अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल-सयद ने मिशिगन की सीनेट सीट जीत ली है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराया। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से बड़ा नतीजा सामने आया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सयद ने रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स को हरा दिया है। 42 साल के अल-सयद अब अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे। बुधवार, 4 नवंबर को समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने उनकी जीत की पुष्टि की।
अल-सयद इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में बड़े पद पर काम कर चुके हैं। वह पिछले कई साल से राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी जीत की चर्चा अमेरिका के साथ दूसरे देशों में भी हो रही है।
मिशिगन में अब्दुल अल-सयद ने कैसे हासिल की जीत?
मिशिगन में अमेरिकी सीनेट की सीट के लिए इस बार मुकाबला अब्दुल अल-सयद और माइक रोजर्स के बीच था। अल-सयद डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ रहे थे, जबकि रोजर्स रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे। रोजर्स पहले अमेरिकी संसद के सदस्य रह चुके हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के कई बड़े नेताओं का समर्थन भी मिला था।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने अलग-अलग मुद्दों पर जनता से वोट मांगे। अब्दुल अल-सयद ने महंगाई, इलाज के बढ़ते खर्च और आम परिवारों की परेशानियों को उठाया। दूसरी ओर माइक रोजर्स ने ट्रंप की नीतियों और अपनी पार्टी के चुनावी मुद्दों पर जोर दिया। मतदान के बाद जब नतीजे सामने आए, तो अल-सयद ने रोजर्स को पीछे छोड़ दिया।
मिशिगन की यह सीट पहले डेमोक्रेटिक पार्टी के गैरी पीटर्स के पास थी। उन्होंने इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। अब उनकी जगह अल-सयद सीनेट में मिशिगन के लोगों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कौन हैं अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल अल-सयद?
अब्दुल अल-सयद का जन्म अमेरिका में हुआ था। उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मिशिगन में पूरी की। अल-सयद ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से पढ़ाई करने के बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की। इसके अलावा वह रोड्स स्कॉलर भी रह चुके हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की पढ़ाई की है।
राजनीति में आने से पहले वह स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काम करते थे। वह डेट्रॉयट शहर के स्वास्थ्य विभाग के निदेशक भी रह चुके हैं। साल 2018 में अल-सयद ने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव लड़ा था। हालांकि, उस समय उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वह कुछ समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहे।
इस दौरान उन्होंने किताब लिखी, पॉडकास्ट शुरू किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे। करीब आठ साल बाद उन्होंने सीनेट चुनाव में वापसी की और जीत हासिल कर ली।
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पत्नी सारा जुकाकू का भारत से है खास रिश्ता
अब्दुल अल-सयद का भारत से भी पारिवारिक संबंध है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक हैं और पेशे से मनोचिकित्सक हैं। सारा के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके परिवार की जड़ें कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित भटकल शहर से जुड़ी हैं। सारा और अब्दुल की मुलाकात यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में दोनों ने मई 2006 में शादी कर ली। उनकी दो बेटियां हैं।
अल-सयद अपने भारतीय ससुराल पक्ष से जुड़े अनुभवों का कई बार जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में मजाकिया अंदाज में कहा था कि भारतीय परिवार का हिस्सा रहते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति के बारे में काफी कुछ सीखा है।
चुनाव प्रचार में किन मुद्दों को उठाया?
अब्दुल अल-सयद ने अपने चुनाव प्रचार में महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च को प्रमुखता दी थी। उन्होंने 'मेडिकेयर फॉर ऑल' योजना का समर्थन किया। इसका उद्देश्य अमेरिका में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके अलावा उन्होंने चुनावों में बड़ी कंपनियों और अमीर दानदाताओं के प्रभाव को कम करने की बात कही। अल-सयद का कहना था कि राजनीतिक फैसलों में आम नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता देने का विरोध भी उनके चुनाव प्रचार का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। इस विषय पर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा। हालांकि, अल-सयद ने अपना प्रचार अभियान बढ़ती महंगाई, रोजगार और परिवारों के खर्च जैसी समस्याओं के आसपास केंद्रित रखा।
जीत के बाद अब्दुल अल-सयद ने समर्थकों से क्या कहा?
चुनाव जीतने के बाद अब्दुल अल-सयद ने डेट्रॉयट में अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने मिशिगन के लोगों का धन्यवाद किया और चुनाव प्रचार के दौरान मिले समर्थन को याद किया। अल-सयद ने बताया कि प्रचार के दौरान वह कई लोगों के घर गए। धार्मिक स्थलों और अलग-अलग कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने उन्हें अपनी परेशानियां बताईं और यह भी बताया कि वे अपने आने वाले कल से क्या उम्मीद रखते हैं।
अल-सयद ने कहा कि वह लोगों की इन्हीं बातों को लेकर वॉशिंगटन जाएंगे और उनके लिए काम करेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में उनकी टीम ने मिशिगन के छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक लोगों से मुलाकात की। चुनाव प्रचार में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनका साथ दिया। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय भी इन लोगों की मेहनत और समर्थन को दिया।









