इथियोपिया में वंदे मातरम की गूंज, PM मोदी ने तालियों से किया कलाकारों का सम्मान

इथियोपिया में वंदे मातरम की गूंज, PM मोदी ने तालियों से किया कलाकारों का सम्मान

अदीस अबाबा के भव्य डिनर हॉल में मंच पर इथियोपियाई कलाकार खड़े थे। जैसे ही वंदे मातरम गूंजा, कैमरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गया। मोदी मुस्कुराए, दोनों हाथ उठाए और तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा।

World News: इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने भारत के सम्मान को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई दे दी। भव्य डिनर हॉल के मंच पर इथियोपियाई कलाकार खड़े थे। जैसे ही उनके स्वर में भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की पहली पंक्तियां गूंजीं, माहौल पूरी तरह बदल गया। कैमरा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर गया। प्रधानमंत्री मुस्कुराए, दोनों हाथ उठाए और तालियों की गूंज से पूरे हॉल को भर दिया। यह सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि भारत और इथियोपिया के बीच गहरे सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गई।

राजकीय भोज में भारत का सम्मान

इथियोपिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक भव्य राजकीय डिनर का आयोजन किया था। इस विशेष अवसर की मेजबानी खुद इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने की। डिनर हॉल में मौजूद मेहमानों के लिए यह शाम पहले से ही खास थी, लेकिन जैसे ही मंच पर वंदे मातरम की प्रस्तुति शुरू हुई, यह पल इतिहास में दर्ज हो गया। इथियोपियाई गायकों का उच्चारण स्पष्ट था। सुरों में गंभीरता थी और भाव में भारत के लिए सम्मान झलक रहा था। यह साफ दिख रहा था कि यह प्रस्तुति औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल से दी गई श्रद्धांजलि थी।

प्रधानमंत्री मोदी की भावनात्मक प्रतिक्रिया

वंदे मातरम की धुन सुनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा भावुक मुस्कान से भर गया। उन्होंने पहले तालियां बजाईं और फिर दोनों हाथ ऊपर उठाकर कलाकारों की सराहना की। यह संकेत सिर्फ प्रशंसा का नहीं था, बल्कि एक राष्ट्र की ओर से दूसरे राष्ट्र को धन्यवाद देने का भाव था। हॉल में मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य का साक्षी बना। कई भारतीय प्रतिनिधियों की आंखें नम हो गईं। यह पल बताता है कि संगीत और संस्कृति कैसे देशों के बीच की दूरी को मिटा देती है।

पंद्रह वर्षों बाद भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा

यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। करीब पंद्रह वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इथियोपिया की यात्रा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल यहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, बल्कि इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित किया। यह दुनिया की 18वीं संसद बनी जहां प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण दिया। उनके संबोधन में दोस्ती, साझा इतिहास और भविष्य की साझेदारी पर जोर साफ दिखाई दिया।

इथियोपिया की संसद में मोदी का संदेश

इथियोपिया की संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और इथियोपिया केवल कूटनीतिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि सभ्यताओं के स्तर पर जुड़े हुए देश हैं। उन्होंने लोकतंत्र, विकास और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने की बात कही। यह भाषण भी उतना ही प्रभावशाली रहा जितना डिनर हॉल में गूंजा वंदे मातरम।

अफ्रीका का गर्व इथियोपिया

इथियोपिया केवल एक अफ्रीकी देश नहीं है, बल्कि यह पूरे महाद्वीप के गौरव का प्रतीक माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इथियोपिया की स्थापना लगभग 980 ईसा पूर्व हुई थी। यानी यह सभ्यता करीब तीन हजार साल पुरानी है। जब दुनिया के कई हिस्से उपनिवेशवाद की चपेट में थे, तब भी इथियोपिया ने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी। यही कारण है कि इस देश को अफ्रीका की आत्मा कहा जाता है।

उपनिवेशवाद के खिलाफ खड़ा राष्ट्र

जब एशिया और अफ्रीका के बड़े हिस्से यूरोपीय शक्तियों के अधीन हो गए थे, उस दौर में भी इथियोपिया ने अपनी आजादी बरकरार रखी। यही इतिहास उसे बाकी देशों से अलग बनाता है। भारत और इथियोपिया के बीच यह समानता भी है कि दोनों देशों ने अपने-अपने तरीके से स्वतंत्रता और आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखा। शायद यही वजह है कि वंदे मातरम की प्रस्तुति ने इथियोपिया की धरती पर इतना गहरा असर छोड़ा।

समय की अलग परंपरा वाला देश

इथियोपिया की सबसे अनोखी पहचान उसका समय और कैलेंडर है। यह देश आज की दुनिया से लगभग सात साल पीछे चलता है। जब रोमन चर्च ने 525 ईस्वी में कैलेंडर में बदलाव किए, तब इथियोपिया ने अपने प्राचीन कैलेंडर को बनाए रखा। इसी कारण यहां का समय ग्रेगोरियन कैलेंडर से अलग है। यही वजह है कि इथियोपिया को अक्सर सात साल पीछे चलने वाला देश कहा जाता है।

तेरह महीनों वाला साल

इथियोपिया का कैलेंडर और भी दिलचस्प है क्योंकि यहां साल 13 महीनों का होता है। आम तौर पर 12 महीने 30-30 दिनों के होते हैं। जो 13वां महीना होता है, वह सामान्य साल में 5 दिनों का और लीप ईयर में 6 दिनों का होता है। यह परंपरा हजारों साल पुरानी है और आज भी उसी गर्व के साथ निभाई जाती है। यही सांस्कृतिक आत्मविश्वास इथियोपिया को विशिष्ट बनाता है।

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