दक्षिणी लेबनान में इजराइल ने एक महीने से अधिक समय बाद निकासी चेतावनी जारी करने के बाद हवाई हमले किए। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, जबकि युद्धविराम को लेकर तनाव फिर बढ़ गया।
इजराइल/हिज़्बुल्लाह वॉर: दक्षिणी लेबनान में इजराइल ने एक महीने से अधिक समय बाद पहली बार नागरिकों के लिए निकासी चेतावनी जारी करने के तुरंत बाद हवाई हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि 12 अन्य लोग घायल हुए। इस घटना ने इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच लागू युद्धविराम की स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इजराइली सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह द्वारा युद्धविराम के "स्पष्ट उल्लंघन" के जवाब में की गई। हालांकि सेना ने आरोपों के समर्थन में तत्काल कोई सार्वजनिक साक्ष्य जारी नहीं किया।
तिबनीन और मंसूरी में हमले
स्थानीय मीडिया और अधिकारियों के अनुसार दक्षिणी लेबनान के तिबनीन कस्बे में स्थित कब्रिस्तान के प्रार्थना कक्ष की छत पर हमला हुआ। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हुए। इसी दौरान पश्चिम दिशा में स्थित मंसूरी कस्बे में भी हवाई हमलों की सूचना मिली। हमलों से लगभग आधे घंटे पहले इजराइली सेना ने अरबी भाषा में स्थानीय निवासियों को तत्काल क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की थी। यह जून के मध्य के बाद पहली ऐसी सार्वजनिक निकासी चेतावनी थी।
इजराइल का दावा
इजराइली सेना ने कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में "सटीक सैन्य कार्रवाई" (Precise Strikes) शुरू की है। सेना के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में हिजबुल्लाह की गतिविधियां युद्धविराम समझौते का उल्लंघन कर रही थीं। इजराइली मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार सेना के एक अधिकारी ने दावा किया कि मंसूरी क्षेत्र में लेबनानी सेना की मौजूदगी और विस्थापित नागरिकों की वापसी उस सुरक्षा व्यवस्था के विपरीत थी, जिसे इजराइल अपने नियंत्रण वाले सीमा क्षेत्र में लागू मानता है। हालांकि लेबनानी अधिकारियों और हिजबुल्लाह की ओर से इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
रोम में जारी थीं युद्धविराम वार्ताएं
यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय हुई जब इजराइल, लेबनान और अमेरिका के अधिकारी इटली की राजधानी रोम में युद्धविराम बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित वार्ता में शामिल थे। जून के अंत में अमेरिका की मध्यस्थता में एक त्रिपक्षीय रूपरेखा पर सहमति बनी थी। इस प्रस्ताव के तहत दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से इजराइली सेना की चरणबद्ध वापसी और उसके बदले हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण की योजना तैयार की गई थी। हालांकि हिजबुल्लाह ने इस समझौते का विरोध करते हुए कहा था कि इजराइल की वापसी को संगठन के निरस्त्रीकरण से जोड़ना स्वीकार्य नहीं है।
कुछ क्षेत्रों में हुई थी वापसी
दो सप्ताह पहले लेबनानी सेना को दक्षिणी लेबनान के एक "पायलट ज़ोन" में तैनात होने की अनुमति मिली थी। यह कदम तब उठाया गया जब इजराइली सेना ने ज़ावतार अल-घरबियेह गांव से अपनी वापसी की थी। इसे युद्धविराम लागू करने की दिशा में शुरुआती सकारात्मक संकेत माना जा रहा था। हालांकि ताजा घटनाओं ने इस प्रक्रिया को फिर से अनिश्चित बना दिया है।
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नागरिकों का फिर शुरू हुआ पलायन
मंसूरी के मेयर हैदर मदीहली ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इजराइली लड़ाकू विमानों ने कस्बे के बाहरी हिस्से में स्थित ग़ज़ालेह इलाके में कई इमारतों और विला को निशाना बनाया।
उन्होंने बताया कि हमलों के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपने घर छोड़कर दक्षिणी लेबनान के प्रमुख शहर टायर की ओर चले गए। लोग अपने आवश्यक सामान वाहनों में भरकर सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हुए। मेयर के अनुसार जून में युद्धविराम लागू होने के बाद लगभग 120 परिवार वापस लौटे थे, लेकिन हाल के हफ्तों में लगातार बढ़ते हमलों के कारण अधिकांश परिवार फिर से क्षेत्र छोड़ चुके हैं। वर्तमान में केवल 40 से 50 परिवार ही वहां रह रहे थे।
विस्थापितों की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार संघर्ष में कमी आने के बाद लेबनान में 8.2 लाख से अधिक विस्थापित लोग अपने घर लौटना शुरू कर चुके हैं। इसके बावजूद लगभग 3.6 लाख लोग अब भी विस्थापित हैं, जिनमें लगभग 26 हजार लोग सरकारी राहत शिविरों में रह रहे हैं। मानवीय एजेंसियों का कहना है कि लगातार सुरक्षा जोखिम के कारण प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
मार्च 2026 में क्षेत्रीय तनाव उस समय तेजी से बढ़ गया जब हिजबुल्लाह ने इजराइल की ओर रॉकेट दागे। इसके बाद इजराइल ने लेबनान में व्यापक हवाई अभियान शुरू किया और दक्षिणी क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई तेज कर दी। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार संघर्ष के दौरान अब तक 4,333 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 392 महिलाएं और 253 बच्चे शामिल बताए गए हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार युद्धविराम लागू होने के बाद भी 353 लोगों की मौत दर्ज की गई है। दूसरी ओर इजराइली अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष के दौरान सीमा के दोनों ओर कुल 38 इजराइली सैनिक और चार नागरिक मारे गए।
युद्धविराम पर मंडराते खतरे
विश्लेषकों का मानना है कि ताजा घटनाएं दर्शाती हैं कि युद्धविराम अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है। यदि दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो क्षेत्र में फिर व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील कर रहा है। रोम में जारी वार्ताओं का उद्देश्य भी यही है कि सीमा क्षेत्र में स्थायी शांति कायम की जा सके और विस्थापित नागरिक सुरक्षित रूप से अपने घर लौट सकें।









