुड़े दस्तावेज और आरोपी के संपर्कों की पड़ताल अहम होगी। यदि जांच एजेंसियां पैसों की पूरी ट्रेल का पता लगाने में सफल होती हैं तो कथित ठगी के नेटवर्क और रकम की बरामदगी दोनों में मदद मिल सकती है। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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