भारतीय मूल की नित्या रमन लॉस एंजिल्स मेयर चुनाव में मौजूदा मेयर करेन बास से आगे चल रही हैं। केरल में जन्मीं रमन ने हार्वर्ड और MIT से पढ़ाई की है। जानिए उनका भारत से अमेरिकी राजनीति तक का सफर।
लॉस एंजिल्स: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल की नेता नित्या रमन चर्चा में हैं। लॉस एंजिल्स के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में उन्होंने मौजूदा मेयर करेन बास पर बढ़त बना ली है। बुधवार, 4 नवंबर तक की मतगणना में रमन को करीब 51.7 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बास को 48.3 प्रतिशत वोट हासिल हुए। हालांकि, गुरुवार, 5 नवंबर तक विजेता की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। केरल में जन्मीं रमन का अमेरिका की राजनीति तक पहुंचने का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है।
लॉस एंजिल्स मेयर चुनाव में नित्या रमन ने बनाई बढ़त
अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमन ने मौजूदा मेयर करेन बास को कड़ी चुनौती दी है। शुरुआती मतगणना में दोनों उम्मीदवारों के बीच मामूली अंतर था, लेकिन बाद में रमन आगे निकल गईं। 4 नवंबर की शाम तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, नित्या रमन को 4,05,193 वोट मिले थे। वहीं करेन बास को 3,79,069 वोट मिले। इस तरह रमन ने करीब 26 हजार वोटों की बढ़त बना ली थी।
हालांकि, अभी सभी वोटों की गिनती पूरी नहीं हुई है। अमेरिका में डाक से भेजे गए मतपत्रों की गिनती में समय लग सकता है। इसलिए चुनाव का अंतिम नतीजा घोषित होने के बाद ही तय होगा कि लॉस एंजिल्स की अगली मेयर कौन होंगी। नित्या रमन फिलहाल लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल की सदस्य हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक वह करेन बास का सार्वजनिक रूप से समर्थन कर रही थीं। लेकिन फरवरी 2026 में उन्होंने खुद मेयर पद का चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया।
केरल में हुआ जन्म, छह साल की उम्र में पहुंचीं अमेरिका
नित्या रमन का जन्म साल 1981 में केरल में हुआ था। जब वह छह साल की थीं, तब अपनी मां के साथ अमेरिका चली गईं। उनके पिता पहले से वहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। अमेरिका पहुंचने के बाद उनका परिवार मैसाचुसेट्स के बर्लिंगटन इलाके में रहने लगा। यहीं नित्या की शुरुआती पढ़ाई हुई। बचपन से ही उनकी दिलचस्पी पढ़ाई और सामाजिक मुद्दों में थी।
नित्या ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से साल 2003 में सोशल स्टडीज में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से अर्बन प्लानिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का मुख्य विषय शहरों का विकास और वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों को समझना था। आगे चलकर यही अनुभव उनके सामाजिक और राजनीतिक काम में भी उपयोगी साबित हुआ।
भारत लौटकर चेन्नई में शुरू किया था सामाजिक काम
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पढ़ाई पूरी करने के बाद नित्या रमन ने कुछ समय भारत में भी काम किया। दिल्ली और चेन्नई में रहते हुए उन्होंने गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को करीब से समझा। उन्होंने देखा कि कई इलाकों में लोगों को साफ पानी, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। इसके बाद उन्होंने 2010 में 'ट्रांसपेरेंट चेन्नई' नाम की संस्था शुरू करने में मदद की।
यह संस्था शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाने और प्रशासन तक पहुंचाने का काम करती थी। इसका उद्देश्य ऐसे इलाकों की समस्याएं सामने लाना था, जिन पर अक्सर सरकारी योजनाओं में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। साल 2013 में नित्या लॉस एंजिल्स चली गईं। वहां उन्होंने शहर के प्रशासन के साथ काम किया और बेघर लोगों की मदद करने वाले संगठन SELAH Neighborhood Homeless Coalition की स्थापना में सहयोग दिया। इसके अलावा वह महिलाओं के अधिकारों से जुड़े संगठन Time's Up Entertainment में भी कार्यकारी निदेशक रहीं।
साल 2020 में पहली बार जीता था सिटी काउंसिल का चुनाव
नित्या रमन ने साल 2020 में पहली बार लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल का चुनाव लड़ा। उन्होंने तत्कालीन सदस्य डेविड र्यू को हराकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई और पहली एशियाई अमेरिकी महिला बनीं। इसके बाद मार्च 2024 में उन्होंने दोबारा चुनाव जीता। सिटी काउंसिल में रहते हुए उन्होंने किराएदारों के अधिकार, सस्ते घरों की उपलब्धता और बेघर लोगों की सहायता जैसे मुद्दों पर काम किया।
नित्या का कहना रहा है कि शहर की समस्याओं का समाधान केवल नई योजनाएं बनाने से नहीं होगा, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि लोगों को उनका वास्तविक फायदा मिल रहा है या नहीं।
करेन बास और नित्या रमन के बीच किन मुद्दों पर रहा मुकाबला?
लॉस एंजिल्स मेयर चुनाव में करेन बास और नित्या रमन के बीच मुख्य मुकाबला शहर की सुरक्षा, महंगे घरों और बेघर लोगों की बढ़ती समस्याओं को लेकर रहा। करेन बास ने अपने कार्यकाल में अपराध कम करने, सस्ते मकानों के निर्माण और बेघर लोगों को आश्रय देने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। दूसरी तरफ नित्या रमन ने शहर की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की बात कही। उन्होंने बेघर लोगों की समस्या से निपटने के लिए बेहतर योजनाएं बनाने, मकानों का निर्माण बढ़ाने और सरकारी कामकाज को ज्यादा जवाबदेह बनाने का वादा किया।
चुनाव प्रचार में दोनों को अलग-अलग संगठनों का समर्थन मिला। बास के साथ लॉस एंजिल्स काउंटी डेमोक्रेटिक पार्टी और कई बड़े श्रमिक संगठन रहे। वहीं रमन को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका और परिवहन सुधार से जुड़े संगठन Streets For All का समर्थन मिला।









