यूक्रेन ने ऑपरेशन विवाल्डी में विस्फोटक लदे जमीनी रोबोट और ड्रोन इस्तेमाल करने का दावा किया है। थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, रोबोटिक सिस्टम ने 15,700 से अधिक मिशन किए और डोनेट्स्क में कई इलाकों में अभियान चलाया।
कीव: यूक्रेन ने रूस के साथ जारी युद्ध में मानवरहित ग्राउंड रोबोट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का दावा किया है। यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के दौरान ड्रोन और जमीनी रोबोटों का इस्तेमाल कर रूसी सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए और डोनेट्स्क क्षेत्र में कई इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया गया। हालांकि, रूसी सैनिकों के हताहत होने और क्षेत्रीय बढ़त से जुड़े यूक्रेनी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऑपरेशन विवाल्डी में रोबोटों का इस्तेमाल
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने बताया कि ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ मई में शुरू हुआ था और सितंबर के अंतिम सप्ताह में इसका एक चरण पूरा हुआ। यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, इस अभियान के दौरान ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम ने 15,700 से अधिक मिशन पूरे किए। यूक्रेन ने इसे युद्ध के मैदान में मानवरहित तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। इससे पहले भी यूक्रेनी सेना ने ऑपरेशन विवाल्डी के तहत ड्रोन और ग्राउंड रोबोटों के इस्तेमाल की जानकारी सार्वजनिक की थी। सितंबर में यूक्रेन ने कहा था कि उसके सैनिकों ने उत्तरी डोनेट्स्क में रूसी सैन्य दबाव के खिलाफ अभियान चलाया है।
यूक्रेन की सेना के अनुसार, भारी ड्रोन की मदद से जमीनी रोबोटों को रूसी पोजीशन के पीछे पहुंचाया गया। इसके बाद इन मानवरहित वाहनों का इस्तेमाल हमला करने, रास्ते साफ करने और अन्य सैन्य कार्यों में किया गया।
ड्रोन से जमीन पर उतारे गए रोबोट
इस अभियान की खासियत यह बताई गई कि बड़े ड्रोन जमीनी रोबोटों को हवा के रास्ते रूसी नियंत्रण वाले इलाकों के भीतर ले गए। यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, कुछ रोबोटों को रूसी सेना की अग्रिम पंक्ति से कई किलोमीटर पीछे तक पहुंचाया गया।
इनमें पहियों वाले मानवरहित ग्राउंड वाहन (UGV) शामिल थे। कुछ वाहनों को विस्फोटक हमलों के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि अन्य का उपयोग खदानों की सफाई, रसद और सैनिकों के लिए रास्ता तैयार करने जैसे कार्यों में किया गया।
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने इसे दुश्मन की अग्रिम पंक्ति के पीछे जमीनी रोबोट पहुंचाने की पहली ऐसी कार्रवाई बताया है।
रोबोटों के जरिए सैनिकों का जोखिम कम करने की कोशिश
युद्ध के मैदान में ग्राउंड रोबोटों के इस्तेमाल का एक प्रमुख उद्देश्य सैनिकों को सीधे खतरे वाले क्षेत्रों में भेजने की जरूरत कम करना है।
यूक्रेन की सेना के अनुसार, मानवरहित वाहन खतरनाक इलाकों में पहले भेजे जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल खदानों की सफाई, टोही, हमले में सहायता और रसद पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
यूक्रेनी सेना ने बताया कि शांद्रिगोलोव क्षेत्र में UGV ने करीब 30 किलोमीटर के रास्ते साफ किए। सेना के अनुसार, यह काम रोबोटों ने दो रात में पूरा किया, जबकि पारंपरिक इंजीनियरिंग इकाइयों को इसके लिए लगभग एक सप्ताह लग सकता था। यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि इस काम के दौरान किसी सैपर की मौत या चोट नहीं हुई।
विस्फोटक रोबोट कैसे काम करते हैं?
विस्फोटक लदे जमीनी रोबोट छोटे मानवरहित वाहन होते हैं जिन्हें आमतौर पर दूर बैठे ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं। इन पर कैमरे और दूसरे सेंसर लगाए जा सकते हैं, जिससे ऑपरेटर वाहन की गतिविधि और आसपास के क्षेत्र को देख सकता है।
कुछ रोबोटों को हथियार या विस्फोटक ले जाने के लिए डिजाइन किया जाता है। ऐसे सिस्टम लक्ष्य के नजदीक पहुंचकर हमला कर सकते हैं। इस तरह सैनिकों को सीधे उस क्षेत्र में जाने से बचाने की कोशिश की जाती है जहां गोलीबारी, बारूदी सुरंग या अन्य खतरे मौजूद हों।
हालांकि, इन प्रणालियों को पूरी तरह स्वायत्त मानना सही नहीं होगा। मिशन की योजना, निगरानी और कई मामलों में लक्ष्य पर कार्रवाई का निर्णय अभी भी मानव ऑपरेटरों और सैन्य कमांड की भूमिका पर निर्भर करता है।
रॉयटर्स ने सितंबर में रिपोर्ट किया था कि यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के पास चार पहियों वाले ‘Hyena’ जैसे मानवरहित वाहन हैं, जिन्हें रूसी ठिकानों की ओर भेजने और विस्फोटक हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
3,000 रूसी सैनिकों को नुकसान पहुंचाने का यूक्रेनी दावा
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने दावा किया है कि ऑपरेशन विवाल्डी में रोबोट और ड्रोन आधारित अभियानों से करीब 3,000 रूसी सैनिक मारे गए या हताहत हुए। विभिन्न रिपोर्टों में इस आंकड़े को रूसी सेना के नुकसान के रूप में बताया गया है।
हालांकि, युद्ध के दौरान किसी एक पक्ष द्वारा बताए गए सैनिकों के हताहत होने के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अक्सर मुश्किल होती है। इसलिए 3,000 के आंकड़े को यूक्रेनी सैन्य दावा ही माना जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या।

यूक्रेन ने इसी अभियान के दौरान डोनेट्स्क क्षेत्र में कई बस्तियों पर नियंत्रण वापस लेने की भी जानकारी दी है। सितंबर के मध्य में रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने क्षेत्र में रूसी घुसपैठ को रोकने और कुछ इलाकों को वापस लेने का दावा किया था।
‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ की दिशा में यूक्रेन
यूक्रेन अब सिर्फ मौजूदा जमीनी रोबोटों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहना चाहता। पूर्व यूक्रेनी रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर को ‘Army of Robots’ नाम की नई पहल शुरू करने की घोषणा की।
फेदोरोव के अनुसार, यह किसी एक कंपनी की परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक डिफेंस-टेक इकोसिस्टम होगा। इसका उद्देश्य युद्ध के मैदान में रोबोटिक तकनीक के विकास और इस्तेमाल को तेज करना है।
इस पहल में मानवरहित जमीनी वाहन, ड्रोन और अन्य रोबोटिक प्रणालियों के साथ मानव जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित करने पर भी जोर है।
फेदोरोव ने बताया कि ऐसे रोबोट भविष्य में मशीनगन में गोलियां भरने, बैटरी बदलने या सेंसर लगाने जैसे अपेक्षाकृत सरल काम कर सकते हैं। उनका तर्क है कि जोखिम वाले काम मशीनों को सौंपने से सैनिकों की जान बचाई जा सकती है।
युद्ध के मैदान में बदल रही तकनीक
रूस-यूक्रेन युद्ध ने ड्रोन तकनीक के साथ-साथ ग्राउंड रोबोटिक्स के इस्तेमाल को भी तेज किया है। यूक्रेन में ड्रोन पहले से ही निगरानी, हमले और रसद के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं।
अब इन्हीं तकनीकों को जमीन पर चलने वाले मानवरहित वाहनों के साथ जोड़ा जा रहा है। भारी ड्रोन रोबोटों को कठिन इलाकों तक पहुंचा सकते हैं, जबकि ग्राउंड सिस्टम जमीन पर खतरनाक कार्य कर सकते हैं।
यूक्रेन की सेना का कहना है कि इसका उद्देश्य सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाना है। विशेषज्ञ विश्लेषणों में भी युद्ध को आधुनिक सैन्य तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण क्षेत्र बताया गया है, जहां कम लागत वाले ड्रोन और रोबोट पारंपरिक सैन्य प्रणालियों के साथ तेजी से जुड़ रहे हैं।
रूस और अन्य देशों में भी विकसित हो रही रोबोटिक तकनीक
यूक्रेन अकेला देश नहीं है जो युद्ध में मानवरहित जमीनी वाहनों की क्षमता बढ़ा रहा है। रूस सहित कई देश ऐसे सिस्टम विकसित कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल रसद, निगरानी, खदानों से निपटने और युद्धक भूमिकाओं में किया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्ष पहले से बड़ी संख्या में ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं। अब जमीनी रोबोटों को भी इसी व्यापक मानवरहित युद्ध प्रणाली का हिस्सा बनाया जा रहा है।
भारत समेत अन्य देशों में भी मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और रोबोटिक सैन्य तकनीक पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य सैनिकों को ऐसे कार्यों से दूर रखना है जिनमें सीधे जीवन का खतरा होता है।
युद्ध में रोबोट की बढ़ती भूमिका
यूक्रेन के ऑपरेशन विवाल्डी से यह संकेत मिलता है कि आधुनिक युद्ध में मानव सैनिकों के साथ मशीनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ड्रोन से रोबोटों को युद्ध क्षेत्र तक पहुंचाने और वहां से जमीनी मिशन संचालित करने की क्षमता युद्धक रणनीति में नया आयाम जोड़ती है।
हालांकि, इस तकनीक के वास्तविक प्रभाव का आकलन केवल सैन्य दावों के आधार पर करना मुश्किल है। ऑपरेशन विवाल्डी से जुड़े यूक्रेनी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मानवरहित प्रणालियां रूस-यूक्रेन युद्ध में तेजी से महत्वपूर्ण हो रही हैं।










