IPS अपूर्वा वर्मा की कहानी: लगातार प्रयासों के बाद UPSC में मिली 42वीं रैंक

एसीपी अपूर्वा वर्मा ने यूपीएससी 2025 में 42वीं रैंक हासिल की। उनके अनुभव, परिवार और आत्मविश्वास ने उन्हें सफलता दिलाई।

एसीपी अपूर्वा वर्मा ने यूपीएससी 2025 में 42वीं रैंक हासिल कर यह साबित किया कि लगातार प्रयास और आत्मविश्वास से बड़ी उपलब्धि संभव है। पहले आईपीएस अधिकारी रह चुकी अपूर्वा ने अपने अनुभव, परिवार और पति के समर्थन से अपनी मानसिक मजबूती बढ़ाई। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, लक्ष्य निर्धारण और आंतरिक शक्ति पर भरोसा करने की प्रेरणा दी।

Success Story: एसीपी अपूर्वा वर्मा ने यूपीएससी 2025 परीक्षा में 42वीं रैंक हासिल कर यह साबित किया कि निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी हैं। पटना से पढ़ाई करने वाली अपूर्वा ने एनआईटी मणिपुर से इंजीनियरिंग पूरी की और आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवा देने के बावजूद छठे प्रयास में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने अपने अनुभव, परिवार और पति के सहयोग से मानसिक मजबूती और नेतृत्व कौशल विकसित किया और महिलाओं को अपने लक्ष्य तय करने और शिक्षा में निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।

शिक्षा और प्रारंभिक प्रेरणा

अपूर्वा वर्मा की स्कूली शिक्षा पटना में हुई, जहां उनके माता-पिता ने उनके और उनके भाई-बहनों की पढ़ाई के लिए कठिन परिश्रम किया। 12वीं के बाद उन्होंने एनआईटी मणिपुर से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया। कॉलेज के दौरान उन्हें यूपीएससी की प्रेरणा मिली और उन्होंने दिल्ली में कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ-स्टडी की भी।

पहले प्रयास 2019 में असफल रहने के बाद 2020 में उन्होंने यूपीएससी और यूपीपीसीएस दोनों पास की। उनके परिवार और पति का समर्थन इस सफर में बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस अनुभव ने उन्हें मानसिक मजबूती और परिपक्वता दी, जो छठे प्रयास में उनके प्रदर्शन में नजर आई।

पुलिस सेवा और आत्मविश्वास

अपूर्वा ने दिल्ली पुलिस में अपने शुरुआती अनुभवों को याद करते हुए बताया कि छोटे शहर से आने के कारण शुरुआत में उन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस हुई। लेकिन सेवा में रहते हुए उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल को मजबूत किया। उनका मानना है कि पुलिस में महिलाओं की संवेदनशीलता और देखभाल करने की क्षमता महत्वपूर्ण योगदान देती है।

वे कहती हैं कि महिलाओं को अपनी आंतरिक शक्ति पर विश्वास करना चाहिए और नेतृत्व में सक्रिय भागीदारी से समाज और प्रशासन में सकारात्मक बदलाव संभव है।

महिलाओं के लिए संदेश और सामाजिक दृष्टिकोण

अपूर्वा ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने लक्ष्य निर्धारित करना और शिक्षा में निरंतर प्रयास करना सफलता का मूल मंत्र है। उनका दृष्टिकोण ‘गिव टू गेन’ पर आधारित है, जिसमें वे मानती हैं कि प्रशासन और समाज में महिलाओं की भागीदारी नीतियों और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाएगी। उन्होंने समाज से अपील की कि महिलाओं को कमतर न आंकें और उन्हें समर्थन दें, जिससे वास्तविक परिवर्तन संभव हो सके।

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