यमन के ताइज प्रांत में बाजार पर हुए हवाई हमले में 7 लोगों की मौत और 40 घायल हुए हैं। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों के भी हताहत होने की बात कही। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हालिया संघर्ष में 674 मौतें और 1.22 लाख से अधिक विस्थापन दर्ज हुए।
सना: यमन में संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। रविवार को ताइज प्रांत के एक बाजार पर हुए हवाई हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत और 40 लोगों के घायल होने की खबर है। हूती-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मृतकों और घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, हमले के लक्ष्य को लेकर पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का कहना है कि उसके बलों ने बाजार के पास मौजूद हूती सैन्य ठिकाने और वाहनों को निशाना बनाया था।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यमन में हाल के हफ्तों में संघर्ष फिर तेज हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के मुताबिक, अगस्त से सितंबर के बीच संघर्ष में 674 मौतें और 2,998 घायल दर्ज किए गए हैं। इस दौरान 1.22 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
ताइज के बाजार में दुकानों को बनाया गया निशाना
रिपोर्टों के मुताबिक, हवाई हमला ताइज प्रांत के माविया जंक्शन स्थित एक बाजार में हुआ। हमले में बाजार की कई दुकानों को नुकसान पहुंचा।
हूती-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि हमले में सात लोगों की मौत हुई और 40 अन्य घायल हुए। मंत्रालय के अनुसार, मृतकों और घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। स्वतंत्र रूप से सभी हताहतों की पहचान और संख्या की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि हमले का निशाना हूती सैन्य शिविर और वहां मौजूद वाहन थे। सरकार के सूत्रों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने हाल में बाजार के पास एक सैन्य ठिकाना बनाया था। इस तरह हमले को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है और नागरिक क्षेत्र पर हमले की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
दो महीने में संघर्ष ने बढ़ाई मानवीय चिंता
यमन में हालिया सैन्य अभियान ने पहले से गंभीर मानवीय संकट को और बढ़ा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 6 अगस्त से 18 सितंबर के बीच संघर्ष से संबंधित 3,672 लोग हताहत हुए, जिनमें 674 लोगों की मौत और 2,998 लोग घायल हुए। इसी अवधि में आठ प्रांतों में 1,22,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए। ताइज और पश्चिमी तटीय इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि बढ़ती हिंसा के कारण नागरिकों पर दबाव बढ़ रहा है। राहत एजेंसियों के लिए कई इलाकों तक पहुंच मुश्किल हो गई है और सड़कें तथा परिवहन मार्ग प्रभावित हुए हैं।
सितंबर में हजारों परिवारों ने छोड़े घर
संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसी (IOM) के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से ही बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है। 13 सितंबर तक 82,164 लोग सितंबर में ही विस्थापित हो चुके थे और कुल आंतरिक विस्थापन 85,818 तक पहुंच गया था।
बाद की UN रिपोर्टों में विस्थापन का आंकड़ा और बढ़ा है। 24 सितंबर को WHO ने बताया कि हालिया संघर्ष में आठ प्रांतों से 1.22 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इसका मतलब है कि अलग-अलग तारीखों और आकलन पद्धतियों के कारण विस्थापन के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।
यमन में 2014 से जारी है गृहयुद्ध
यमन का गृहयुद्ध 2014 में तब तेज हुआ जब हूती आंदोलन ने राजधानी सना समेत बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष बढ़ता गया।
सऊदी अरब ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य गठबंधन का नेतृत्व किया। लंबे संघर्ष के बाद अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था। हालांकि, व्यापक राजनीतिक समझौता नहीं हो सका और हाल के महीनों में हिंसा फिर बढ़ गई है।

मौजूदा संघर्ष में ताइज, लहज, मारिब और पश्चिमी तटीय इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने की अपील की है।
हूतियों का सऊदी अरब पर भी हमला
यमन सरकार की सेना ने दावा किया है कि हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने रियाद की ओर दो ड्रोन दागे, जिन्हें सऊदी एयर डिफेंस ने रोक दिया। इसके अलावा दक्षिणी सऊदी क्षेत्र खमिस मुशैत की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने का भी दावा किया गया है।
हाल के महीनों में रियाद के अलावा अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू जैसे क्षेत्रों को लेकर भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। सऊदी अरब यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, इसलिए हूती-सऊदी टकराव यमन के युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
बाब अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा
यमन का रणनीतिक महत्व केवल उसके घरेलू संघर्ष तक सीमित नहीं है। देश के पश्चिम में स्थित बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
हूतियों की लाल सागर और इसके आसपास सैन्य गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को लेकर चिंता बढ़ी है। हालिया घटनाक्रम में हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तटवर्ती इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। Reuters के अनुसार, हूती बलों ने यमन के पश्चिमी तट पर बढ़त बनाई है और रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण मजबूत किया है।
रूस और सऊदी अरब के नेताओं ने भी हाल में बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन के महत्व पर जोर दिया था।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
बाब अल-मंदेब से गुजरने वाला समुद्री मार्ग यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक सुरक्षा संकट रहने पर जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे यात्रा का समय और परिवहन लागत बढ़ सकती है।
यमन में बढ़ती हिंसा के कारण सऊदी अरब की ऊर्जा अवसंरचना और समुद्री व्यापार को लेकर भी क्षेत्रीय चिंताएं बढ़ी हैं। Reuters के अनुसार, हालिया हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण सऊदी अरब ने तेल परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्गों के इस्तेमाल पर भी ध्यान बढ़ाया है।
मानवीय संकट के बीच राहत अभियान प्रभावित
यमन में हिंसा बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। WHO के मुताबिक, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को घायल लोगों की बढ़ती संख्या के बीच सीमित संसाधनों के साथ काम करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि कई प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें बाधित हैं और असुरक्षा के कारण मानवीय सहायता पहुंचाना कठिन हो रहा है। विस्थापित परिवारों को भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की तत्काल जरूरत है।
आगे और बढ़ सकती है चुनौती
ताइज में बाजार पर हुआ हमला यमन में संघर्ष के नए दौर की गंभीरता को दिखाता है। एक तरफ हूती बल रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेनाएं जवाबी अभियान चला रही हैं।
नागरिकों की मौत, बड़े पैमाने पर विस्थापन और बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता ने यमन के संकट को घरेलू युद्ध से आगे क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व का मुद्दा बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र लगातार संघर्षरत पक्षों से तनाव कम करने और राजनीतिक समाधान की दिशा में लौटने की अपील कर रहा है।











