इथियोपिया में प्रधानमंत्री Abiy Ahmed की पार्टी ने आम चुनाव में भारी जीत हासिल की है। हालांकि टिग्रे, अमहारा और ओरोमिया क्षेत्रों में जारी तनाव तथा सुरक्षा चुनौतियों के कारण देश में नए संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
अदीस अबाबा: इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। उनकी प्रॉस्पेरिटी पार्टी ने 501 में से 438 सीटों पर जीत हासिल कर संसद में भारी बहुमत प्राप्त किया है। इस जीत के साथ अबी अहमद अक्टूबर में एक और कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। हालांकि चुनावी सफलता के बावजूद देश के सामने सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय तनाव जैसी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।
संघर्ष की छाया में संपन्न हुआ चुनाव
इथियोपिया में चुनाव ऐसे समय आयोजित हुए जब देश के कई हिस्से हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे हैं। चुनाव के दौरान सुरक्षा कारणों से कई मतदान केंद्र नहीं खुल सके। खासकर अमहारा और ओरोमिया क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया।
फानो मिलिशिया और ओरोमो लिबरेशन आर्मी (OLA) जैसे संगठनों ने चुनाव और उसके परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इन समूहों का आरोप है कि केंद्र सरकार क्षेत्रीय अधिकारों और स्वायत्तता की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। इससे चुनावी नतीजों के बावजूद राजनीतिक तनाव कम होता नहीं दिख रहा।
तिग्रे क्षेत्र बना सबसे बड़ी चिंता
देश का उत्तरी तिग्रे क्षेत्र अब भी इथियोपिया की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। 2020 से 2022 तक चले भीषण गृहयुद्ध के बाद यह इलाका अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। सुरक्षा कारणों से तिग्रे को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जिससे वहां की लगभग 60 लाख आबादी मतदान में हिस्सा नहीं ले सकी।
विश्लेषकों का मानना है कि तिग्रे में एक बार फिर संघर्ष भड़कने की आशंका बढ़ रही है। क्षेत्र में राजनीतिक तनाव और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
शांति समझौते पर उठ रहे सवाल
नवंबर 2022 में इथियोपियाई सरकार और तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) के बीच शांति समझौता हुआ था, जिसने दो साल लंबे गृहयुद्ध को समाप्त किया था। हालांकि दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने के आरोप लगा रहे हैं।
हाल के महीनों में तिग्रे नेतृत्व और केंद्र सरकार के बीच संबंध और खराब हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राजनीतिक संवाद बहाल नहीं हुआ तो क्षेत्र में फिर से हिंसा भड़क सकती है। गृहयुद्ध के दौरान लाखों लोग प्रभावित हुए थे और हजारों लोगों की जान गई थी, इसलिए नए संघर्ष की आशंका पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।
युवाओं की भर्ती ने बढ़ाई चिंताएं
तिग्रे क्षेत्र में युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देने और सशस्त्र समूहों में भर्ती करने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का दावा है कि बड़ी संख्या में युवाओं को भविष्य के संभावित संघर्ष के लिए तैयार किया जा रहा है।
हालांकि क्षेत्रीय प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि यह केवल सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण है। बावजूद इसके, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
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इरिट्रिया के साथ बिगड़ते संबंध
प्रधानमंत्री अबी अहमद को 2019 में इरिट्रिया के साथ शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, लेकिन अब दोनों देशों के संबंधों में तनाव दिखाई दे रहा है।
इरिट्रिया और तिग्रे नेतृत्व के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर इथियोपिया में चिंता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि तिग्रे में फिर से संघर्ष शुरू होता है तो यह केवल इथियोपिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
सूडान संकट से बढ़ी क्षेत्रीय अस्थिरता
इथियोपिया पर पड़ोसी देश सूडान के गृहयुद्ध में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गठबंधनों ने हालात को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इथियोपिया, इरिट्रिया और सूडान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पूर्वी अफ्रीका की स्थिरता पर पड़ सकता है।
आर्थिक विकास बनाम सुरक्षा संकट
अबी अहमद के समर्थक उनकी सरकार को आर्थिक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास का श्रेय देते हैं। राजधानी अदीस अबाबा समेत देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं। विदेशी निवेश आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयास भी किए गए हैं।
हालांकि आलोचकों का तर्क है कि आर्थिक प्रगति तब तक स्थायी नहीं हो सकती जब तक देश में शांति और राजनीतिक स्थिरता स्थापित नहीं होती। उनका मानना है कि बढ़ती असुरक्षा और जातीय तनाव विकास की उपलब्धियों को कमजोर कर सकते हैं।
अबी अहमद के सामने बड़ी चुनौती
चुनाव में मिली भारी जीत ने अबी अहमद की राजनीतिक स्थिति को मजबूत जरूर किया है, लेकिन उनके नए कार्यकाल के सामने कई कठिन चुनौतियां मौजूद हैं। तिग्रे में बढ़ता तनाव, अमहारा और ओरोमिया में सक्रिय विद्रोह, इरिट्रिया के साथ खराब होते संबंध और क्षेत्रीय अस्थिरता उनकी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षाएं होंगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सभी पक्षों को साथ लेकर राष्ट्रीय संवाद की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इथियोपिया स्थिरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है। लेकिन यदि मौजूदा तनाव बढ़ता रहा, तो देश एक बार फिर बड़े संघर्ष और मानवीय संकट का सामना कर सकता है।
अबी अहमद की चुनावी जीत ने उन्हें मजबूत जनादेश दिया है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि यह जनादेश इथियोपिया को शांति और विकास की ओर ले जाता है या फिर देश एक नए राजनीतिक और सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।








