इंडोनेशिया में जंगल की आग से 1.07 लाख हेक्टेयर जमीन जली, मलेशिया तक पहुंचा धुएं का असर 

इंडोनेशिया में जंगल की भीषण आग से 1.07 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित है। धुआं मलेशिया तक पहुंचा, कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता अस्वस्थ स्तर पर।

इंडोनेशिया में जंगल की भीषण आग से 1.07 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है। आग बुझाने के लिए क्लाउड सीडिंग विमानों की मदद ली जा रही है। धुएं का असर मलेशिया तक पहुंचा है, जहां कई इलाकों में वायु गुणवत्ता अस्वस्थ है।

जकार्ता: इंडोनेशिया में जंगलों और जमीन पर लगी भीषण आग ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। देशभर में अब तक 1.07 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है। आग पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है और कुछ क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश कराने वाले विमानों की मदद ली जा रही है। आग से उठने वाला घना धुआं अब इंडोनेशिया की सीमाओं से बाहर भी फैल रहा है। पड़ोसी देश मलेशिया के कुछ हिस्सों में भी धुंध की मोटी परत छा गई है। सरवाक राज्य के सेरियन कस्बे में बुधवार सुबह वायु प्रदूषण सूचकांक 195 तक पहुंच गया, जिसे अस्वस्थ स्तर माना जाता है।

1.07 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित

इंडोनेशिया के अलग-अलग हिस्सों में जंगल और जमीन की आग तेजी से फैल रही है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आग को आबादी वाले क्षेत्रों और संवेदनशील प्राकृतिक इलाकों तक पहुंचने से रोकना है। देश के कम से कम छह प्रांतों को आग से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

स्थानीय प्रशासन और दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने में जुटे हैं। कई स्थानों पर जमीन बेहद सूखी होने के कारण आग को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। कुछ इलाकों में आग आवासीय क्षेत्रों के करीब तक पहुंच गई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। पश्चिम कालीमंतन के पोंटियानक शहर में भी धुएं का असर स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। शहर के मेयर एडी रुसी कमांतो ने बताया कि खासकर रात और सुबह के समय धुंध का प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है।

स्कूलों पर भी पड़ा असर

जंगल की आग से निकलने वाले धुएं और खराब होती वायु गुणवत्ता का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। प्रभावित प्रांतों में कुछ स्कूलों ने लगातार तीन दिनों तक कक्षाएं निलंबित कर दी हैं। पोंटियानक में प्रशासन ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने का निर्देश दिया है। मेयर के मुताबिक, जब तक आग और धुएं की स्थिति बनी रहती है, तब तक छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखी जाएंगी। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को प्रदूषित हवा में बाहर निकलने से बचाना है। लगातार धुएं के संपर्क में आने से सांस संबंधी परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

‘गॉडजिला’ अल नीनो से बढ़ी चुनौती

दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्से इस वर्ष सामान्य से अधिक गर्म और शुष्क मौसम का सामना कर रहे हैं। इंडोनेशिया में आग फैलने के पीछे लंबे समय तक जारी गर्मी और सूखे को एक प्रमुख कारक माना जा रहा है। क्षेत्र में अधिक तीव्र अल नीनो जलवायु घटना का प्रभाव भी देखा जा रहा है। इसकी तीव्रता को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ और पर्यवेक्षक इसे अनौपचारिक रूप से ‘गॉडजिला’ अल नीनो भी कह रहे हैं।

गर्म और शुष्क परिस्थितियों में जंगल तथा जमीन पर मौजूद सूखी वनस्पति आसानी से आग पकड़ लेती है। इसके बाद तेज हवाओं के कारण आग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलने में ज्यादा समय नहीं लगता। यही कारण है कि दमकल और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

आग बुझाने के लिए क्लाउड सीडिंग का सहारा

इंडोनेशियाई अधिकारियों ने आग पर नियंत्रण पाने के लिए क्लाउड सीडिंग विमानों को भी अभियान में शामिल किया है। इसका उद्देश्य ऐसे बादलों को सक्रिय करना है, जिनसे बारिश कराई जा सके और आग प्रभावित क्षेत्रों में नमी बढ़ाई जा सके। हालांकि, क्लाउड सीडिंग मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है और यह आग बुझाने का अकेला समाधान नहीं है। जमीन पर दमकलकर्मियों और आपदा प्रबंधन टीमों की कार्रवाई भी लगातार जारी है।

कुछ प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता सामने आई है। आग के करीब रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि दमकल अभियान के लिए पानी की कमी बढ़ती जा रही है। इससे आग पर तेजी से नियंत्रण पाने की चुनौती और गंभीर हो गई है।

माउंट ब्रोमो नेशनल पार्क भी आग की चपेट में

पूर्वी जावा स्थित माउंट ब्रोमो नेशनल पार्क में भी करीब एक सप्ताह तक आग लगी रही। इस आग से पार्क का लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने सोमवार को आग पर नियंत्रण पाने की घोषणा की, लेकिन इसके बाद भी इलाके में नए हॉटस्पॉट सामने आने की चेतावनी जारी की गई। माउंट ब्रोमो एक सक्रिय ज्वालामुखी होने के साथ इंडोनेशिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। आग के खतरे को देखते हुए इसे 8 अगस्त से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के आधिकारिक कारण की जांच अभी जारी है। हालांकि, शुरुआती स्तर पर लापरवाही की आशंका जताई गई है। स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख गैटोट सुब्रोतो के अनुसार, किसी व्यक्ति ने आग जलाई थी और बाद में उसे बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पूरी तरह नहीं बुझी थी।

मलेशिया तक पहुंचा धुएं का असर

इंडोनेशिया की जंगल की आग से निकलने वाला धुआं पड़ोसी मलेशिया तक पहुंच गया है। सरवाक राज्य के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई है। सेरियन कस्बे में बुधवार सुबह एयर पॉल्यूटेंट इंडेक्स यानी API 195 तक पहुंच गया। 101 से 200 के बीच का API स्तर ‘अस्वस्थ’ माना जाता है। 201 से 300 के बीच की रीडिंग को ‘बहुत अस्वस्थ’ और 301 से ऊपर को ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है।

मलेशियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तक सरवाक के कम से कम नौ इलाकों में API का स्तर अस्वस्थ श्रेणी में दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि इंडोनेशिया की आग का पर्यावरणीय असर सीमापार भी दिखाई देने लगा है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता

धुएं और धुंध के बढ़ते स्तर ने स्थानीय प्रशासन के सामने स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी खड़ी कर दी है। हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा जंगल की आग जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है। बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र के जलने से पेड़-पौधों के साथ-साथ उन पर निर्भर जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है। माउंट ब्रोमो जैसे संरक्षित और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों में आग लगने से पर्यावरणीय नुकसान के साथ स्थानीय पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

इंडोनेशिया में मौजूदा आग ने एक बार फिर जंगलों की सुरक्षा, सूखे मौसम की तैयारी और सीमा पार वायु प्रदूषण की समस्या को सामने ला दिया है। अधिकारियों के लिए तत्काल प्राथमिकता आग को नियंत्रित करना और आबादी वाले इलाकों तक इसके फैलाव को रोकना है। क्लाउड सीडिंग, दमकल अभियान और स्थानीय स्तर पर निगरानी के जरिए आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही नए हॉटस्पॉट की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल इंडोनेशिया में आग और धुएं की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि मलेशिया में भी वायु गुणवत्ता को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। लंबे समय तक जारी गर्म और शुष्क मौसम के बीच आने वाले दिनों में आग के नए केंद्र उभरने की आशंका को देखते हुए अधिकारियों के सामने चुनौती बनी हुई है।

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