भारत NavIC नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लॉन्च करेगा 3–4 नए नेविगेशन सैटेलाइट, स्वदेशी GPS प्रणाली को मिलेगा नया सहारा

NavIC Satellite News: भारत अपनी स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को और मजबूत बनाने के लिए 3–4 नए नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है। इससे GPS पर

केंद्र सरकार ने देश की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NaVIC को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। केंद्रीय अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है।

टेक न्यूज़: भारत अपनी क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NavIC (Navigation with Indian Constellation) को मजबूत करने के लिए आने वाले समय में लगातार तीन से चार नए नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब NavIC नेटवर्क को संचालित करने वाले कई पुराने उपग्रहों की एटॉमिक क्लॉक काम करना बंद कर चुकी हैं, जिससे प्रणाली की क्षमता प्रभावित हुई है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि NVS-03 उपग्रह लॉन्च के लिए तैयार है। इसके बाद NVS-04 और NVS-05 को भी अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके अलावा, सात-सैटेलाइट वाले NavIC बेस कॉन्स्टेलेशन को पूरा करने के लिए एक और उपग्रह लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

NavIC के लिए क्यों जरूरी हैं नए सैटेलाइट?

NavIC भारत की स्वदेशी सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन प्रणाली है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने विकसित किया है। यह प्रणाली भारत और उसके आसपास के लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक पोजिशनिंग, नेविगेशन और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, NavIC को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कम से कम चार ऐसे उपग्रहों की आवश्यकता होती है जिनमें कार्यशील एटॉमिक क्लॉक लगी हों। 

एटॉमिक क्लॉक किसी भी नेविगेशन सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, क्योंकि उसी के आधार पर उपयोगकर्ताओं की सटीक लोकेशन निर्धारित की जाती है। वर्तमान में केवल IRNSS-1B, IRNSS-1L और NVS-01 ही ऐसी स्थिति में हैं कि वे नेविगेशन सेवाएं प्रदान कर सकें। इससे NavIC की स्वतंत्र पोजिशनिंग क्षमता सीमित हो गई है और प्रणाली को अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ रही है।

मार्च 2026 में बढ़ी चुनौती

मार्च 2026 में IRNSS-1F उपग्रह पर मौजूद अंतिम कार्यशील एटॉमिक क्लॉक ने भी काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद NavIC नेटवर्क की परिचालन क्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ा। हालांकि प्रणाली पूरी तरह बंद नहीं हुई, लेकिन स्वतंत्र और पूर्ण नेविगेशन सेवाएं देने की उसकी क्षमता कमजोर हो गई। NavIC की पहली पीढ़ी के उपग्रह 2013 से 2018 के बीच लॉन्च किए गए थे। 

समय के साथ इनमें लगी कई एटॉमिक क्लॉक्स में तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिससे पूरे नेटवर्क की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। यही कारण है कि ISRO ने दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों की NVS श्रृंखला विकसित की।

NVS श्रृंखला से मिलेगी नई ताकत

NVS श्रृंखला को NavIC की अगली पीढ़ी के रूप में विकसित किया गया है। इन उपग्रहों में बेहतर तकनीक, अधिक विश्वसनीय एटॉमिक क्लॉक और लंबी परिचालन क्षमता शामिल की गई है। ISRO ने वर्ष 2023 में NVS-01 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। हालांकि 2025 में NVS-02 मिशन को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके कारण वह अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर सका। इस घटना के बाद ISRO ने मिशन की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक तकनीकी सुधार किए।

सरकार के अनुसार, NVS-02 से मिली सीख को ध्यान में रखते हुए NVS-03 को लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है। इसके बाद NVS-04 और NVS-05 को भी चरणबद्ध तरीके से प्रक्षेपित किया जाएगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा भारत का भरोसा

NavIC को अक्सर भारत के स्वदेशी GPS विकल्प के रूप में देखा जाता है। वर्तमान में दुनिया के प्रमुख नेविगेशन नेटवर्क में अमेरिका का GPS, रूस का GLONASS, यूरोप का Galileo और चीन का BeiDou शामिल हैं। भारत भी अपनी स्वतंत्र नेविगेशन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार निवेश कर रहा है।

नए उपग्रहों के लॉन्च से न केवल NavIC की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि रक्षा, परिवहन, समुद्री संचालन, आपदा प्रबंधन, स्मार्टफोन नेविगेशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

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